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इटावाः 300 बीघा धान-मक्का की फसल को नुकसान

Fri, 30 Sep 2022 01:18 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 30 Sep 2022 01:18 AM IST
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Damage to 300 bigha paddy-maize crop
कुड़रिया रजवाह में खंदी फटने से डूबी फसल। संवाद - फोटो : ETAWAH
बकेवर। कुड़रिया रजबहा की खंदी कटने से करीब 300 बीघा खेतों में आठ दिन से भरे पानी से धान और मक्का की फसलों को नुकसान हुआ है। किसानों ने जिला प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।
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बारिश के दौरान कुड़रिया रजबहा की खंती कंढैय्या गांव के पास 21 सितंबर को कट गई थी। अगले दिन किसानों ने खंदी को बोरी लगाकर बंद कर दिया था, लेकिन पानी का बहाव रुका नहीं। पानी कुड़रिया के साथ ही कंढैय्या व सराय मिट्ठे गांवों के खेतों में भर गया। इससे फसलें जलमग्न हो गईं। तीनों गांवों की करीब 300 बीघा खेतों में खड़ी धान और मक्का की फसलें खराब हो रही हैं।
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सरसों और आलू की बुआई के लिए तैयार खेतों में घुटनों तक पानी भर गया है। कुड़रिया निवासी किसान पवन तिवारी ने बताया कि उनके 20 बीघा खेतों में पानी भरा है। 10 बीघा में खड़ी बाजरे की फसल खराब हो गई है। सरसों की बुआई के लिए खेत तैयार थे, अब पानी भरे होने से सरसों की बुआई नहीं हो पाएगी।
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कुड़रिया निवासी किसान छंगे ठाकुर बताते हैं कि खंदी कटने से उनके 10 बीघा खेत में पानी भर गया है। करीब चार बीघा की बाजरे की फसल में अभी भी पानी भरा है। पानी में धूप पड़ने से बालियां सड़ रही हैं। इससे पूरी मेहनत खराब हो गई। उन्हें मुआवजा मिलने चाहिए। एसडीएम भरथना कुमार सत्यमजीत ने बताया कि टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। अगर फसलों को नुकसान हुआ है तो नियमानुसार मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
अब नहीं हो पाएगी सरसों की बुआई
किसान लालजी कहते हैं कि उन्होंने बटाई पर खेत दिए दिए थे। सरसों की बुआई के लिए जुताई कराकर खेत तैयार किए थे। एक खेत में बाजरा की फसल थी, जो पानी भर जाने से खराब हो गई। अब पानी भरा होने से सरसों की बुआई नहीं हो पाएगी।

अभी तक किसी ने नहीं सुनी समस्या
वेदप्रकाश प्रजापति बोले कि पांच बीघा खेत में खड़ी बाजरा की फसल डूब गई है। फसल अब पानी भरा होने से गलने लगी है। पानी निकालने की कोई जगह भी नहीं है। अब गेहूं की बुआई ही कर पाएंगे। अभी तक किसी ने उनकी समस्या तक नहीं सुनी है।

लालजी। संवाद

लालजी। संवाद- फोटो : ETAWAH

वेदप्रकाश प्रजापति। संवाद

वेदप्रकाश प्रजापति। संवाद- फोटो : ETAWAH

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