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चाचा-भतीजे ने की थी हत्या
ब्यूरो, अमर उजाला, इटावा
Updated Thu, 02 Mar 2017 11:49 PM IST
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पकड़े गए आरेापियों के साथ पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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जसवंत नगर के गांव भीखनपुर में नानी और नातिन की हत्या पारिवारिक देवर और भतीजे ने की थी। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या में इस्तेमाल किया गया फावड़ा और खुरपी भी बरामद कर लिया है। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में आरोपियों ने हत्या की बात स्वीकार ली है। हत्या की वजह खेत से पानी न निकलने देने का विवाद बताया गया है। पुलिस ने आरोपियों को जेल भेज दिया है।
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पुलिस लाइन में दोहरे हत्याकांड का खुलासा करते हुए एसएसपी शिव हरी मीना ने बताया 25 फरवरी की रात जसवंत नगर थाना क्षेत्र के गांव भीखनपुर में ऊषा देवी पत्नी कप्तान सिंह और उनकी धेवती अन्नू की उनके ही घर में हत्या कर दी गई थी। कप्तान सिंह ने अपने ही परिवार के राकेश यादव उर्फ कजरी पुत्र राम स्वरूप के अलावा इसके एक अन्य साथी को नामजद किया था।
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इस दोहरे हत्याकांड का खुलासा करने के लिए उन्होंने जसवंत नगर पुलिस के साथ ही क्राइम ब्रांच की टीम को लगाया था। क्राइम ब्रांच प्रभारी अजहर अली को मुखबिर ने सूचना दी कि राकेश अपने एक साथी के साथ कचौरा तिराहे के पास मौजूद है। वह कहीं भागने की फिराक में है। इस पर उन्होंने प्रभारी निरीक्षक जयवीर सिंह के साथ छापा मारकर राकेश यादव के साथ ही अरुण कुमार यादव उर्फ कन्हैया पुत्र अरविंद यादव को गिरफ्तार कर लिया।
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पूछताछ में दोनों ने हत्या करने की बात स्वीकार कर ली। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया फावड़ा और खुरपी भी बरामद कर ली। पुलिस ने खून से सने कपड़े भी बरामद किए है। हत्याकांड का खुलासा करने वाली टीम को एसएसपी ने पांच हजार रुपये इनाम दिया है। प्रेस कांफ्रेंस में एएसपी रामकिशुन यादव भी मौजूद रहे। े
खेत से पानी व निकालने देना बना मौत का कारण
कप्तान सिंह के पास ही अरुण कुमार यादव के भी खेत हैं। उसके खेत में लगे ट्यूबवेल की नाली कप्तान सिंह के खेत से ही होकर जाती है। विवाद होने पर ऊषा देवी ने अपने खेत से पानी निकालने के लिए मना कर दिया था। इस पर दोनों पक्षों में झगड़ा भी हुआ था। इसके बाद से अरुण उससे रंजिश रखने लगा था। ऊषा की हत्या के लिए उसने पारिवारिक चाचा राकेश यादव को भी साजिश में शामिल कर लिया। इसकेे बाद 25 फरवरी की रात दोनों ने मिलकर नानी और नातिन की हत्या कर दी और भाग निकले। राकेश और अरुण पर पहले से भी मामले दर्ज हैं।
अन्नू ने देख लिया तो उसे भी मार डाला
25 फरवरी की रात अरुण ने कप्तान सिंह के घर जाकर दरवाजा खटखटाया। उस समय कप्तान सिंह खेतों पर थे तो ऊषा देवी ने ही दरवाजा खेला। दरवाजा खुलने के बाद अरुण रिश्ते में लगने वाली चाची से बातचीत करने लगा। इसी बीच राकेश भी पहुंच गया। उसने वहां रखे फावडे़ से ऊषा देवी के सिर पर वार कर दिया।
इस पर वह चारपाई से उठीं और आंगन में जाकर गिर पड़ी दोनो ने बाद ताबड़तोड़ उनके सिर पर ईंटाें से प्रहार कर मौत के घाट उतार दिया। इसी बीच दस वर्षीय अन्नू की नींद खुल गई। उसने हत्या करते देख लिया। इस पर अरुण ने खुरपी से प्रहार कर उसकी भी हत्या कर दी। अरुण ने बताया कि राज खुलने के डर से अन्नू की हत्या की थी।