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मोदी ने किसानों को दिया दिवाली

Fri, 19 Nov 2021 11:51 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 19 Nov 2021 11:51 PM IST
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chhaatra ko tejaab daalakar maarane kee dhamakee
इटावा। पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार की सुबह तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर किसानों को दिवाली का गिफ्ट दे दिया है। आंदोलन से जुड़े किसानों ने इसे सत्य की जीत कहा, वहीं विपक्षी दलों ने किसानों की जीत बताया है।
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बोले, किसानों की एकता के आगे सरकार घुटने टेकने को मजबूर हुई। भाजपा का कहना है कि सरकार किसानों के हित में काम करने में लगी हुई है। किसान संगठनों के नेताओं ने भी कानून वापसी का स्वागत किया है।
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सरकार को यह फैसला पहले ही ले लेना ही चाहिए था। एक साल तक किसानों को आंदोलन चलाना पड़ा, तब सरकार झुकी और यह निर्णय लिया।
सरकार ने घुटने टेकें
आखिरकार किसानों के आंदोलन के सामने सरकार को घुटने टेकने पड़े। तीनों कानून किसान विरोधी थी और पूंजीपतियों के हित में बनाए गए थे। इसके लिए किसान एक साल से आंदोलन कर रहे थे। कांग्रेस हमेशा किसानों के साथ रही है।
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-मलखान सिंह यादव, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
कानून वापसी, किसानों की जीत
सपा हमेशा किसानों के साथ रही है। पूर्व सीएम अखिलेश यादव की सभाओं में जो भीड़ उमड़ रही, उससे घबराकर सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस लिए है। आंदोलन में जिन किसानों की मृत्यु हुई, उनके बारे में भी सरकार को सोचना होगा।
- गोेपाल यादव, जिलाध्यक्ष सपा
किसान आंदोलन की हुई जीत
किसानों के लंबे चले आंदोलन के बाद सरकार को तीनों काले कृषि कानून वापस लेने पड़े है। यह किसान आंदोलन की बड़ी जीत है और जनतंत्र की भी जीत है। किसान सभा पहले दिन से ही कह रही थी कि यह कानून किसानों के खिलाफ हैं। 22 नवंबर को लखनऊ में किसान पंचायत होगी।
- मुकुट सिंह, प्रांतीय महामंत्री अखिल भारतीय किसान सभा
बहुत देर से उठाया कदम : बसपा
प्रधानमंत्री यदि पहले तीनों कृषि कानून वापस लेते तो शायद देश में झगड़े, झंझट और संकट आदि से बच जाते। आंदोलनों के दौरान मरे किसानों के परिवार को उचित आर्थिक सहायता देने व परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

- शीलू दोहरे, जिलाध्यक्ष बसपा
काला कृषि कानून वापस ही लेना पड़ा
केंद्र की अहंकारी सरकार को काला कृषि कानून वापस लेना ही पड़ा। आखिर अहंकारी सरकार को किसानों के सामने घुटने टेकने पड़े। आंदोलन के दौरान जो किसान दुनियां से चले गए, उनको शहीद का दर्जा दिया जाए।
-शिवपाल सिंह यादव, अध्यक्ष प्रसपा
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