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Etawah News: चंबल में बढ़ रहा डॉल्फिन का कुनबा, 14 साल में ढाई गुना हुई संख्या
Sun, 04 Oct 2026 11:21 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Sun, 04 Oct 2026 11:21 PM IST
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फोटो 11::चंबल में अठखेलियां करता डॉल्फिन। संवाद
चकरनगर (इटावा)। चंबल की निर्मल धारा और शांत वातावरण राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन के लिए मुफीद साबित हो रहा है। कभी गिने-चुने जोड़ों तक सीमित रहने वाली डॉल्फिन अब चंबल में कुनबा बढ़ा रही हैं। वर्ष 2012 में हुई गणना में जहां चंबल में 74 डॉल्फिन दर्ज की गई थीं, वहीं 2022 में इनकी संख्या बढ़कर 174 हो गई। वर्ष 2026 की ताजा गणना में इटावा और बाह रेंज में कुल 194 डॉल्फिन मिली हैं। इनमें इटावा क्षेत्र में 174 और बाह में 20 डॉल्फिन दर्ज की गई हैं।
चंबल नदी में डॉल्फिन के संरक्षण की शुरुआत वर्ष 1979 में पांच जोड़े छोड़े जाने के साथ हुई थी। इसके बाद लगातार संरक्षण, आखेट पर रोक और नदी का अनुकूल वातावरण डॉल्फिन के लिए वरदान साबित हुआ। चंबल सेंचुरी क्षेत्र में सहसों से पचनद के बीच करीब आठ किमी का इलाका अब डॉल्फिन की अठखेलियों के लिए खास पहचान बना चुका है। यहां एक साथ कई डॉल्फिन पानी में गोता लगाते और अचानक सतह पर उछलते दिखाई देती हैं।
डॉल्फिन का यह आकर्षण अब पर्यटकों को भी चंबल किनारे खींच रहा है। औरैया, जालौन, झांसी, मैनपुरी के अलावा दिल्ली, हरियाणा और मध्यप्रदेश के भिंड-ग्वालियर तक से लोग यहां पहुंच रहे हैं। विदेशी पर्यटकों की आमद भी बढ़ रही है। पर्यटक घंटों चंबल किनारे बैठकर डॉल्फिन की गतिविधियां देखते हैं और उन्हें कैमरे में कैद करते हैं।
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डॉल्फिन वन विश्राम गृह बन रहा आकर्षण
सहसों स्थित डॉल्फिन वन विश्राम गृह धीरे-धीरे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। चंबल किनारे बने दर्शन केंद्र से डॉल्फिन की अठखेलियां देखने का अलग ही रोमांच है। ग्रामीणों और वन विभाग के प्रयास से क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखने से भी डॉल्फिन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। डॉल्फिन संरक्षण के लिए करीब 20 किमी क्षेत्र में आखेट प्रतिबंधित है।
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सहसों को संरक्षण केंद्र बनाने की तैयारी
राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी परियोजना के उप वन संरक्षक राजेश कुमार सिंह के अनुसार सहसों को डॉल्फिन संरक्षण और इको टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसमें जगतोली, सहसों डॉल्फिन वन विश्राम गृह, सिद्धनाथ मंदिर और महुआ सूडा को प्रमुख आकर्षण के रूप में विकसित करने की योजना है। प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है। मंजूरी मिलने के बाद क्षेत्र में डॉल्फिन संरक्षण के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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सहसों के आसपास करीब 40 किमी के दायरे में बड़ी संख्या में डॉल्फिन पाई जाती हैं। अकेले सहसों क्षेत्र में करीब 70 से 90 डॉल्फिन दिखाई देने लगी हैं। स्वच्छ पानी, पर्याप्त जलीय जीव और शांत वातावरण इनके लिए अनुकूल है।
-कोटेश त्यागी, रेंजर, चंबल सेंचुरी
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चंबल नदी में डॉल्फिन के संरक्षण की शुरुआत वर्ष 1979 में पांच जोड़े छोड़े जाने के साथ हुई थी। इसके बाद लगातार संरक्षण, आखेट पर रोक और नदी का अनुकूल वातावरण डॉल्फिन के लिए वरदान साबित हुआ। चंबल सेंचुरी क्षेत्र में सहसों से पचनद के बीच करीब आठ किमी का इलाका अब डॉल्फिन की अठखेलियों के लिए खास पहचान बना चुका है। यहां एक साथ कई डॉल्फिन पानी में गोता लगाते और अचानक सतह पर उछलते दिखाई देती हैं।
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डॉल्फिन का यह आकर्षण अब पर्यटकों को भी चंबल किनारे खींच रहा है। औरैया, जालौन, झांसी, मैनपुरी के अलावा दिल्ली, हरियाणा और मध्यप्रदेश के भिंड-ग्वालियर तक से लोग यहां पहुंच रहे हैं। विदेशी पर्यटकों की आमद भी बढ़ रही है। पर्यटक घंटों चंबल किनारे बैठकर डॉल्फिन की गतिविधियां देखते हैं और उन्हें कैमरे में कैद करते हैं।
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डॉल्फिन वन विश्राम गृह बन रहा आकर्षण
सहसों स्थित डॉल्फिन वन विश्राम गृह धीरे-धीरे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। चंबल किनारे बने दर्शन केंद्र से डॉल्फिन की अठखेलियां देखने का अलग ही रोमांच है। ग्रामीणों और वन विभाग के प्रयास से क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखने से भी डॉल्फिन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। डॉल्फिन संरक्षण के लिए करीब 20 किमी क्षेत्र में आखेट प्रतिबंधित है।
सहसों को संरक्षण केंद्र बनाने की तैयारी
राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी परियोजना के उप वन संरक्षक राजेश कुमार सिंह के अनुसार सहसों को डॉल्फिन संरक्षण और इको टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसमें जगतोली, सहसों डॉल्फिन वन विश्राम गृह, सिद्धनाथ मंदिर और महुआ सूडा को प्रमुख आकर्षण के रूप में विकसित करने की योजना है। प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है। मंजूरी मिलने के बाद क्षेत्र में डॉल्फिन संरक्षण के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सहसों के आसपास करीब 40 किमी के दायरे में बड़ी संख्या में डॉल्फिन पाई जाती हैं। अकेले सहसों क्षेत्र में करीब 70 से 90 डॉल्फिन दिखाई देने लगी हैं। स्वच्छ पानी, पर्याप्त जलीय जीव और शांत वातावरण इनके लिए अनुकूल है।
-कोटेश त्यागी, रेंजर, चंबल सेंचुरी

फोटो 11::चंबल में अठखेलियां करता डॉल्फिन। संवाद