कैनाइन डिस्टेंपर एशियाटिक शेरों के लिए बड़ा खतरा
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इटावा सफारी पार्क में एक के बाद एक पांच बब्बर शेरों के कैनाइन डिस्टेंपर संक्रमण क ी चपेट में आने से पशु विशेषज्ञों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। इसका विश्व में कहीं कोई इलाज नहीं है। संक्रमण से इटावा सफारी पार्क में तीन शेर और एक शावक की मौत हो चुकी है। शेरनी ग्रीष्मा भी जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। विशेषज्ञ इसे बब्बर शेरों की नस्ल के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं। अब इस गंभीर संक्रमण पर विश्व स्तर पर विचार विमर्श चल रहा है। इटावा सफारी पार्क के शेरों पर एकमात्र विकल्प लाइव वैक्सीन का प्रयोग किया जा चुका है। विशेषज्ञों को इसके परिणाम का इंतजार है।
देश में बब्बर शेरों में पहला कैनाइन डिस्टेंपर संक्रमण का मामला इटावा सफारी पार्क में 30 सितंबर 2014 को सामने आया। शेरनी लक्ष्मी क ी मौत के बाद उसके शव के पोस्टमार्टम में आईवीआरबी (इंडियन वेटनरी इंस्टीट्यूट बरेली) ने कैनाइन डिस्टेंपर संक्रमण होने का खुलासा किया। इसके 17 दिन बाद सफारी में एक और शेर विष्णु की भी मौत हो गई। उसके ब्लड सैंपल में भी कैनाइन डिस्टेंपर का वायरस पाया गया। जुलाई 2015 में सफारी में जन्में सभी पांच शावकों की भी मौत हो गई, जिसमें एक शावक में कैनाइन डिस्टेंपर संक्रमण मिला था। शेर कुबेर भी इसकी चपेट में आ गया और उसकी भी कुछ दिनों में मौत हो गई।
अब शेरनी ग्रीष्मा इसकी चपेट में है। डेढ़ वर्ष में कड़ी देखरेख के बावजूद पांच शेरों में कैनाइन डिस्टेंपर संक्रमण होने से विश्व भर के पशु चिकि त्सा विशेषज्ञ परेशान हैं। ब्रिटेन, अमेरिका, अफ्रीका और भारतीय पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने इटावा सफारी पार्क में इस पर चर्चा की। उन्होंने एशियाटिक बब्बर शेरों के लिए कैनाइन डिस्टेंपर को बड़ा खतरा बताया है। विश्व भर के विशेषज्ञों की राय पर दो दिन पूर्व सफारी के तीन शेर गीगो, हीर और पटौदी को लाइव कैनाइन डिस्टेंपर वैक्सीन दी गई है। सफारी के इन शेरों के खून में भी कैनाइन डिस्टेंपर के वायरस हाने की बात सामने आई है लेकिन अभी तक आईवीआरआई के किसी विशेषज्ञ ने इसकी पुष्टि नहीं की है। विशेषज्ञों को वैक्सीनेशन के परिणाम का इंतजार है।