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बीच में इलाज न छोड़ें टीबी के रोगी
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Sun, 12 Jun 2016 11:37 PM IST
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- फोटो : bureau
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राष्ट्रीय पुनरीक्षित क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी जन जागरूकता गोष्ठी का आयोजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इकदिल में किया गया। कार्यक्रम में जिला समन्वयक निर्मल सिंह ने कहा कि टीबी रोगियों को इलाज बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। टीबी केे रोगी संपूर्ण आहार लेने के साथ ही आराम करें। इन्हें शराब, सिगरेट, बीड़ी, चरस, अफीम, गांजा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से इन्हें अन्य बीमारियों का भी खतरा रहता है। टीबी रोगियों को एचआईवी की भी जांच करानी चाहिए।
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गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डा. शिवेंद्र यादव ने कहा कि टीबी संक्रामक रोग है । यह खांसने व छींकने से हवा के जरिए एक से दूसरे में फैलता है। डाट्स पद्धति से नियमित इलाज में टीबी रोग छह से आठ माह में ठीक हो जाता है। एसटीएस शहरोज अहमद ने कहा कि टीबी का मरीज खांसते समय अपनेे मुंह पर कपड़ा रख कर ले तो संक्रमण को दूसरों में फैलने से रोका जा सकता है । क्षेत्र में 35 डाट्स सेंटर हैं। यहां डाट्स प्रोवाइडर मरीजों को दवा खिला रहे हैं। इस अवसर पर एसटीएलएस अनिल कुमार पाल, एलटी रिंकी पाल, फ ार्मासिस्ट अनिल यादव, राकेश कुमार, टीबी फोरम के डा. सुशील सम्राट आदि ने भी जानकारी दी। कार्यक्रम में दो दर्जन ग्रामीणों ने भाग लिया।
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