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Etawah News: गौरैया संरक्षण के लिए मुहिम चला रहीं डॉ. सुनीता
Wed, 20 Mar 2024 12:58 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Wed, 20 Mar 2024 12:58 AM IST
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इटावा। गौरैया अचानक हमारे जीवन से गायब सी हो गई है। यह चिड़िया विलुप्त होने की कगार पर है। विश्व गौरैया दिवस को गौरैया के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इसके अलावा घरेलू गौरैया के संरक्षण के उपायों के बारे में लोगों को बताते हैं। अब इस नन्हीं चिड़िया गौरैया के संरक्षण के लिए एक हाथ आगे आया हैं, जिन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य गौरैया संरक्षण का बना रखा है। इसे लेकर समाजसेवी और पक्षी प्रेमी डॉ. सुनीता सात साल से गौरैया संरक्षण को लेकर मुहिम चला रही हैं।
गंगा विहार कॉलोनी निवासी डॉ. सुनीता यादव 2017 से गौरैया संरक्षण के लिए अभियान चला रही हैं। उनका कहना है कि आजकल घर बहुत बड़े हो गए हैं, लेकिन हमने छोटी चिड़िया के लिए जगह नहीं छोड़ी है। उनके घर में 50 से अधिक घोंसले लगे हैं, जिनमें गौरैया रह रही हैं।
बताया कि वह गत्ते और बोरे की सहायता से कृत्रिम घोंसलों का निर्माण करती हैं और लोगों को भेंट भी करती हैं। बताया कि वह प्रतिदिन कम से कम एक घोंसला बनाती हैं। अभी तक 1000 से अधिक घोंसले बनाकर भेंट कर चुकी हैं। उनके बनाए हुए घोंसले प्रयागराज, गाजियाबाद, जयपुर, एटा, अलीगढ़, बरेली, मथुरा, मैनपुरी, आगरा आदि शहरों में गौरैया संरक्षण कर रहे हैं।
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इनसेट
इस तरह घर पर बना सकते हैं घोंसले
डॉ. सुनीता ने बताया कि लोग अपने घरों में नजर बट्टा न लगाकर गौरैया का घोंसला अवश्य लगाएं। घर में घोंसला नहीं है तो चप्पल, जूते के छोटे डिब्बे में गोल छेद करके या छोटी मटकी भी टांग सकते हैं। गौरैया अपना घोंसला उसमें आराम से बना लेती हैं। गर्मी का समय आ रहा है गौरैया के लिए दाना और पानी की व्यवस्था जरूर करें। इस पक्षी को गर्मी बहुत सताती है। इसे नहाना भी बहुत पसंद है। छत पर छायादार स्थान पर पानी की व्यवस्था जरूर करें।
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गंगा विहार कॉलोनी निवासी डॉ. सुनीता यादव 2017 से गौरैया संरक्षण के लिए अभियान चला रही हैं। उनका कहना है कि आजकल घर बहुत बड़े हो गए हैं, लेकिन हमने छोटी चिड़िया के लिए जगह नहीं छोड़ी है। उनके घर में 50 से अधिक घोंसले लगे हैं, जिनमें गौरैया रह रही हैं।
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बताया कि वह गत्ते और बोरे की सहायता से कृत्रिम घोंसलों का निर्माण करती हैं और लोगों को भेंट भी करती हैं। बताया कि वह प्रतिदिन कम से कम एक घोंसला बनाती हैं। अभी तक 1000 से अधिक घोंसले बनाकर भेंट कर चुकी हैं। उनके बनाए हुए घोंसले प्रयागराज, गाजियाबाद, जयपुर, एटा, अलीगढ़, बरेली, मथुरा, मैनपुरी, आगरा आदि शहरों में गौरैया संरक्षण कर रहे हैं।
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इस तरह घर पर बना सकते हैं घोंसले
डॉ. सुनीता ने बताया कि लोग अपने घरों में नजर बट्टा न लगाकर गौरैया का घोंसला अवश्य लगाएं। घर में घोंसला नहीं है तो चप्पल, जूते के छोटे डिब्बे में गोल छेद करके या छोटी मटकी भी टांग सकते हैं। गौरैया अपना घोंसला उसमें आराम से बना लेती हैं। गर्मी का समय आ रहा है गौरैया के लिए दाना और पानी की व्यवस्था जरूर करें। इस पक्षी को गर्मी बहुत सताती है। इसे नहाना भी बहुत पसंद है। छत पर छायादार स्थान पर पानी की व्यवस्था जरूर करें।