{"_id":"65b9548fc110770f0104f5a6","slug":"contract-not-signed-bus-service-stopped-for-chakarnagar-lakhna-etawha-news-c-216-1-etw1002-108203-2024-01-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Etawah News: नहीं हुआ अनुबंध, चकरनगर-लखना के लिए बस सेवा बंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Etawah News: नहीं हुआ अनुबंध, चकरनगर-लखना के लिए बस सेवा बंद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इटावा। एक साल बीतने के बावजूद छोटे रूटों पर रोडवेज की अनुबंधित बसें नहीं दौड़ पाईं। यात्री डग्गामार वाहनों के सहारे हैं। चकरनगर, निवाड़ीकला, अछल्दा, लखना और भरेह के लिए चलाई गईं बसें भी बंद हो गईं। ऐसे में रोजमर्रा वाले यात्रियों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है।
गांव-गांव तक लोगों को रोडवेज बसों से सुगम यात्रा कराने के लिए शासन ने परिवहन निगम को छोटे रूटों पर अनुबंधित बसें चलाने के आदेश दिए थे। चकरनगर, निवाड़ीकला, अछल्दा जाने के लिए करीब पांच महीने पहले तक रोडवेज की एक-एक बस चल रही थी, लेकिन अनुबंधित बसों को लगाने की तैयारी के बीच इन बसों को बंद कर दिया गया। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि अछल्दा बस सेवा शुरू कर दी गई है, लेकिन क्षेत्रीय लोगों के अनुसार बस कभी-कभी ही पहुंचती है। ऐसे में इन दोनों रूटों पर भरेह, पचनद, चकरनगर से इटावा मुख्यालय तक आने वाले लोगों को ऑटो-टेंपो का सहारा लेना पड़ता है। प्रतिदिन इन दोनों रूटों से लगभग एक हजार लोगों का आवागमन होता है। इन बसों के बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी रोजमर्रा में चलने वाले कामकाजी लोगों को समस्या होती है।
अनुबंधित बसों को चलाने के लिए इटावा डिपो के अधिकारियों ने प्रयास शुरू तो किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। ट्रांसपोर्टरों, परिवहन निगम और परिवहन विभाग के अधिकारियों की कई दौर की बैठकों के बाद भी नियमों से बस मालिक संतुष्ट नहीं दिखे। यही वजह रही कि एक साल में सिर्फ फर्रुखाबाद रूट पर एक बस लग सकी। लखना, चकरनगर, निवाड़ीकला, ताखा, ऊसराहार रूट पर कोई बस न होने से यहां प्रतिदिन हजारों लोग डग्गामार वाहनों के सहारे हैं।
विज्ञापन
सूरज ढलते ही बढ़ जाता किराया
बीहड़ के इलाके चकरनगर में सूर्य देव के ढलते ही ऑटो, टेंपो चालकों की मनमानी शुरू हो जाती है। शाम को बकेवर या मुख्यालय तक आने के लिए भी ऑटो बुक करना पड़ता है। 30-40 किलोमीटर की दूरी के लिए ऑटो और टेंपो वाले 300 से 500 रुपये तक वसूलते हैं। ऐसे में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अब अनुबंधित बसों में मालिकों के ही परिचालक होंगे
कई दौर की वार्ता के बाद बस ट्रांसपोर्टरों ने परिवहन निगम के कई नियमों पर आपत्तियां जताई थीं। उन्होंने कुछ नियमों को बदलने के लिए आग्रह किया था, जिस पर रजामंदी बनी है। बताया जा रहा है कि अब कुछ नियमों में बदलाव कर दिया गया है। इसके तहत ही अब अनुबंधित बसों में बस चालक ही परिचालक को तैनात करेंगे। रोडवेज निगम के परिचालक अब नई अनुबंधित बसों में नजर नहीं आएंगे।
