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बूंदाबांदी के साथ छाया घना कोहरा
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इटावा/बकेवर। मौसम के बिगड़े मिजाज का दौर जारी है। मंगलवार को बदली और बूंदाबांदी, बुधवार को खिली धूप के बाद बृहस्पतिवार की सुबह की शुरुआत घने कोहरा से हुई।
इस वजह से न्यूनतम तापमान में एक डिग्री की कमी देखने को मिली। बुधवार को न्यूनतम तापमान आठ डिग्री रहा, जबकि अधिकतम तापमान में एक डिग्री की बढ़ोतरी देखने को मिली। बुधवार को अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहा।
बृहस्पतिवार को दिसंबर के महीने के पहले कोहरे की वजह से लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सुबह छाए घना कोहरे की वजह से बच्चों को स्कूल छोड़ने जाने वाले लोगों को वाहनों की हेडलाइट जलाकर धीमी गति से चलना पड़ा।
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दुकानदारों को दुकान बैठने से पहले आग जलाकर हाथ गर्म करना पड़ा। दोपहर तक कोहरे का असर देखने को मिला। लोग गर्म कपड़े संग गर्म टोपी और मफलर बांधे नजर आए।
सुबह घने कोहरे की वजह से सड़कें भी पानी से भीगीं हुईं थीं। सुबह करीब सात बजे पचास मीटर की दूरी तक देखना मुश्किल हो रहा था। हाईवे और रेलवे ट्रैक पर कोहरा कुछ ज्यादा घना दिखाई पड़ा।
सिविल लाइन स्थित पुरानी दीवानी क्षेत्र में सुबह करीब चार घंटे बिजली गुल होने की वजह से लोगों को और भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ऐसे में घरों में लोग सबमर्सिबल से पानी नहीं भर सके, या जिनके घर में रात का पानी भरा था, उसे गर्म नहीं कर सके, लिहाजा बच्चों को तैयार कर स्कूल भेजने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
राहत की बात यह रही कि ठंडी हवाएं नहीं चलीं, वर्ना तापमान और नीचे नहीं आता बल्कि लोगों का घरों से बाहर निकलना और भी ज्यादा दूभर होता। कृषि विज्ञान केंद्र के फसल वैज्ञानिक इंजीनियर भूपेंद्र सिंह चौहान का कहना है कोहरा और रात में पाला पड़ने से गेहूं को छोड़कर आलू और सरसों की फसल को नुकसान होगा।
इस समय यही तीन मुख्य फसलें हैं। बताया कि इस समय जड़ों में आलू बन रहा है। पाला पड़ने से हरी पत्तियां सूख जाएंगी और पीली हो जाएंगी। कहा कि सरसों में भी दाने पड़ रहे हैं, पाला पड़ने से ग्रोथ रुक जाएगी और दाना नहीं बन पाएगा।
फसलों का कैसे करें बचाव
वैज्ञानिक भूपेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि आलू व सरसों की फसल को बचाने के लिए किसान रात के समय खेतों में पानी लगा दें। ऐसा करने से फसलों पर पाला का असर नहीं पड़ेगा। बताया कि अभी बूंदाबांदी होने और कोहरा पड़ने की संभावना बरकरार है।
कोहरे से आलू उत्पादक किसान चिंतित
कोहरा पड़ने से आलू किसान चिंतित होने लगे हैं। कोहरे से आलू की फसल को नुकसान हो सकता है। सरसों की फसल को भी थोड़ा बहुत नुकसान कोहरे से हो सकता है, जबकि गेहूं की फसल के लिए कोहरा लाभदायक है।
कोहरा की शुरुआत होने से आलू किसान अब चिंतित होने लगे हैं, क्योंकि कोहरे से आलू की फसल को नुकसान होने की संभावना है। इंहौंआ के आलू किसान राजू तिवारी का कहना हैं अगर कोहरा रहा और धूप नहीं निकली तो आलू की फसल पर झुलसा रोग लगने की आशंका से इनकार नहीं कर सकते।
दवाओं का प्रयोग किसानों को झुलसा रोग से बचाव के लिए करना पड़ेगा। करीब 10 दिन तक कोहरे की घनी चादर छाए रहने से आलू में झुलसा रोग लग सकता है।
