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सिपाही पद पर चयनित तीन की मार्कशीट फर्जी
Mon, 21 Jan 2019 11:41 PM IST
प्रतीक दुबे
अमर उजाला, इटावा
अमर उजाला, इटावा
Published by: प्रतीक दुबे
Updated Mon, 21 Jan 2019 11:41 PM IST
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प्रतीकात्मक
सपा शासन में आयोजित सिपाही भर्ती 2015 में चयनित तीन अभ्यर्थियों की मार्कशीट फर्जी पाई गई है। सोमवार को उनके खिलाफ सिविल लाइन थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया गया है। तीनों के दस्तावेज फर्जी होने की आशंका पर नियुक्तिपत्र रोक दिए गए थे।
2015 में मेरिट के आधार पर चालीस हजार सिपाहियों की भर्ती की गई थी। इसमें भरथना के टडा निवासी अभिषेक कुमार पुत्र जागेश्वर दयाल, बसरेहर के संतोषपुर घाट निवासी दीपक कुमार पुत्र नाथू राम और भरथना के बाजपेई नगर निवासी हरी किशन पुत्र मुंशीलाल का चयन कर लिया गया था। भर्ती बोर्ड ने चयनित अभ्यर्थियों की मार्कशीटों का सत्यापन कराया तो वे फर्जी पाई गईं। बोर्ड ने इसकी जानकारी एसएसपी इटावा को दी। एसएसपी इटावा ने इन तीनों के दस्तावेजों की जांच कराई। मार्कशीट फर्जी पाए जाने पर अभिषेक कुमार, दीपक कुमार व हरी किशन के खिलाफ एसएसपी कार्यालय के लिपिक राजकुमार ने सिविल लाइन थाने में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। इनकी जांच में तीन साल लगे।
एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मार्कशीट पर जो रोल नंबर थे, जांच में दूसरे के नाम पर पाए गए। इनको नियुक्तिपत्र जारी नहीं किए गए थे। भर्ती के लिए आवेदन करते समय इनके अलावा चार अन्य ने भी तथ्यों को छुुपाकर आवेदन किया था। उनके खिलाफ थानों में पहले ही रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है।
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2015 में मेरिट के आधार पर चालीस हजार सिपाहियों की भर्ती की गई थी। इसमें भरथना के टडा निवासी अभिषेक कुमार पुत्र जागेश्वर दयाल, बसरेहर के संतोषपुर घाट निवासी दीपक कुमार पुत्र नाथू राम और भरथना के बाजपेई नगर निवासी हरी किशन पुत्र मुंशीलाल का चयन कर लिया गया था। भर्ती बोर्ड ने चयनित अभ्यर्थियों की मार्कशीटों का सत्यापन कराया तो वे फर्जी पाई गईं। बोर्ड ने इसकी जानकारी एसएसपी इटावा को दी। एसएसपी इटावा ने इन तीनों के दस्तावेजों की जांच कराई। मार्कशीट फर्जी पाए जाने पर अभिषेक कुमार, दीपक कुमार व हरी किशन के खिलाफ एसएसपी कार्यालय के लिपिक राजकुमार ने सिविल लाइन थाने में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। इनकी जांच में तीन साल लगे।
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एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मार्कशीट पर जो रोल नंबर थे, जांच में दूसरे के नाम पर पाए गए। इनको नियुक्तिपत्र जारी नहीं किए गए थे। भर्ती के लिए आवेदन करते समय इनके अलावा चार अन्य ने भी तथ्यों को छुुपाकर आवेदन किया था। उनके खिलाफ थानों में पहले ही रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है।
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