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पावरलूमों को कनेक्शन देने में हुई बड़ी गड़बड़ी
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इटावा। जिले में चल रहे पावरलूमों को बिजली कनेक्शन देने में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। बिजली विभाग ने सहायक आयुक्त हथकरघा के प्रमाणपत्र के बिना करीब 1800 कनेक्शन बांट दिए। विभाग ने 2019 में जारी शासनादेश को भी हवा में उड़ा दिया। अपर मुख्य सचिव एमएसएमई के आदेश के बाद सहायक आयुक्त हथकरघा अब बिजली विभाग से बुनकरों की सूची लेकर जांच शुरू करने जा रहा है।
वर्ष 2006 में प्रदेश सरकार ने हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग को बड़ी राहत देते हुए फिक्स चार्ज पर बिजली देने के निर्देश जारी किए थे। इसके बाद बिजली विभाग प्रति पावरलूम 72 रुपये का फिक्स चार्ज वसूलने लगा। यह व्यवस्था 2019 तक चली। चार दिसंबर 2019 को शासन की ओर से नए नियम लागू किए गए और फिक्स चार्ज की जगह विद्युत दर में छूट की योजना शुरू कर दी गई। इसके बाद बिजली विभाग ने पावरलूम चलाने वालों को कॉमर्शियल कनेक्शन दिए।
योजना का लाभ लेने के लिए बुनकरों को सहायक आयुक्त हथकरघा से प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य कर दिया गया। इसी प्रमाणपत्र के आधार पर बिजली विभाग को बुनकरों को कनेक्शन और योजना का लाभ देना था। बिजली विभाग ने ऐसा नहीं किया। विभाग ने बिना प्रमाणपत्र देखे ही करीब 1800 बुनकरों को बिजली कनेक्शन दे दिए।
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इस मामले की जानकारी के बाद अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने सख्ती दिखाई और सहायक आयुक्त हथकरघा को जांच के आदेश दिए। सहायक आयुक्त की ओर से टीम गठित कर दी गई है। जल्द जांच शुरू होने की उम्मीद है।
ऐसे जारी होता है प्रमाणपत्र
अधीक्षक हथकरघा सर्वेश शुक्ला के मुताबिक अगर कोई पावरलूम की यूनिट स्थापित करता है तो उसे विभाग में प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करना होता है। प्रमाणपत्र देने से पहले वह जांच करते हैं कि यूनिट में कितनी क्षमता की मशीनें लगाई गई हैं और संचालक को कितनी क्षमता का कनेक्शन दिया जाना है। जिस स्थान पर यूनिट स्थापित की गई है, उस स्थान की पूरी जानकारी जुटाई जाती है। संचालक का आधार कार्ड, बैंक खाते की जानकारी, मोबाइल नंबर और पावरलूम की संख्या ली जाती है। इसके बाद प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। इसी प्रमाणपत्र के आधार पर बिजली विभाग तय की गई क्षमता के आधार पर कनेक्शन देता है और योजना के तहत छूट दी जाती है।
संख्या भी पता नहीं
पिछले दिनों सहायक आयुक्त हथकरघा की ओर से बिजली विभाग से जिले में चल रहे पावरलूमों की जानकारी मांगी गई थी। इस पर बिजली विभाग की ओर से 1171 कनेक्शन दिए जाने का डाटा दिया गया। जबकि एक्सईएन शहर में करीब 1800 पावरलूम कनेक्शन होने की बात कह रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि सही जानकारी तक विभाग को नहीं है।
- जिले में करीब 1800 पावरलूम कनेक्शन दिए गए हैं। यह सही है कि सहायक आयुक्त हथकरघा का प्रमाणपत्र होना जरूरी है। लेकिन नियम बदलने के बाद कनेक्शन देकर मीटर लगाना प्राथमिकता में था। शायद इसी कारण ऐसा हुआ। अभी कुछ पावरलूम यूनिटों ने कनेक्शन नहीं लिया है। इनकी जांच कराकर कनेक्शन जल्द दिए जाएंगे। - श्रीप्रकाश, एक्सईएन शहरी, बिजली विभाग।