सरसों की फसल पर भी कोहरे से फूलों के गिरने से नुकसान हो सकता है। हालांकि, सरसों की फसल में बहुत ज्यादा नुकसान की संभावना नहीं है।
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इस वजह से न्यूनतम तापमान में एक डिग्री की कमी देखने को मिली। बुधवार को न्यूनतम तापमान आठ डिग्री रहा, जबकि अधिकतम तापमान में एक डिग्री की बढ़ोतरी देखने को मिली। बुधवार को अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहा।
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बृहस्पतिवार को दिसंबर के महीने के पहले कोहरे की वजह से लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सुबह छाए घना कोहरे की वजह से बच्चों को स्कूल छोड़ने जाने वाले लोगों को वाहनों की हेडलाइट जलाकर धीमी गति से चलना पड़ा।
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दुकानदारों को दुकान बैठने से पहले आग जलाकर हाथ गर्म करना पड़ा। दोपहर तक कोहरे का असर देखने को मिला। लोग गर्म कपड़े संग गर्म टोपी और मफलर बांधे नजर आए।
सुबह घने कोहरे की वजह से सड़कें भी पानी से भीगीं हुईं थीं। सुबह करीब सात बजे पचास मीटर की दूरी तक देखना मुश्किल हो रहा था। हाईवे और रेलवे ट्रैक पर कोहरा कुछ ज्यादा घना दिखाई पड़ा।
सिविल लाइन स्थित पुरानी दीवानी क्षेत्र में सुबह करीब चार घंटे बिजली गुल होने की वजह से लोगों को और भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ऐसे में घरों में लोग सबमर्सिबल से पानी नहीं भर सके, या जिनके घर में रात का पानी भरा था, उसे गर्म नहीं कर सके, लिहाजा बच्चों को तैयार कर स्कूल भेजने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
राहत की बात यह रही कि ठंडी हवाएं नहीं चलीं, वर्ना तापमान और नीचे नहीं आता बल्कि लोगों का घरों से बाहर निकलना और भी ज्यादा दूभर होता। कृषि विज्ञान केंद्र के फसल वैज्ञानिक इंजीनियर भूपेंद्र सिंह चौहान का कहना है कोहरा और रात में पाला पड़ने से गेहूं को छोड़कर आलू और सरसों की फसल को नुकसान होगा।
इस समय यही तीन मुख्य फसलें हैं। बताया कि इस समय जड़ों में आलू बन रहा है। पाला पड़ने से हरी पत्तियां सूख जाएंगी और पीली हो जाएंगी। कहा कि सरसों में भी दाने पड़ रहे हैं, पाला पड़ने से ग्रोथ रुक जाएगी और दाना नहीं बन पाएगा।
फसलों का कैसे करें बचाव
वैज्ञानिक भूपेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि आलू व सरसों की फसल को बचाने के लिए किसान रात के समय खेतों में पानी लगा दें। ऐसा करने से फसलों पर पाला का असर नहीं पड़ेगा। बताया कि अभी बूंदाबांदी होने और कोहरा पड़ने की संभावना बरकरार है।
कोहरे से आलू उत्पादक किसान चिंतित
कोहरा पड़ने से आलू किसान चिंतित होने लगे हैं। कोहरे से आलू की फसल को नुकसान हो सकता है। सरसों की फसल को भी थोड़ा बहुत नुकसान कोहरे से हो सकता है, जबकि गेहूं की फसल के लिए कोहरा लाभदायक है।
कोहरा की शुरुआत होने से आलू किसान अब चिंतित होने लगे हैं, क्योंकि कोहरे से आलू की फसल को नुकसान होने की संभावना है। इंहौंआ के आलू किसान राजू तिवारी का कहना हैं अगर कोहरा रहा और धूप नहीं निकली तो आलू की फसल पर झुलसा रोग लगने की आशंका से इनकार नहीं कर सकते।
दवाओं का प्रयोग किसानों को झुलसा रोग से बचाव के लिए करना पड़ेगा। करीब 10 दिन तक कोहरे की घनी चादर छाए रहने से आलू में झुलसा रोग लग सकता है।
सरसों की फसल पर भी कोहरे से फूलों के गिरने से नुकसान हो सकता है। हालांकि, सरसों की फसल में बहुत ज्यादा नुकसान की संभावना नहीं है।