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भिंड-ग्वालियर जाना हुआ महंगा, बिल्डिंग मैटेरियल के चढ़ सकते हैं दाम

Thu, 04 Mar 2021 10:37 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 04 Mar 2021 10:37 PM IST
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Bhind-Gwalior becomes expensive, building materials may cost
चंबल पुल पर रोक के बाद चकरनगर, सहसो मार्ग से गुजरते भारी वाहन - फोटो : ETAWHA
इटावा। चंबल पुल पर भारी वाहनों के प्रवेश बंद होने से बसों का संचालन भी बंद हो गया है। इसकी वजह से इटावा से भिंड और ग्वालियर जाने वाले लोगों को ज्यादा किराया चुकाना पड़ रहा है। वहीं 40 से 50 किलोमीटर की अतिरिक्त दौड़ के कारण मध्य प्रदेश से आने वाली मौरंग और गिट्टी के दामों में उछाल आना तय है। इधर, खनन माफिया ने भी तय हुए रूटों पर पड़ने वाले थानों में दौड़ लगानी शुरू कर दी है।
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50 साल पुराने चंबल पुल के छह नंबर पिलर की बेयरिंग क्षतिग्रस्त होने से डीएम ने एक दिन पहले इसपर से भारी वाहनों का प्रवेश बंद कर दिया था। टेक्निकल कमेटी ने करीब पांच महीने पहले पुल की खराब स्थिति पर रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी थी। इस बीच पुल पर हादसा होने की आशंकाएं बढ़ीं तो प्रशासन को कदम उठाना पड़ा।
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40 से 70 किलोमीटर तक बढ़ेगी दूरी
पुल पर प्रतिबंध लगने के बाद पुलिस ने भारी वाहनों का रूट डायवर्ट कर दिया है। भिंड की तरफ से आने वाले वाहनों को फूफ से सोने का पुरा, हनुमंतपुरा, चकरनगर, सहसों, उदी होकर या चकनगर से लवेदी, बकेवर, इकदिल के रास्ते इटावा पहुंचना पड़ेगा। यह डायवर्जन रूट इस्तेमाल करने पर भिंड से इटावा की दूरी करीब 80 किलोमीटर पड़ेगी। चंबल पुल पार करके यह दूरी 35 किमी पड़ती थी।
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इसके अलावा वाहन चकरनगर से जालौन होकर जा सकते हैं। लेकिन इस रास्ते भिंड तक पहुंचने के लिए करीब 110 किमी का चक्कर लगाना पड़ेगा। लोगों का कहना है कि बस से भिंड का किराया 50 रुपये था। अब ऑटो पकड़कर ऊदी चौराहा और वहां से दूसरी ऑटो लेकर भिंड जाना पड़ रहा है। इससे भिंड तक पहुंचने के लिए 90 रुपये किराया देना पड़ रहा है।
छह थानों मे तालमेल बैठाने में जुटे खनन माफिया
चंबल पुल खनन माफिया के लिए आसान रास्ता था। एमपी से अवैध खनन के वाहन इस रास्ते इटावा मंडी तक पहुंचते थे। बढ़पुरा थाने से तालमेल बैठाकर रॉयल्टी चुराने के साथ ओवरलोडिंग भी हो रही थी। लेकिन पुल पर रोक लगने के बाद इन वाहनों को चकरनगर, सहसों, बिठौली, लवेदी, बकेवर और इकदिल थाने से होकर गुजरना पड़ेगा। खनन माफिया अब गाड़ियां पास करवाने के लिए इन थानों की परिक्रमा कर रहे हैं।
किराया बढ़ने से बालू, गिट्टी के रेट बढ़ने की उम्मीद
ट्रांसपोर्टर शिल्पू भदौरिया का कहना है कि वैकल्पिक रूट की हालत बेहद खराब है। डीजल का दाम पहले से काफी बढ़ा हुआ है। ऐसे में दूरी बढ़ने से किराया बढ़ाना या गाड़ियों का खड़ा करना पड़ेगा। गिट्टी मौरंग की पूरी सप्लाई भिंड से करीब 40 किलोमीटर आगे अजनार से होती है।

पुल की मरम्मत होने तक या तो किराया बढ़ाया जाएगा या ट्रांसपोर्टेशन रोका जाएगा। बिल्डिंग मैटेरियल सप्लायर विक्रम अग्रवाल का कहना है कि अगर किराया बढ़ा तो सामग्री का रेट बढ़ाना मजबूरी होगी। मौरंग का रेट अभी 38 से 40 रुपये वर्ग फुट चल रहा है।
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