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दो दिनों में 13 गोवंशों की मौत
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इटावा। जिले की सबसे बड़ी गोशाला परौली रमाइन में बीमारी के चलते दो दिनों में 13 गोवंशों ने दम तोड़ दिया है। डेढ़ दर्जन गोवंश बीमार हैं। शवों को ठीक तरीके से दफन न करने पर मंगलवार को भड़के ग्रामीणों ने महिलाओं के हंगामा किया। गोशाला के गेट पर ताला डालने की भी कोशिश की गई।
मंगलवार को दो दिनों के अंदर मरे हुए गोवंशों के शवों को कर्मचारियों ने गोशाला के किनारे डाल रखा था। पास के गांव नगला हरी के लोगों को दुर्गंध का एहसास हुआ तो पुरुष एवं महिलाएं वहां पहुंच गए। उन्हाेंने गोवंशों की मौत पर रोष जताया। गांव के लोगों का कहना था कि यहां हर रोज एक-दो गोवंशों की मौत हो जाती है।
गोशाला में लगे कर्मचारी मौत के आंकड़े छिपाने में जुटे रहते हैं। गांव के लोगों ने गोशाला के मुख्य द्वार पर नारेबाजी की। गांव के लोगों का कहना है कि जब से गोशाला बनी है। दुर्गंध के कारण जीना दूभर हो गया है।
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ग्रामीणों ने बताया कि परौली रमाइन गोशाला का निर्माण करीब आठ माह पूर्व हुआ है। यहां वर्तमान में तकरीबन 1088 गोवंश रखे गए हैं। मरे हुए 13 गोवंशों के शवों को गोशाला के पीछे गांव की तरफ डाल दिया गया है। बाद में गांव वालों के विरोध के बाद उन्हें गोशाला में ही दफना दिया गया।
गोशाला के रिकॉर्ड के अनुसार आठ माह में करीब 170 से ज्यादा गोवंशों की मौत हो चुकी है। गोशाला के पशु चिकित्सक डॉ. नरेश यादव ने बताया कि गोशाला में बड़ी तादाद में ऐसा गोवंश हैं जिसकी हालत पहले से ही खराब है। पहले से बीमार और उम्रदराज गोवंशों का उपचार किया जाता है। यहां उम्रदराज गोवंशों की मृत्युदर अधिक है। मरने वाले गोवंशों में ज्यादातर उम्रदराज और पहले से बीमार गोवंश हैं।
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मंगलवार को दो दिनों के अंदर मरे हुए गोवंशों के शवों को कर्मचारियों ने गोशाला के किनारे डाल रखा था। पास के गांव नगला हरी के लोगों को दुर्गंध का एहसास हुआ तो पुरुष एवं महिलाएं वहां पहुंच गए। उन्हाेंने गोवंशों की मौत पर रोष जताया। गांव के लोगों का कहना था कि यहां हर रोज एक-दो गोवंशों की मौत हो जाती है।
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गोशाला में लगे कर्मचारी मौत के आंकड़े छिपाने में जुटे रहते हैं। गांव के लोगों ने गोशाला के मुख्य द्वार पर नारेबाजी की। गांव के लोगों का कहना है कि जब से गोशाला बनी है। दुर्गंध के कारण जीना दूभर हो गया है।
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ग्रामीणों ने बताया कि परौली रमाइन गोशाला का निर्माण करीब आठ माह पूर्व हुआ है। यहां वर्तमान में तकरीबन 1088 गोवंश रखे गए हैं। मरे हुए 13 गोवंशों के शवों को गोशाला के पीछे गांव की तरफ डाल दिया गया है। बाद में गांव वालों के विरोध के बाद उन्हें गोशाला में ही दफना दिया गया।
गोशाला के रिकॉर्ड के अनुसार आठ माह में करीब 170 से ज्यादा गोवंशों की मौत हो चुकी है। गोशाला के पशु चिकित्सक डॉ. नरेश यादव ने बताया कि गोशाला में बड़ी तादाद में ऐसा गोवंश हैं जिसकी हालत पहले से ही खराब है। पहले से बीमार और उम्रदराज गोवंशों का उपचार किया जाता है। यहां उम्रदराज गोवंशों की मृत्युदर अधिक है। मरने वाले गोवंशों में ज्यादातर उम्रदराज और पहले से बीमार गोवंश हैं।