- प्रमाणपत्र के बिना पावरलूम यूनिट को कनेक्शन नहीं दिया जा सकता। जिले में एक भी पावरलूम यूनिट को उनके विभाग ने प्रमाणपत्र जारी नहीं किया है। इसके बाद भी 1800 के करीब कनेक्शन दे दिए गए। जबकि उन्हें 1171 कनेक्शन होने की ही जानकारी दी गई। अपर मुख्य सचिव एमएसएमई के निर्देश पर बिजली विभाग से मिली सूची की जांच शुरू कराने के लिए टीम गठित की गई है। - सुनील यादव, सहायक आयुक्त, हथकरघा।
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वर्ष 2006 में प्रदेश सरकार ने हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग को बड़ी राहत देते हुए फिक्स चार्ज पर बिजली देने के निर्देश जारी किए थे। इसके बाद बिजली विभाग प्रति पावरलूम 72 रुपये का फिक्स चार्ज वसूलने लगा। यह व्यवस्था 2019 तक चली। चार दिसंबर 2019 को शासन की ओर से नए नियम लागू किए गए और फिक्स चार्ज की जगह विद्युत दर में छूट की योजना शुरू कर दी गई। इसके बाद बिजली विभाग ने पावरलूम चलाने वालों को कॉमर्शियल कनेक्शन दिए।
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योजना का लाभ लेने के लिए बुनकरों को सहायक आयुक्त हथकरघा से प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य कर दिया गया। इसी प्रमाणपत्र के आधार पर बिजली विभाग को बुनकरों को कनेक्शन और योजना का लाभ देना था। बिजली विभाग ने ऐसा नहीं किया। विभाग ने बिना प्रमाणपत्र देखे ही करीब 1800 बुनकरों को बिजली कनेक्शन दे दिए।
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इस मामले की जानकारी के बाद अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने सख्ती दिखाई और सहायक आयुक्त हथकरघा को जांच के आदेश दिए। सहायक आयुक्त की ओर से टीम गठित कर दी गई है। जल्द जांच शुरू होने की उम्मीद है।
ऐसे जारी होता है प्रमाणपत्र
अधीक्षक हथकरघा सर्वेश शुक्ला के मुताबिक अगर कोई पावरलूम की यूनिट स्थापित करता है तो उसे विभाग में प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करना होता है। प्रमाणपत्र देने से पहले वह जांच करते हैं कि यूनिट में कितनी क्षमता की मशीनें लगाई गई हैं और संचालक को कितनी क्षमता का कनेक्शन दिया जाना है। जिस स्थान पर यूनिट स्थापित की गई है, उस स्थान की पूरी जानकारी जुटाई जाती है। संचालक का आधार कार्ड, बैंक खाते की जानकारी, मोबाइल नंबर और पावरलूम की संख्या ली जाती है। इसके बाद प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। इसी प्रमाणपत्र के आधार पर बिजली विभाग तय की गई क्षमता के आधार पर कनेक्शन देता है और योजना के तहत छूट दी जाती है।
संख्या भी पता नहीं
पिछले दिनों सहायक आयुक्त हथकरघा की ओर से बिजली विभाग से जिले में चल रहे पावरलूमों की जानकारी मांगी गई थी। इस पर बिजली विभाग की ओर से 1171 कनेक्शन दिए जाने का डाटा दिया गया। जबकि एक्सईएन शहर में करीब 1800 पावरलूम कनेक्शन होने की बात कह रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि सही जानकारी तक विभाग को नहीं है।
- जिले में करीब 1800 पावरलूम कनेक्शन दिए गए हैं। यह सही है कि सहायक आयुक्त हथकरघा का प्रमाणपत्र होना जरूरी है। लेकिन नियम बदलने के बाद कनेक्शन देकर मीटर लगाना प्राथमिकता में था। शायद इसी कारण ऐसा हुआ। अभी कुछ पावरलूम यूनिटों ने कनेक्शन नहीं लिया है। इनकी जांच कराकर कनेक्शन जल्द दिए जाएंगे। - श्रीप्रकाश, एक्सईएन शहरी, बिजली विभाग।
- प्रमाणपत्र के बिना पावरलूम यूनिट को कनेक्शन नहीं दिया जा सकता। जिले में एक भी पावरलूम यूनिट को उनके विभाग ने प्रमाणपत्र जारी नहीं किया है। इसके बाद भी 1800 के करीब कनेक्शन दे दिए गए। जबकि उन्हें 1171 कनेक्शन होने की ही जानकारी दी गई। अपर मुख्य सचिव एमएसएमई के निर्देश पर बिजली विभाग से मिली सूची की जांच शुरू कराने के लिए टीम गठित की गई है। - सुनील यादव, सहायक आयुक्त, हथकरघा।