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लड़का-लड़की के भेद को मिटाना होगा
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इटावा। बेसिक शिक्षा कार्यालय के सभागार में संदर्भदाताओं की एक दिवसीय कार्यशाला में जेंडर इक्विटी को लेकर चर्चा हुई। बीएसए उमानाथ ने कहा कि हमें बालक बालिकाओं के बीच शिक्षा के दौरान भेदभाव मिटाना होगा।
वित्त एवं लेखाधिकारी राजकुमार यादव ने कहा कि ग्रामीण परिवेश की बालिकाओं को विद्यालय आने के लिए प्रेरित करें। बालिकाओं का विद्यालयों में ठहराव हो जिससे वे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
खंड शिक्षा अधिकारी बढ़पुरा विनोद पांडे ने कहा कि जेंडर इक्विटी के लिए बदलाव को हम अपने परिवार से ही शुरू करें तभी समाज में बदलाव संभव है। कहा कि लड़कियों के साथ साथ लड़कों को भी संस्कारवान बनाएं।
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इस कार्यशाला में 9 ब्लॉक के 18 संदर्भदाताओं ने प्रतिभाग किया। कई गतिविधियों और क्रियाकलापों के माध्यम से अर्थ, उद्देश्य, इक्विटी और इक्वलिटी में अंतर आदि विषयों पर बारीकी से विचार विमर्श किया गया।
संदर्भदाता रेनू सिंह ने प्रतिभागियों को बताया कि परिवार विद्यालय प्रांगण और कक्षा शिक्षण के दौरान हमें बालक-बालिकाओं के भेद को खत्म कर जेंडर इक्विटी का पालन करना है, जिससे बालिकाएं भी अपने आप को मजबूत और सशक्त समझें।
कहा कि बालक भी अपने आप को उपेक्षित न समझें। राज्य स्तरीय संदर्भदाता अर्चना पांडे ने बताया कि जेंडर इक्विटी का पालन धरातल से शुरू करते हुए उसे समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाएं।
कहा कि हम समाज में व्याप्त बालक-बालिका के भेद को मिटा पाएंगे। उधर, 18 प्रतिभागियों को समूह में विभाजित कर के बालिका शिक्षा के रास्ते में आने वाले समस्या और समाधान पर चर्चा की गई।
लर्निंग सर्किल पर रोल प्ले किया गया। एसआरजी संजीव चतुर्वेदी ने कहा बालिकाओं को बालकों के समान ही हर कार्य और क्षेत्र में समान अवसर प्रदान दिए जाने चाहिए। अंत में बालिका शिक्षा समन्वयक विनय तिवारी ने प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
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वित्त एवं लेखाधिकारी राजकुमार यादव ने कहा कि ग्रामीण परिवेश की बालिकाओं को विद्यालय आने के लिए प्रेरित करें। बालिकाओं का विद्यालयों में ठहराव हो जिससे वे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
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खंड शिक्षा अधिकारी बढ़पुरा विनोद पांडे ने कहा कि जेंडर इक्विटी के लिए बदलाव को हम अपने परिवार से ही शुरू करें तभी समाज में बदलाव संभव है। कहा कि लड़कियों के साथ साथ लड़कों को भी संस्कारवान बनाएं।
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इस कार्यशाला में 9 ब्लॉक के 18 संदर्भदाताओं ने प्रतिभाग किया। कई गतिविधियों और क्रियाकलापों के माध्यम से अर्थ, उद्देश्य, इक्विटी और इक्वलिटी में अंतर आदि विषयों पर बारीकी से विचार विमर्श किया गया।
संदर्भदाता रेनू सिंह ने प्रतिभागियों को बताया कि परिवार विद्यालय प्रांगण और कक्षा शिक्षण के दौरान हमें बालक-बालिकाओं के भेद को खत्म कर जेंडर इक्विटी का पालन करना है, जिससे बालिकाएं भी अपने आप को मजबूत और सशक्त समझें।
कहा कि बालक भी अपने आप को उपेक्षित न समझें। राज्य स्तरीय संदर्भदाता अर्चना पांडे ने बताया कि जेंडर इक्विटी का पालन धरातल से शुरू करते हुए उसे समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाएं।
कहा कि हम समाज में व्याप्त बालक-बालिका के भेद को मिटा पाएंगे। उधर, 18 प्रतिभागियों को समूह में विभाजित कर के बालिका शिक्षा के रास्ते में आने वाले समस्या और समाधान पर चर्चा की गई।
लर्निंग सर्किल पर रोल प्ले किया गया। एसआरजी संजीव चतुर्वेदी ने कहा बालिकाओं को बालकों के समान ही हर कार्य और क्षेत्र में समान अवसर प्रदान दिए जाने चाहिए। अंत में बालिका शिक्षा समन्वयक विनय तिवारी ने प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।