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Etawah News: फसल खराब होने से परेशान किसान ने फंदा लगाकर दी जान
Sun, 04 Oct 2026 11:16 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Sun, 04 Oct 2026 11:16 PM IST
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फोटो 06::प्रमोद कुमार। फाइल फोटो
इटावा। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के विजयपुरा गांव में फसल लगातार खराब होने से मानसिक तनाव में चल रहे किसान ने शनिवार रात खेत पर दुपट्टे के सहारे फंदा लगाकर जान दे दी। जानकारी होने पर परिजनों में चीख-पुकार मच गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच-पड़ताल के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य इकट्ठा किए हैं।
विजयपुरा निवासी प्रमोद कुमार (50) 15 बीघा जमीन पर खेती करते थे। उनके भाई धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि पिछले कुछ समय से फसल लगातार खराब होने के कारण प्रमोद काफी चिंतित और मानसिक तनाव में थे। एक बीघा खेती में करीब 10 हजार रुपये की लागत आती है। इस वर्ष उन्होंने पहले बाजरा बोया था, लेकिन मौसम खराब होने से फसल बर्बाद हो गई। इसके बाद दोबारा बाजरा बोया, वह भी खराब हो गया।
बाद में उन्होंने तिल की फसल बोई, लेकिन बारिश और खराब मौसम के कारण वह भी बर्बाद हो गई। धर्मेंद्र ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले प्रमोद काफी परेशान थे। उस समय उन्होंने भाई को चिंता न करने और आगे सब ठीक होने की बात कही थी। पिछले साल भी आलू की फसल में नुकसान हुआ था। लगातार हो रहे नुकसान से वह आर्थिक परेशानी के साथ मानसिक तनाव में थे। प्रमोद छह भाइयों में तीसरे नंबर के थे। उनके परिवार में पत्नी रजनी, दो बेटियां और एक बेटा है।
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पत्नी रजनी का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रमोद की मां कंठ श्री भी उनके साथ रहती थीं। सभी भाई अलग-अलग रहते हैं। धर्मेंद्र जसवंतनगर के रुकनपुर में सरकारी शिक्षक हैं, जबकि छोटा भाई दीपेंद्र कुमार गाजियाबाद में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात है। खेती की जिम्मेदारी प्रमोद ही संभालते थे। प्रभारी निरीक्षक केके मिश्रा ने बताया कि प्रथमदृष्टया फसल में हो रहे नुकसान की वजह से आत्महत्या करने की बात सामने आई है। फॉरेंसिक टीम ने मौके से आवश्यक साक्ष्य जुटाए हैं।
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विजयपुरा निवासी प्रमोद कुमार (50) 15 बीघा जमीन पर खेती करते थे। उनके भाई धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि पिछले कुछ समय से फसल लगातार खराब होने के कारण प्रमोद काफी चिंतित और मानसिक तनाव में थे। एक बीघा खेती में करीब 10 हजार रुपये की लागत आती है। इस वर्ष उन्होंने पहले बाजरा बोया था, लेकिन मौसम खराब होने से फसल बर्बाद हो गई। इसके बाद दोबारा बाजरा बोया, वह भी खराब हो गया।
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बाद में उन्होंने तिल की फसल बोई, लेकिन बारिश और खराब मौसम के कारण वह भी बर्बाद हो गई। धर्मेंद्र ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले प्रमोद काफी परेशान थे। उस समय उन्होंने भाई को चिंता न करने और आगे सब ठीक होने की बात कही थी। पिछले साल भी आलू की फसल में नुकसान हुआ था। लगातार हो रहे नुकसान से वह आर्थिक परेशानी के साथ मानसिक तनाव में थे। प्रमोद छह भाइयों में तीसरे नंबर के थे। उनके परिवार में पत्नी रजनी, दो बेटियां और एक बेटा है।
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पत्नी रजनी का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रमोद की मां कंठ श्री भी उनके साथ रहती थीं। सभी भाई अलग-अलग रहते हैं। धर्मेंद्र जसवंतनगर के रुकनपुर में सरकारी शिक्षक हैं, जबकि छोटा भाई दीपेंद्र कुमार गाजियाबाद में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात है। खेती की जिम्मेदारी प्रमोद ही संभालते थे। प्रभारी निरीक्षक केके मिश्रा ने बताया कि प्रथमदृष्टया फसल में हो रहे नुकसान की वजह से आत्महत्या करने की बात सामने आई है। फॉरेंसिक टीम ने मौके से आवश्यक साक्ष्य जुटाए हैं।