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Etawah News: जिला अस्पताल में डॉक्टरों का संकट
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इटावा। करोड़ों की लागत से बने जिला अस्पताल में भले ही व्यवस्थाएं बढ़ाई जा रही हों, लेकिन इसे चलाने के लिए डॉक्टरों का संकट खत्म नहीं हो रहा। करीब पांच विभागों में विशेषज्ञ न होने से संविदा और सेवानिवृत्त डॉक्टरों की मदद ली जा रही है। ऐसे में सामान्य मरीजों के अलावा अधिकांश को सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा।
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 1000 मरीज शहर के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से आते हैं। भीषण गर्मी के दिनों में यह संख्या और भी बढ़ जाती है। जिला अस्पताल की बड़ी इमारत और मशीनरी होने के बावजूद मरीज विशेषज्ञों को नहीं दिखा पाते हैं। जिला अस्पताल में डेढ़ साल से फिजीशियन तक न होने की वजह से जिला अस्पताल में संविदा के डॉक्टर मरीजों को देख रहे हैं।
कई विभागों को सेवानिवृत्त डॉक्टरों के सहारे किसी तरह चलाया जा रहा है। जिम्मेदारों का कहना है कि शासन को लगातार पत्र भेजे जा रहे हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल से सैफई दिखाने की सलाह दी जा रही है।
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व्यवस्था पर एक नजर
हृदय रोग विभाग : सर्दियों के दिनों में ह्रदय रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। जिला अस्पताल की ओपीडी में दिल के करीब 20 मरीज दिखाने के लिए आते हैं। यहां ह्रदय विशेषज्ञों के छह पद स्वीकृत हैं। सभी रिक्त होने की वजह से मरीजों को संविदा पर तैनात डॉक्टर सामान्य स्थितियों में दवा देकर घर भेज देते हैं। स्थिति गंभीर देखकर उन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज भेया जाता है।
बाल रोग विभाग : आम दिनों में ओपीडी में लगभग 200 बच्चे दिखाने के लिए आते हैं। इन्हें देखने के लिए जिला अस्पताल में सात पद स्वीकृत हैं। इनमें से सिर्फ एक पर ही स्थायी डॉक्टर तैनात हैं, जबकि छह पद रिक्त हैं। डॉक्टरों की कमी को देखते हुए एक सेवानिवृत्त डॉ. पीके गुप्ता सहयोग कर रहे हैं। ऐसे में बच्चे स्थिति गंभीर होने पर उसे सैफई मेडिकल कॉलेज ही रेफर करना पड़ता है।
ईएनटी (नाक, कान, गला) : जिला अस्पताल में नाक, कान, गले का मर्ज दिखाने के लिए ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 150 मरीज आते हैं। मौसम में उतार-चढ़ाव के समय इनकी संख्या और बढ़ जाती है। यहां दो पद स्वीकृत हैं। दोनों ही रिक्त होने की वजह से एक संविदा पर तैनात डॉक्टर से काम चलाया जा रहा है। वहीं, एक सेवानिवृत्त डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं।
सर्जन : जिला अस्पताल में छह सर्जन के पद स्वीकृत हैं। इनमें से वर्तमान में सिर्फ दो ही नियुक्त हैं। चार पद रिक्त हैं। ऐसे में जिला अस्पताल में ऑपरेशन के लिए मरीजों को कई-कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। पत्थरी जैसे सामान्य ऑपरेशनों के लिए डॉक्टर व्यस्तता की वजह से कई दिन बाद समय दे पाते हैं।
यह पद भी हैं रिक्त
जिला अस्पताल में फिजीशियन के चार पद स्वीकृत हैं। लगभग डेढ़ साल से यहां एक भी फिजीशियन नहीं हैं। वहीं, हड्डी रोग विशेषज्ञों के चार पद स्वीकृत हैं। इनमें से सिर्फ दो ही डॉक्टर कार्यरत हैं। दंत रोग विभाग में दो पद हैं। दोनों ही पद रिक्त होने की वजह से संविदा के दो डॉक्टरों से काम चलाया जा रहा है।
दो साल में आठ बार किया पत्राचार
