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इटावा एआरटीओ में एक और फर्जीवाड़े का खुलासा

Thu, 21 Feb 2019 11:52 PM IST
प्रतीक दुबे अमर उजाला, इटावा
अमर उजाला, इटावा Published by: प्रतीक दुबे Updated Thu, 21 Feb 2019 11:52 PM IST
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Another fake disclosure in Etawah ARTO
fraud
एआरटीओ कार्यालय में 11 माह पहले हुए भ्रष्टाचार के मामले में एक और नया तथ्य सामने आया है। बुधवार को नारायण कालेज ऑफ साइंस एवं आर्ट्स की बसों के फिटनेस के नाम पर धनराशि लेने और ब्योरा अभिलेख में दर्ज नहीं करने पर तत्कालीन एआरटीओ हिमांशु जैन समेत तीन लोगों के खिलाफ सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। यह रिपोर्ट कोर्ट के आदेश पर कालेज प्रबंधन ने दर्ज कराई है।
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11 माह पहले एआरटीओ दफ्तर में अवकाश के दिन कार्य होने की सूचना पर तत्कालीन एसएसपी वैभव कृष्ण ने छापा डलवाया था। तब एक प्राइवेट व्यक्ति प्रदीप गुप्ता उर्फ गुड्डा कार्य करता मिला। पता चला कि एआरटीओ कार्यालय में प्रदीप की बहुत धाक थी। सभी कार्य वही करता था। वाहनों के फिटनेस आदि कार्यों का धन जमा कर रसीद भी खुद ही जारी करता था। बाद में इसी मामले में हिमांशु जैन और एआरटीओ प्रवर्तन मोहम्मद अजीम को गिरफ्तार किया गया था। महिला बेबी का भी नाम सामने आया था। उसे पुलिस आज तक पकड़ नहीं पाई है। ।
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भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ होने पर नए अफसर व क्लर्क आए तो तमाम वाहनों की फिटनेस, रजिस्ट्रेशन आदि की धनराशि का ब्योरा राजस्व अभिलेखों में नहीं पाया गया। जांच में पता चला कि वाहन स्वामियों ने धनराशि जमा की है। रसीदें उनके पास हैं। इसी तरह की धोखाधड़ी नारायण कालेज साइंस एंड आर्ट्स के निदेशक के साथ हुई। बसों की फिटनेस आदि की करीब ढाई लाख रुपये की धनराशि की रसीद तो कालेज निदेशक को मिली, परंतु ब्योरा अभिलेखों में दर्ज नहीं था। निदेशक हरिकिशोर तिवारी पुत्र सुमित नारायण ने पुलिस से गुहार लगाई। सुनवाई न होने पर कोर्ट गए। बुधवार को कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन एआरटीओ प्रशासन हिमांशु जैन, प्रदीप और बेबी के खिलाफ सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज हुआ। यात्री कर अधिकारी एके जैसल ने बताया कि हिमांशु जैन और मोहम्मद अजीम को पहले के मामले में जमानत मिल चुकी है। दोनों लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध हैं।
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