{"_id":"5dfd17718ebc3e879c0105d4","slug":"cultural-etawha-news-knp533473795","type":"story","status":"publish","title_hn":"वो चाहते हैं हिंदुस्तान छोड़ दें हम......","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वो चाहते हैं हिंदुस्तान छोड़ दें हम......
विज्ञापन
इटावा। नुमाइश पंडाल में कौमी एकता पर आधारित अखिल भारतीय मुशायरे का आयोजन किया गया। मुशायरे की अध्यक्षता करते हुए शायर डॉ. राहत इंदौरी ने जब मैं जब मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना, लहू से मेरी पेशानी पर हिंदुस्तान लिख देना... कलाम पढ़ा तो महफिल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी।
कार्यक्रम का शुभारंभ सदर विधायक सरिता भदौरिया, जिलाधिकारी जेबी सिंह, एसडीएम सदर सिद्धार्थ व चेयरमैन नगर पालिका परिषद नौशाबा खानम ने मंच पर शमा रोशन कर किया।
शायरा शबीना अदीब ने तुम्हारे हर सितम पर मुस्कुराना हमको आता है...। शायरा अंजुम रहबर ने कहा हमसे फिर प्यार का इजहार किया है तूने, यह तमाशा तो कई बार किया है तूने...। मकनपुर से आए शायर काशिफ अदीब ने कहा तुम भी मुझको ऐसा वैसा समझेगा, होश में आओ अपने जैसा समझेगा...। अली बाराबंकी ने कहा कि करो तुम लाख लागू शहरियत तरमीमी बिल...। फतेहपुर से आईं शायरा गुलेसबा ने कहा बीज नफरत के किसी को न बोने देंगे...। हास्य शायर सुंदर मालेगांव महाराष्ट्र ने कहा बुझी बुझी है तबीयत मेरी हिरन कर दे...। झांसी से आए शायर सरवर कमाल ने कहा हमने भी तो खून की किस्तें चुकाई ऐ वतन... ।
विज्ञापन
मुंबई से आए गजलकार महशर आफरीदी ने कहा वो चाहते हैं हिंदुस्तान छोड़ दें हम, बताओ भूत के डर से मकान छोड़ दें हम...। मंजर भोपाली ने कहा हर एक चेहरे को सच्चाई मत समझ लेना... कलाम पेश किए।
हाशिम फीरोजाबादी, हसन काजमी लखनऊ, सलमान, बन्ने मन्सूरी, शरद बाजपेई ने कलाम प्रस्तुत किए।
विज्ञापन
कार्यक्रम का शुभारंभ सदर विधायक सरिता भदौरिया, जिलाधिकारी जेबी सिंह, एसडीएम सदर सिद्धार्थ व चेयरमैन नगर पालिका परिषद नौशाबा खानम ने मंच पर शमा रोशन कर किया।
विज्ञापन
शायरा शबीना अदीब ने तुम्हारे हर सितम पर मुस्कुराना हमको आता है...। शायरा अंजुम रहबर ने कहा हमसे फिर प्यार का इजहार किया है तूने, यह तमाशा तो कई बार किया है तूने...। मकनपुर से आए शायर काशिफ अदीब ने कहा तुम भी मुझको ऐसा वैसा समझेगा, होश में आओ अपने जैसा समझेगा...। अली बाराबंकी ने कहा कि करो तुम लाख लागू शहरियत तरमीमी बिल...। फतेहपुर से आईं शायरा गुलेसबा ने कहा बीज नफरत के किसी को न बोने देंगे...। हास्य शायर सुंदर मालेगांव महाराष्ट्र ने कहा बुझी बुझी है तबीयत मेरी हिरन कर दे...। झांसी से आए शायर सरवर कमाल ने कहा हमने भी तो खून की किस्तें चुकाई ऐ वतन... ।
विज्ञापन
मुंबई से आए गजलकार महशर आफरीदी ने कहा वो चाहते हैं हिंदुस्तान छोड़ दें हम, बताओ भूत के डर से मकान छोड़ दें हम...। मंजर भोपाली ने कहा हर एक चेहरे को सच्चाई मत समझ लेना... कलाम पेश किए।
हाशिम फीरोजाबादी, हसन काजमी लखनऊ, सलमान, बन्ने मन्सूरी, शरद बाजपेई ने कलाम प्रस्तुत किए।