सीएमओ डॉ. गीताराम ने बताया कि प्रदेश में डॉक्टरों की कमी की वजह से जिला अस्पताल पर भी इसका असर रहता है। शासन को दो साल में करीब आठ बार पत्राचार किया जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द डॉक्टर मिलेंगे।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 1000 मरीज शहर के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से आते हैं। भीषण गर्मी के दिनों में यह संख्या और भी बढ़ जाती है। जिला अस्पताल की बड़ी इमारत और मशीनरी होने के बावजूद मरीज विशेषज्ञों को नहीं दिखा पाते हैं। जिला अस्पताल में डेढ़ साल से फिजीशियन तक न होने की वजह से जिला अस्पताल में संविदा के डॉक्टर मरीजों को देख रहे हैं।
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कई विभागों को सेवानिवृत्त डॉक्टरों के सहारे किसी तरह चलाया जा रहा है। जिम्मेदारों का कहना है कि शासन को लगातार पत्र भेजे जा रहे हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल से सैफई दिखाने की सलाह दी जा रही है।
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व्यवस्था पर एक नजर
हृदय रोग विभाग : सर्दियों के दिनों में ह्रदय रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। जिला अस्पताल की ओपीडी में दिल के करीब 20 मरीज दिखाने के लिए आते हैं। यहां ह्रदय विशेषज्ञों के छह पद स्वीकृत हैं। सभी रिक्त होने की वजह से मरीजों को संविदा पर तैनात डॉक्टर सामान्य स्थितियों में दवा देकर घर भेज देते हैं। स्थिति गंभीर देखकर उन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज भेया जाता है।
बाल रोग विभाग : आम दिनों में ओपीडी में लगभग 200 बच्चे दिखाने के लिए आते हैं। इन्हें देखने के लिए जिला अस्पताल में सात पद स्वीकृत हैं। इनमें से सिर्फ एक पर ही स्थायी डॉक्टर तैनात हैं, जबकि छह पद रिक्त हैं। डॉक्टरों की कमी को देखते हुए एक सेवानिवृत्त डॉ. पीके गुप्ता सहयोग कर रहे हैं। ऐसे में बच्चे स्थिति गंभीर होने पर उसे सैफई मेडिकल कॉलेज ही रेफर करना पड़ता है।
ईएनटी (नाक, कान, गला) : जिला अस्पताल में नाक, कान, गले का मर्ज दिखाने के लिए ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 150 मरीज आते हैं। मौसम में उतार-चढ़ाव के समय इनकी संख्या और बढ़ जाती है। यहां दो पद स्वीकृत हैं। दोनों ही रिक्त होने की वजह से एक संविदा पर तैनात डॉक्टर से काम चलाया जा रहा है। वहीं, एक सेवानिवृत्त डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं।
सर्जन : जिला अस्पताल में छह सर्जन के पद स्वीकृत हैं। इनमें से वर्तमान में सिर्फ दो ही नियुक्त हैं। चार पद रिक्त हैं। ऐसे में जिला अस्पताल में ऑपरेशन के लिए मरीजों को कई-कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। पत्थरी जैसे सामान्य ऑपरेशनों के लिए डॉक्टर व्यस्तता की वजह से कई दिन बाद समय दे पाते हैं।
यह पद भी हैं रिक्त
जिला अस्पताल में फिजीशियन के चार पद स्वीकृत हैं। लगभग डेढ़ साल से यहां एक भी फिजीशियन नहीं हैं। वहीं, हड्डी रोग विशेषज्ञों के चार पद स्वीकृत हैं। इनमें से सिर्फ दो ही डॉक्टर कार्यरत हैं। दंत रोग विभाग में दो पद हैं। दोनों ही पद रिक्त होने की वजह से संविदा के दो डॉक्टरों से काम चलाया जा रहा है।
दो साल में आठ बार किया पत्राचार
सीएमओ डॉ. गीताराम ने बताया कि प्रदेश में डॉक्टरों की कमी की वजह से जिला अस्पताल पर भी इसका असर रहता है। शासन को दो साल में करीब आठ बार पत्राचार किया जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द डॉक्टर मिलेंगे।