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संशोधित-योगी मंत्रिमंडल में स्थान न मिलने से मायूसी
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इटावा। जिस जनपद के दो राजनेताओं को चार बार मुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त हुआ हो, आज वह प्रदेश सरकार में एक मंत्री पद पाने को तरस रहा है। योगी सरकार के लगातार दूसरे मंत्रिमंडल में भी इटावा को मायूसी ही हाथ लगी है। सरिता भदौरिया के इटावा सदर सीट से दोबारा जीतने पर उम्मीद थी कि इस बार उन्हें मंत्रिपरिषद में शामिल कर लिया जाएगा।
इटावा ने 5 दिसंबर 1989 में प्रदेश में पहली बार बनी जनता दल सरकार में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने, उनके साथ ही इटावा सदर सीट से विधायक बनीं सुखदा मिश्रा को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। उन्हें नगर विकास मंत्रालय दिया गया था। इसके बाद प्रदेश में 1991 में कल्याण सिंह के नेतृत्व में पहली बार बनी भाजपा सरकार में जनपद के दो विधायकों अशोक दुबे और केके राज में से किसी को भी मंत्री नहीं बनाया गया था। उस दौरान अशोक दुबे को मंत्री बनाए जाने की चर्चाएं जोरों पर रहीं थी। वर्ष 2017 के चुनाव में फिर से इटावा से सरिता भदौरिया व सावित्री कठेरिया चुनाव जीतीं, लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार में इनमें से किसी को मंत्रिपरिषद में जगह नहीं मिली थी।
वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में जरुर भाजपा जनपद में सिर्फ इटावा सदर सीट जीत सकी और सरिता भदौरिया लगातार दूसरी बार विधायक बनने में सफल रहीं। इस जीत के साथ ही उन्हें योगी सरकार में मंत्री बनाने की अटकलें जोरों पर चल रहीं थीं। शपथ ग्रहण होने तक उन्हें मंत्री बनाने की चर्चाएं सोशल मीडिया पर उनके समर्थक और भाजपा कार्यकर्ता चलाते रहे, लेकिन भाजपा सरकार इस बार भी इटावा से किसी विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया। सपा सरकार में जसवंतनगर से विधायक रहे शिवपाल सिंह यादव 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव की सरकार में मंत्री रहे, लेकिन इटावा सदर सीट से किसी को मंत्री बने 33 साल का लंबा अर्सा बीत चुका है।
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पड़ोस के दो जिलों से बनाए गए मंत्री
इटावा के पड़ोसी दो जिलों से योगी की दूसरी सरकार में मंत्रिमंडल में विधायकों को शामिल किया गया है। मैनपुरी की सदर सीट से जीतने वाले जयवीर सिंह को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, जबकि कन्नौज सदर सीट से विजयी हुए पूर्व आईपीएस असीम अरुण को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में मंत्रिपरिषद में जगह मिली है।
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इटावा ने 5 दिसंबर 1989 में प्रदेश में पहली बार बनी जनता दल सरकार में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने, उनके साथ ही इटावा सदर सीट से विधायक बनीं सुखदा मिश्रा को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। उन्हें नगर विकास मंत्रालय दिया गया था। इसके बाद प्रदेश में 1991 में कल्याण सिंह के नेतृत्व में पहली बार बनी भाजपा सरकार में जनपद के दो विधायकों अशोक दुबे और केके राज में से किसी को भी मंत्री नहीं बनाया गया था। उस दौरान अशोक दुबे को मंत्री बनाए जाने की चर्चाएं जोरों पर रहीं थी। वर्ष 2017 के चुनाव में फिर से इटावा से सरिता भदौरिया व सावित्री कठेरिया चुनाव जीतीं, लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार में इनमें से किसी को मंत्रिपरिषद में जगह नहीं मिली थी।
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वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में जरुर भाजपा जनपद में सिर्फ इटावा सदर सीट जीत सकी और सरिता भदौरिया लगातार दूसरी बार विधायक बनने में सफल रहीं। इस जीत के साथ ही उन्हें योगी सरकार में मंत्री बनाने की अटकलें जोरों पर चल रहीं थीं। शपथ ग्रहण होने तक उन्हें मंत्री बनाने की चर्चाएं सोशल मीडिया पर उनके समर्थक और भाजपा कार्यकर्ता चलाते रहे, लेकिन भाजपा सरकार इस बार भी इटावा से किसी विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया। सपा सरकार में जसवंतनगर से विधायक रहे शिवपाल सिंह यादव 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव की सरकार में मंत्री रहे, लेकिन इटावा सदर सीट से किसी को मंत्री बने 33 साल का लंबा अर्सा बीत चुका है।
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पड़ोस के दो जिलों से बनाए गए मंत्री
इटावा के पड़ोसी दो जिलों से योगी की दूसरी सरकार में मंत्रिमंडल में विधायकों को शामिल किया गया है। मैनपुरी की सदर सीट से जीतने वाले जयवीर सिंह को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, जबकि कन्नौज सदर सीट से विजयी हुए पूर्व आईपीएस असीम अरुण को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में मंत्रिपरिषद में जगह मिली है।