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Etawah News: एआई के उपयोग में सावधानी बरतें, परीक्षार्थी सोच-समझकर करें इस्तेमाल
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- विशेषज्ञों की राय, पढ़ाई को आसान तो कर सकता लेकिन गुरु नहीं बन सकता एआई
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आजकल छात्र-छात्राओं के बीच पढ़ाई का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों से लेकर विश्वविद्यालय और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी बड़ी संख्या में एआई से सवालों के जवाब तलाश रहे हैं। इस बढ़ते क्रेज के बीच विशेषज्ञों ने छात्रों को सलाह दी है कि वे एआई का उपयोग सोच-समझकर करें और किसी भी जानकारी को पूरी तरह से भरोसेमंद मानने से पहले उसे क्रॉस-चेक अवश्य करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई कठिन विषयों को सरल भाषा में समझाने, त्वरित जानकारी देने और रिवीजन में मददगार साबित हो सकता है। यह छात्रों के लिए एक सहायक उपकरण के रूप में कार्य कर सकता है, लेकिन इसे अपना गुरु मान लेना उचित नहीं है। एआई द्वारा दी गई जानकारी कभी-कभी गलत, अधूरी या पाठ्यक्रम से बाहर की भी हो सकती है। यदि छात्र बिना किसी सत्यापन के इन उत्तरों को स्वीकार कर लेते हैं, तो परीक्षा में गलतियाँ होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए, एआई से प्राप्त जानकारी की पुष्टि अपने शिक्षकों से अवश्य करनी चाहिए।
विशेषज्ञों की सलाह: प्रामाणिक स्रोतों को प्राथमिकता दें
शहर के जीआईसी के प्रधानाचार्य डॉ. दीपक सक्सेना के अनुसार, एआई को समझने के लिए एक सहायक के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन, गणित जैसे विषयों में सूत्रों को हल करने के लिए पूरी तरह से एआई पर निर्भर रहना भविष्य में समस्याएं खड़ी कर सकता है। इंजीनियरिंग कॉलेज के पूर्व अधिष्ठाता डॉ. एनके शर्मा ने छात्रों को शिक्षकों द्वारा तैयार किए गए नोट्स और अन्य प्रामाणिक शैक्षणिक स्रोतों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। विश्वविद्यालय स्तर के छात्रों को विशेष रूप से शोध, असाइनमेंट और प्रोजेक्ट्स में एआई से प्राप्त जानकारी की प्रामाणिकता की जांच करने का निर्देश दिया गया है।
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- विशेषज्ञों की राय, पढ़ाई को आसान तो कर सकता लेकिन गुरु नहीं बन सकता एआई
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आजकल छात्र-छात्राओं के बीच पढ़ाई का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों से लेकर विश्वविद्यालय और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी बड़ी संख्या में एआई से सवालों के जवाब तलाश रहे हैं। इस बढ़ते क्रेज के बीच विशेषज्ञों ने छात्रों को सलाह दी है कि वे एआई का उपयोग सोच-समझकर करें और किसी भी जानकारी को पूरी तरह से भरोसेमंद मानने से पहले उसे क्रॉस-चेक अवश्य करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई कठिन विषयों को सरल भाषा में समझाने, त्वरित जानकारी देने और रिवीजन में मददगार साबित हो सकता है। यह छात्रों के लिए एक सहायक उपकरण के रूप में कार्य कर सकता है, लेकिन इसे अपना गुरु मान लेना उचित नहीं है। एआई द्वारा दी गई जानकारी कभी-कभी गलत, अधूरी या पाठ्यक्रम से बाहर की भी हो सकती है। यदि छात्र बिना किसी सत्यापन के इन उत्तरों को स्वीकार कर लेते हैं, तो परीक्षा में गलतियाँ होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए, एआई से प्राप्त जानकारी की पुष्टि अपने शिक्षकों से अवश्य करनी चाहिए।
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विशेषज्ञों की सलाह: प्रामाणिक स्रोतों को प्राथमिकता दें
शहर के जीआईसी के प्रधानाचार्य डॉ. दीपक सक्सेना के अनुसार, एआई को समझने के लिए एक सहायक के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन, गणित जैसे विषयों में सूत्रों को हल करने के लिए पूरी तरह से एआई पर निर्भर रहना भविष्य में समस्याएं खड़ी कर सकता है। इंजीनियरिंग कॉलेज के पूर्व अधिष्ठाता डॉ. एनके शर्मा ने छात्रों को शिक्षकों द्वारा तैयार किए गए नोट्स और अन्य प्रामाणिक शैक्षणिक स्रोतों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। विश्वविद्यालय स्तर के छात्रों को विशेष रूप से शोध, असाइनमेंट और प्रोजेक्ट्स में एआई से प्राप्त जानकारी की प्रामाणिकता की जांच करने का निर्देश दिया गया है।
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