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विलायती बबूल मुक्त होगा इटावा सफारी पार्क
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Tue, 26 Jul 2016 11:46 PM IST
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शहर के इटावा सफारी पार्क के आसपास के क्षेत्र, फिशर फारेस्ट और सुमेर सिंह किला क्षेत्र को विलायती बबूल मुक्त किया जाएगा। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विशेष योजना तैयार की है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में शीशम, अर्जुन और चिलबिल के पौधे रोपे जाएंगे। इससे सफारी पार्क के आसपास वातावरण साफ सुथरा और हराभरा होगा। डीएफओ कन्हैया पटेल ने बताया कि जल्द ही उक्त योजना पर कार्य शुरू किया जाएगा। अपर प्रमुख वन संरक्षक बीके सिंह फिशर फारेस्ट क्षेत्र का निरीक्षण भी कर चुके हैं। उन्हाेंने डीएफओ और अन्य वन अधिकारियों के साथ सुमेरसिंह किले पर बैठक कर इस संदर्भ में चर्चा भी की।
शहर में इटावा सफारी पार्क के निर्माण के बाद सीएम अखिलेश यादव ने इसके आसपास के क्षेत्र को विकसित करने की तैयारी की है। पूरे क्षेत्र को विलायती बबूल मुक्त करने की तैयारी है। प्रमुख वन संरक्षक उत्तर प्रदेश उमेंद्र शर्मा के निर्देश पर अपर प्रमुख वन संरक्षक और निदेशक राज्य वन अनुसंधान संस्थान बीके सिंह ने चार दिन पूर्व फिशर फारेस्ट, राजा सुमेर सिंह किला और बाइस ख्वाजा मार्ग का निरीक्षण किया। उन्होंने डीएफओ कन्हैया पटेल से बबूल को पूरी तरह साफ करने पर चर्चा की। कहा कि मुख्यमंत्री चाहते हैं कि ये क्षेत्र पूरी तरह से बबूल मुक्त हो। इसके बाद उन्होंने राजा सुमेर सिंह किले का भी निरीक्षण किया और किले के पूर्वी, दक्षिणी छोर पर खड़ी झाड़ियों को साफ करने पर चर्चा की।
कानपुर रिसर्च सेंटर का विशेषज्ञ दल भी आया
इटावा। निरीक्षण दौरे में अपर प्रमुख वन संरक्षक श्री सिंह के साथ कानपुर रिसर्च सेंटर के विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि क्षेत्र वर्षों पुराने विलायती बबूल के पेड़ों से पटा है। इस बबूल के जंगल को खत्म करने के लिए दो तरीके हैं या तो इन्हें जड़ से उखाड़ा जाए या फिर इनके बीच वृक्षों का जंगल तैयार किया जाए। जिससे बबूल के पेड़ों का विकास अपने आप रुक जाए।
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योजना पर एक नजर
फिशर फारेस्ट का क्षेत्रफल-1415 हेक्टेयर (2800 एकड़)।
बाइस ख्वाजा रोड से भी हटेंगे बबूल।
3 एकड़ में बने किले के रेस्टोरेंट क्षेत्र और दक्षिणी छोर से साफ होगा बबूल का जंगल।
इटावा सफारी पार्क के आसपास कहीं नहीं दिखेगा बबूल।
रोपे जाएंगे हजारों शीशम, अर्जुन और चिलबिल के पौधे।
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शहर में इटावा सफारी पार्क के निर्माण के बाद सीएम अखिलेश यादव ने इसके आसपास के क्षेत्र को विकसित करने की तैयारी की है। पूरे क्षेत्र को विलायती बबूल मुक्त करने की तैयारी है। प्रमुख वन संरक्षक उत्तर प्रदेश उमेंद्र शर्मा के निर्देश पर अपर प्रमुख वन संरक्षक और निदेशक राज्य वन अनुसंधान संस्थान बीके सिंह ने चार दिन पूर्व फिशर फारेस्ट, राजा सुमेर सिंह किला और बाइस ख्वाजा मार्ग का निरीक्षण किया। उन्होंने डीएफओ कन्हैया पटेल से बबूल को पूरी तरह साफ करने पर चर्चा की। कहा कि मुख्यमंत्री चाहते हैं कि ये क्षेत्र पूरी तरह से बबूल मुक्त हो। इसके बाद उन्होंने राजा सुमेर सिंह किले का भी निरीक्षण किया और किले के पूर्वी, दक्षिणी छोर पर खड़ी झाड़ियों को साफ करने पर चर्चा की।
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कानपुर रिसर्च सेंटर का विशेषज्ञ दल भी आया
इटावा। निरीक्षण दौरे में अपर प्रमुख वन संरक्षक श्री सिंह के साथ कानपुर रिसर्च सेंटर के विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि क्षेत्र वर्षों पुराने विलायती बबूल के पेड़ों से पटा है। इस बबूल के जंगल को खत्म करने के लिए दो तरीके हैं या तो इन्हें जड़ से उखाड़ा जाए या फिर इनके बीच वृक्षों का जंगल तैयार किया जाए। जिससे बबूल के पेड़ों का विकास अपने आप रुक जाए।
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योजना पर एक नजर
फिशर फारेस्ट का क्षेत्रफल-1415 हेक्टेयर (2800 एकड़)।
बाइस ख्वाजा रोड से भी हटेंगे बबूल।
3 एकड़ में बने किले के रेस्टोरेंट क्षेत्र और दक्षिणी छोर से साफ होगा बबूल का जंगल।
इटावा सफारी पार्क के आसपास कहीं नहीं दिखेगा बबूल।
रोपे जाएंगे हजारों शीशम, अर्जुन और चिलबिल के पौधे।