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कुनबा बढ़ाने को कश्मीर से आए इंडियन स्किमर
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इंडियन स्किनर
- फोटो : ETAWAH
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चकरनगर। चंबल सेंक्चुअरी में सर्दी बढ़ते ही इंडियन स्किमर पक्षी पहुंचने लगे हैं। ये यहां पर प्रजनन कर अंडे देंगे। ये पक्षी मुख्यत: कश्मीर की घाटियों से आते हैं और अप्रैल माह में वापस लौट जाते हैं।
सेंक्चुअरी के क्षेत्राधिकारी हर किशोर शुक्ला ने बताया कि नदी के पानी में इन दिनों बहाव कम होता है। मौसम भी ठंडा रहता है। नदी के बीच रेत के टापू पर ये पक्षी सुरक्षित स्थान खोजते हैं। यहां पर घोंसला बनाकर अंडे देते हैं। अप्रैल माह में घोंसले में अंडों को सेंने के लिए रखकर चले जाते हैं। अंडों से बच्चे जून माह में निकलते हैं। उनके निकलने तक सेंक्चुअरी कर्मचारी इनकी रखवाली करते हैं। अगले साल सर्दी में जब ये पक्षी दोबारा लौटते हैं तो अंडों से निकले बच्चे इनके समूह में शामिल होकर वापस जाते हैं। बताया कि पिछले साल दो दर्जन से अधिक बच्चों का जन्म हुआ था।
वन दरोगा विष्णु पाल चौहान ने बताया कि स्किमर पक्षी बड़ी तादात में सहसों से भरेह संगम तक दिखाई दे रहे हैं। नदी की सतह पर छोटी मछलियों का शिकार करने वाले पक्षी इस समय घोंसले तैयार कर रहे हैं।
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चंबल में मगरमच्छ, घड़ियाल, डॉल्फिन, कछुए बहुतायत में हैं। इसके अलावा कई दुर्लभ प्रजाति के पक्षी भी देश-विदेश से पहुंच रहे हैं। इनकी सुरक्षा के लिए सेंक्चुअरी में चौकसी बढ़ा दी गई है। यहां सुंदरता निहारने के लिए किसी प्रकार का कोई प्रतिबंध नहीं है लेकिन कोई व्यक्ति पक्षी या अन्य जीवों को नुकसान न पहुंचाए, इसके लिए यहां पर अमला दूरबीन से नजर रखता है। वार्डन दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि यहां वाच टॉवरों और पेट्रोलिंग के माध्यम से निगरानी की जा रही है। अमले को संसाधनों से लैस कर दिया गया है। किसी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
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सेंक्चुअरी के क्षेत्राधिकारी हर किशोर शुक्ला ने बताया कि नदी के पानी में इन दिनों बहाव कम होता है। मौसम भी ठंडा रहता है। नदी के बीच रेत के टापू पर ये पक्षी सुरक्षित स्थान खोजते हैं। यहां पर घोंसला बनाकर अंडे देते हैं। अप्रैल माह में घोंसले में अंडों को सेंने के लिए रखकर चले जाते हैं। अंडों से बच्चे जून माह में निकलते हैं। उनके निकलने तक सेंक्चुअरी कर्मचारी इनकी रखवाली करते हैं। अगले साल सर्दी में जब ये पक्षी दोबारा लौटते हैं तो अंडों से निकले बच्चे इनके समूह में शामिल होकर वापस जाते हैं। बताया कि पिछले साल दो दर्जन से अधिक बच्चों का जन्म हुआ था।
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वन दरोगा विष्णु पाल चौहान ने बताया कि स्किमर पक्षी बड़ी तादात में सहसों से भरेह संगम तक दिखाई दे रहे हैं। नदी की सतह पर छोटी मछलियों का शिकार करने वाले पक्षी इस समय घोंसले तैयार कर रहे हैं।
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चंबल में मगरमच्छ, घड़ियाल, डॉल्फिन, कछुए बहुतायत में हैं। इसके अलावा कई दुर्लभ प्रजाति के पक्षी भी देश-विदेश से पहुंच रहे हैं। इनकी सुरक्षा के लिए सेंक्चुअरी में चौकसी बढ़ा दी गई है। यहां सुंदरता निहारने के लिए किसी प्रकार का कोई प्रतिबंध नहीं है लेकिन कोई व्यक्ति पक्षी या अन्य जीवों को नुकसान न पहुंचाए, इसके लिए यहां पर अमला दूरबीन से नजर रखता है। वार्डन दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि यहां वाच टॉवरों और पेट्रोलिंग के माध्यम से निगरानी की जा रही है। अमले को संसाधनों से लैस कर दिया गया है। किसी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।