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चार दिनों का कोहरा, फिर सुधरेगा मौसम
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इटावा। 16 फरवरी तक सुबह और रात में कोहरा पड़ने की संभावना है। इसके बाद मौसम में सुधार के आसार हैं। अधिकतम तापमान 23 से 26 डिग्री और न्यूनतम 11 से 13 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगा। हवा की दिशा ज्यादातर उत्तर पश्चिम से उत्तर पूर्व की ओर होगी। फसल को रोगों से बचाने के लिए किसानों को सलाह दी गई है।
शस्य वैज्ञानिक डॉ. विजय बहादुर जायसवाल ने किसानों को सलाह दी है कि सिंचाई, यूरिया की टॉपड्रेसिंग, खरपतवार नाशी, कीटनाशक और कवकनाशी का छिड़काव आवश्यकता के अनुसार करें। ताकि गर्मी के मौसम में उर्द, मूंग, करेला, लौकी, भिंडी, कद्दू, खीरा की बुवाई समय पर हो सके। यदि फसलों पर कोई रोग और कीट मिले तो आसमान साफ होने पर तत्काल कीट की रोकथाम करें।
चने और अरहर की फली छेदक कीट के जैविक नियंत्रण के लिए किसान फरवरी माह में प्रति हेक्टेयर 5 से 6 फेरोमोन ट्रैप लगाएं। यदि एक या एक से अधिक फली छेदक कीड़ों की तितलियां दिखाई दें तो फसल में 50 प्रतिशत फूल आने के बाद एनपीवी 250 एलई 01 मिली लीटर दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करें। 15 दिनों के बाद बीटी 750 मिली लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें या 50 प्रतिशत फूल आने के बाद 700 मिली लीटर नीम का तेल प्रति हेक्टेयर घोल बनाकर छिड़काव करें। रासायनिक नियंत्रण के लिए इंडोक्साकार्ब 14.5 एससी को 01 मिली प्रति लीटर पानी की दर से या एमेमेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से स्प्रे करें।
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शस्य वैज्ञानिक ने बताया सरसों की फसल में माहू कीट के प्रकोप की रोकथाम के लिए आसमान साफ होने पर नीम आयल तीन मिली लीटर प्रति लीटर पानी मे घोलकर छिड़काव करें या फिर इमिडाक्लोप्रिड 01 मिली/ 3 लीटर पानी के घोल का छिड़काव करें। आलू की खोदाई से 10 से 15 दिन पहले लाक कटिंग करने के लिए पौधों को जमीन स्तर के बराबर से हंसिया से काट दिया जाता है। मशीन (हाल्म कटर) की सहायता से भी लाक को काटा जा सकता है।
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शस्य वैज्ञानिक डॉ. विजय बहादुर जायसवाल ने किसानों को सलाह दी है कि सिंचाई, यूरिया की टॉपड्रेसिंग, खरपतवार नाशी, कीटनाशक और कवकनाशी का छिड़काव आवश्यकता के अनुसार करें। ताकि गर्मी के मौसम में उर्द, मूंग, करेला, लौकी, भिंडी, कद्दू, खीरा की बुवाई समय पर हो सके। यदि फसलों पर कोई रोग और कीट मिले तो आसमान साफ होने पर तत्काल कीट की रोकथाम करें।
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चने और अरहर की फली छेदक कीट के जैविक नियंत्रण के लिए किसान फरवरी माह में प्रति हेक्टेयर 5 से 6 फेरोमोन ट्रैप लगाएं। यदि एक या एक से अधिक फली छेदक कीड़ों की तितलियां दिखाई दें तो फसल में 50 प्रतिशत फूल आने के बाद एनपीवी 250 एलई 01 मिली लीटर दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करें। 15 दिनों के बाद बीटी 750 मिली लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें या 50 प्रतिशत फूल आने के बाद 700 मिली लीटर नीम का तेल प्रति हेक्टेयर घोल बनाकर छिड़काव करें। रासायनिक नियंत्रण के लिए इंडोक्साकार्ब 14.5 एससी को 01 मिली प्रति लीटर पानी की दर से या एमेमेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से स्प्रे करें।
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शस्य वैज्ञानिक ने बताया सरसों की फसल में माहू कीट के प्रकोप की रोकथाम के लिए आसमान साफ होने पर नीम आयल तीन मिली लीटर प्रति लीटर पानी मे घोलकर छिड़काव करें या फिर इमिडाक्लोप्रिड 01 मिली/ 3 लीटर पानी के घोल का छिड़काव करें। आलू की खोदाई से 10 से 15 दिन पहले लाक कटिंग करने के लिए पौधों को जमीन स्तर के बराबर से हंसिया से काट दिया जाता है। मशीन (हाल्म कटर) की सहायता से भी लाक को काटा जा सकता है।