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Etawah News: आठ साल में नहीं दिखा सके बिजली चोरी के साक्ष्य, कोर्ट ने किया दोषमुक्त

Sat, 03 Jan 2026 11:31 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 03 Jan 2026 11:31 PM IST
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Could not show evidence of electricity theft in eight years, court acquitted him
इटावा। बिजली चोरी पकड़ने का अभियान निगम के अधिकारी चलाते ही रहते हैं। इन दिनों यह अभियान चर्चा का विषय भी बने हुए हैं। वहीं इस बीच अपर सत्र न्यायाधीश अंकुर शर्मा की कोर्ट आठ साल से चल रहे बिजली चोरी के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने वाले जेई साक्ष्य ही प्रस्तुत नहीं कर सके। ऐसे में आठ साल के बाद आरोपी को कोर्ट ने दोषमुक्त किया है।
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25 जनवरी 2017 को प्रवर्तन दल (विजिलेंस) ने गांव सादिकपुर में एक आटा चक्की पर छापा मारा था। विभाग का आरोप था कि इलम सिंह नाम के व्यक्ति ने अपने मीटर को बाईपास कर एलटी लाइन से सीधे तार जोड़कर बिजली चोरी की थी। मौके से आठ हाथ लंबा केबल जब्त करने और करीब आठ लाख रुपये का राजस्व बकाया होने का दावा भी किया था। इस मामले में जेई ने इलम सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। विशेष अदालत इसका मुकदमा चला। करीब आठ साल तक चले इस मामले में बिजली विभाग यह तक साबित नहीं कर पाया। अपर सत्र न्यायाधीश अंकुर शर्मा की कोर्ट ने इलम सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। करीब आठ साल तक चले इस मामले में बिजली विभाग यह तक साबित नहीं कर पाया कि जिस आटा चक्की पर छापा मारा गया था, वह वास्तव में इलम सिंह की ही थी।
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मजदूर के कहने पर मान ली थी इलम सिंह की चक्की:::सुनवाई के दौरान जब गवाहों से तीखे सवाल हुए तो जेई ने अदालत में कुबूल किया कि उन्हें चक्की के कनेक्शन नंबर या असली मालिक के बारे में पता नहीं था। उन्होंने बताया कि उन्हें चक्की पर काम करने वाले एक मजदूर ने कहा था कि यह चक्की इलम सिंह की है, लेकिन विभाग ने उस मजदूर को न तो गवाह बनाया और न ही उसका नाम बताया गया।
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चश्मदीद गवाह निरीक्षक विमलेश कुमार ने अपनी गवाही में स्वीकार किया कि उन्होंने कभी इलम सिंह को देखा ही नहीं और न ही उन्हें पता है कि उन्हें सही नाम बताया गया था या नहीं। निगम ने दावा किया था कि उन्होंने चोरी में इस्तेमाल तार जब्त किया था, लेकिन उस तार को साक्ष्य के रूप में अदालत में पेश ही नहीं किया गया।
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