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सावधान, नहीं हो रही है शहर की निगहबानी
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बस स्टैंड तिराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरे
- फोटो : ETAWAH
इटावा। शहर की निगहबानी के लिए लगाए सीसीटीवी कैमरे कई साल से बंद है। लाखों रुपये खर्च करके शहर के प्रमुख चौराहों पर कैमरे लगाए गए थे। यह सभी कैमरे पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़े हुए थे। कंट्रोल रूम में बैठी टीम इन कैमरों के माध्यम से पूरे शहर पर नजर रखती थी। रखरखाव और अधिकारियों की उदासीनता के कारण यह व्यवस्था ध्वस्त हो गई। इसके बाद इस व्यवस्था को सुचारू करने पर ध्यान नहीं दिया गया।
शहर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2015 में शहर के प्रमुख चौराहों पर 16 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। शहर में वारदात होने पर पुलिस का ध्यान सबसे पहले सीसीटीवी कैमरे पर ही जाता है। सांसद निधि से लगवाए गए कैमरे का पुलिस प्रशासन ध्यान नहीं रख पाया। पिछले कई सालों से सभी सीसीटीवी कैमरे बंद है। प्रशासन का कोई भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देता है। चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरे अब सिर्फ शोपीस बन कर रह गए है। अपराध पर लगाम कसने और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए वर्ष 2015 में पुलिस लाइन में एक आधुनिक पुलिस कंट्रोल रूम बनाया गया था।
शहर के प्रमुख चौराहा नगला, पलिका चौराहा, नौरंगाबाद चौराहा, शास्त्री चौराहा, बलराम सिंह चौराहा के अलावा रोडवेज तिराहा के अलावा भरथना चौराहा पर भी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों का कंट्रोल रूम से सीधा संपर्क था। कंट्रोल रूम में बैठी टीम शहर की हर गतिविधि पर पूरी नजर रखती थी। इन चौराहों पर कहीं भी जाम लगता तो कंट्रोल रूम में बैठा व्यक्ति इसकी जानकारी पास में ही गश्त करने वाली टीम को देता था। इसके अलावा अपराध करके भागने वाले अपराधी की लोकेशन इन कैमरों के माध्यम से मिल जाती थी। यह व्यवस्था कुछ ही दिन चली। व्यापारियों ने सीसीटीवी सिस्टम को दुरुस्त कराने के लिए अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया।
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रखरखाव का खर्च पुलिस विभाग को देखना था। विभाग के पास बजट न होने के कारण सीसीटीवी कैमरों की मरम्मत नहीं हो पाई। इस कारण सभी सीसीटीवी कैमरें बंद हो गए। सीसीटीवी कैमरों का बजट पीएचक्यू प्रयागराज से पास होता है। कई सालों से पीएचक्यू ने सीसीटीवी कैमरों की मरम्मत के लिए बजट पास नहीं किया है। वर्ष 2018 में तत्कालीन एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी ने भी इन कैमरों को दुरुस्त करवाने की कवायद की। उन्होंने दावा किया था कि वे 15 दिन के अंदर शहर के प्रमुख चौराहों पर नई तकनीक के कैमरे लगवाएंगे। उन्होंने बजट मिलने का भी दावा किया था।
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शहर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2015 में शहर के प्रमुख चौराहों पर 16 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। शहर में वारदात होने पर पुलिस का ध्यान सबसे पहले सीसीटीवी कैमरे पर ही जाता है। सांसद निधि से लगवाए गए कैमरे का पुलिस प्रशासन ध्यान नहीं रख पाया। पिछले कई सालों से सभी सीसीटीवी कैमरे बंद है। प्रशासन का कोई भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देता है। चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरे अब सिर्फ शोपीस बन कर रह गए है। अपराध पर लगाम कसने और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए वर्ष 2015 में पुलिस लाइन में एक आधुनिक पुलिस कंट्रोल रूम बनाया गया था।
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शहर के प्रमुख चौराहा नगला, पलिका चौराहा, नौरंगाबाद चौराहा, शास्त्री चौराहा, बलराम सिंह चौराहा के अलावा रोडवेज तिराहा के अलावा भरथना चौराहा पर भी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों का कंट्रोल रूम से सीधा संपर्क था। कंट्रोल रूम में बैठी टीम शहर की हर गतिविधि पर पूरी नजर रखती थी। इन चौराहों पर कहीं भी जाम लगता तो कंट्रोल रूम में बैठा व्यक्ति इसकी जानकारी पास में ही गश्त करने वाली टीम को देता था। इसके अलावा अपराध करके भागने वाले अपराधी की लोकेशन इन कैमरों के माध्यम से मिल जाती थी। यह व्यवस्था कुछ ही दिन चली। व्यापारियों ने सीसीटीवी सिस्टम को दुरुस्त कराने के लिए अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया।
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रखरखाव का खर्च पुलिस विभाग को देखना था। विभाग के पास बजट न होने के कारण सीसीटीवी कैमरों की मरम्मत नहीं हो पाई। इस कारण सभी सीसीटीवी कैमरें बंद हो गए। सीसीटीवी कैमरों का बजट पीएचक्यू प्रयागराज से पास होता है। कई सालों से पीएचक्यू ने सीसीटीवी कैमरों की मरम्मत के लिए बजट पास नहीं किया है। वर्ष 2018 में तत्कालीन एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी ने भी इन कैमरों को दुरुस्त करवाने की कवायद की। उन्होंने दावा किया था कि वे 15 दिन के अंदर शहर के प्रमुख चौराहों पर नई तकनीक के कैमरे लगवाएंगे। उन्होंने बजट मिलने का भी दावा किया था।