कुछ चीजों पर ट्रांसपोर्टरों से बात न बन पाने की वजह से अनुबंधित बसों की संख्या कम थी। अब उनकी समस्या का समाधान हो गया है। जल्द ही सभी छोटे रूटों पर रोडवेज की अनुबंधित बसें दौड़ती नजर आएंगी। चकरनगर रोड पर भी फिर बस चलाने की योजना है। क्षतिग्रस्त ढकरा पुलिया की वजह से बस को बंद करना पड़ा था।
- डीएम सक्सेना, एआरटीओ।
विज्ञापन
गांव-गांव तक लोगों को रोडवेज बसों से सुगम यात्रा कराने के लिए शासन ने परिवहन निगम को छोटे रूटों पर अनुबंधित बसें चलाने के आदेश दिए थे। चकरनगर, निवाड़ीकला, अछल्दा जाने के लिए करीब पांच महीने पहले तक रोडवेज की एक-एक बस चल रही थी, लेकिन अनुबंधित बसों को लगाने की तैयारी के बीच इन बसों को बंद कर दिया गया। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि अछल्दा बस सेवा शुरू कर दी गई है, लेकिन क्षेत्रीय लोगों के अनुसार बस कभी-कभी ही पहुंचती है। ऐसे में इन दोनों रूटों पर भरेह, पचनद, चकरनगर से इटावा मुख्यालय तक आने वाले लोगों को ऑटो-टेंपो का सहारा लेना पड़ता है। प्रतिदिन इन दोनों रूटों से लगभग एक हजार लोगों का आवागमन होता है। इन बसों के बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी रोजमर्रा में चलने वाले कामकाजी लोगों को समस्या होती है।
विज्ञापन
अनुबंधित बसों को चलाने के लिए इटावा डिपो के अधिकारियों ने प्रयास शुरू तो किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। ट्रांसपोर्टरों, परिवहन निगम और परिवहन विभाग के अधिकारियों की कई दौर की बैठकों के बाद भी नियमों से बस मालिक संतुष्ट नहीं दिखे। यही वजह रही कि एक साल में सिर्फ फर्रुखाबाद रूट पर एक बस लग सकी। लखना, चकरनगर, निवाड़ीकला, ताखा, ऊसराहार रूट पर कोई बस न होने से यहां प्रतिदिन हजारों लोग डग्गामार वाहनों के सहारे हैं।
विज्ञापन
सूरज ढलते ही बढ़ जाता किराया
बीहड़ के इलाके चकरनगर में सूर्य देव के ढलते ही ऑटो, टेंपो चालकों की मनमानी शुरू हो जाती है। शाम को बकेवर या मुख्यालय तक आने के लिए भी ऑटो बुक करना पड़ता है। 30-40 किलोमीटर की दूरी के लिए ऑटो और टेंपो वाले 300 से 500 रुपये तक वसूलते हैं। ऐसे में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अब अनुबंधित बसों में मालिकों के ही परिचालक होंगे
कई दौर की वार्ता के बाद बस ट्रांसपोर्टरों ने परिवहन निगम के कई नियमों पर आपत्तियां जताई थीं। उन्होंने कुछ नियमों को बदलने के लिए आग्रह किया था, जिस पर रजामंदी बनी है। बताया जा रहा है कि अब कुछ नियमों में बदलाव कर दिया गया है। इसके तहत ही अब अनुबंधित बसों में बस चालक ही परिचालक को तैनात करेंगे। रोडवेज निगम के परिचालक अब नई अनुबंधित बसों में नजर नहीं आएंगे।
कुछ चीजों पर ट्रांसपोर्टरों से बात न बन पाने की वजह से अनुबंधित बसों की संख्या कम थी। अब उनकी समस्या का समाधान हो गया है। जल्द ही सभी छोटे रूटों पर रोडवेज की अनुबंधित बसें दौड़ती नजर आएंगी। चकरनगर रोड पर भी फिर बस चलाने की योजना है। क्षतिग्रस्त ढकरा पुलिया की वजह से बस को बंद करना पड़ा था।
- डीएम सक्सेना, एआरटीओ।