फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   Basmati gets GI tag, yet farmers remain far from profit

Etawah News: बासमती को जीआई टैग, फिर भी किसान मुनाफे से दूर

Tue, 27 Oct 2026 11:43 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा Updated Tue, 27 Oct 2026 11:43 PM IST
विज्ञापन
Basmati gets GI tag, yet farmers remain far from profit
फोटो 14:: शहर की नवीन मंडी में लगे बासमती धान के ढेर। संवाद
इटावा। खेतों में बासमती की महक जिले की पहचान है, लेकिन इसकी मिलिंग और चावल के कारोबार का बड़ा हिस्सा दूसरे प्रदेशों में पहुंच रहा है। किसान 35 से 40 रुपये किलो की दर से बासमती धान बेच रहे हैं, जबकि बाजार में इससे तैयार चावल की कीमत 120 से 160 रुपये किलो तक है। जिले में आधुनिक प्रोसेसिंग मशीनों की कमी और धान मिलों के बंद होने से किसानों को उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। खास बात यह है कि जिले में बासमती चावल की पांच किस्मों को भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) के लिए चयनित किया गया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और निर्यात की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से इसका पूरा लाभ किसानों और जिले के कारोबारियों को नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन

जिले की तीनों प्रमुख मंडियों में इन दिनों बासमती धान की अच्छी आवक हो रही है। इटावा, जसवंतनगर और भरथना मंडियों में प्रतिदिन कुल 90 हजार से एक लाख क्विंटल धान पहुंच रहा है। इसमें इटावा मंडी में 35 हजार क्विंटल, जसवंतनगर में 30 हजार क्विंटल और भरथना मंडी में 35 हजार क्विंटल धान की आवक दर्ज की जा रही है। कारोबारियों के मुताबिक, गुणवत्ता और किस्म के आधार पर धान की खरीद 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक हो रही है।
विज्ञापन

वहीं, बाजार में बासमती चावल की कीमत किस्म, गुणवत्ता और ब्रांड के अनुसार 120 से 160 रुपये किलो तक है। मंडी कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार, पंजाब और हरियाणा समेत अन्य प्रदेशों के व्यापारी जिले की मंडियों से बासमती धान खरीदकर अपने यहां ले जा रहे हैं। वहां आधुनिक मशीनों से धान की मिलिंग, ग्रेडिंग और पैकेजिंग कर चावल तैयार किया जाता है। इससे प्रसंस्करण और चावल के कारोबार से होने वाले मूल्य संवर्धन का बड़ा हिस्सा दूसरे प्रदेशों में चला जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

------
16 वर्ष में बंद हुईं 61 धान मिल
वर्ष 2008-09 में जिले में करीब 74 धान मिलें हुआ करती थीं। इनमें से वर्तमान में 61 मिलें बंद हैं। स्थानीय स्तर पर मिलिंग की पर्याप्त व्यवस्था न होने से धान की सफाई, प्रसंस्करण, ग्रेडिंग और पैकेजिंग से जुड़े कारोबार का बड़ा हिस्सा दूसरे प्रदेशों में संचालित हो रहा है।
-----
एक क्विंटल धान में निकलता है 60 से 70 किलो चावल
जिले में किसान बासमती धान की 1509, 1692, 1847, 1718 और 1121 समेत कई प्रजातियों की खेती कर रहे हैं। इनमें 1509 और सुगंधा किस्म को निर्यात के लिहाज से अधिक पसंद किया जाता है। धान से चावल की रिकवरी किस्म, नमी और मिलिंग प्रक्रिया पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर एक क्विंटल धान से करीब 60 से 70 किलो चावल निकलता है। हालांकि, अलग-अलग प्रजातियों में चावल की मात्रा और साबुत दानों की रिकवरी में अंतर होता है।
----------------------
चार साल में तेजी से बढ़ा बासमती का रकबा
वर्ष कुल लक्ष्य कुल रकबा बासमती का लक्ष्य बासमती का रकबा
2026 66,196 हेक्टेयर 66,196 हेक्टेयर 47,800 हेक्टेयर 48,200 हेक्टेयर
2025 66,744 हेक्टेयर 71,567 हेक्टेयर 44,000 हेक्टेयर 47,602 हेक्टेयर
2024 53,213 हेक्टेयर 58,160 हेक्टेयर 16,600 हेक्टेयर 41,500 हेक्टेयर
2023 50,477 हेक्टेयर 51,000 हेक्टेयर 4,500 हेक्टेयर 16,895 हेक्टेयर
------------------------
प्रोसेसिंग यूनिट लगे तो बढ़ेगी किसानों की आमदनी
जिले में बासमती धान की अच्छी पैदावार के बावजूद स्थानीय स्तर पर इसकी प्रोसेसिंग और निर्यात की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसका लाभ पंजाब और हरियाणा के व्यापारी उठा रहे हैं। भरथना के धान मिलर प्रदीप आवतानी के मुताबिक, दोनों प्रदेशों के व्यापारी जिले से धान खरीदकर ले जाते हैं, जहां आधुनिक मशीनों से चावल तैयार किया जाता है। उत्तर प्रदेश में निर्यात लाइसेंस और बड़ी मशीनें लगाने के लिए पर्याप्त अनुदान और ऋण सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने कहा कि जिले में आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो धान का मूल्य संवर्धन स्थानीय स्तर पर हो सकता है। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ जिले में रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
-------
सीधे खरीदार मिलें तो बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद
फोटो 15::पंकज दुबे।
किसान पंकज दुबे ने बताया कि बासमती की खेती में बीज, खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी पर लगातार खर्च बढ़ रहा है। इसके बावजूद मंडी में धान बेचते समय किसान को अपनी उपज का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। अगर जिले में ही चावल तैयार करने की आधुनिक व्यवस्था हो और किसानों को सीधे खरीदार मिलें तो बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है।

-----
फोटो 16:: अंकुर।

- किसान अंकुर ने बताया कि हमारे जिले में बासमती धान की अच्छी पैदावार होती है। इसके बाद भी धान खरीदकर दूसरे प्रदेशों में ले जाया जाता है और वहां उसकी प्रोसेसिंग होती है। अगर इटावा में ही आधुनिक मिलें और पैकेजिंग की इकाइयां लगे तो किसानों को स्थानीय स्तर पर बाजार मिलेगा। इससे रोजगार भी बढ़ेगा और किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूसरे कारोबारियों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा।
-----
जिले में बासमती धान की बिक्री सीधे व्यापारियों के साथ ही बिचौलियों के माध्यम से हो रही है। इससे किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। जिले में बासमती चावल की पांच किस्मों को जीआई टैग के लिए चयनित किया गया है। इस बार डीएम और सीडीओ की अगुवाई में मंडी एवं कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ बैठकें कर किसानों को सीधे व्यापारियों से जोड़ने की व्यवस्था विकसित करने पर मंथन किया गया है। उम्मीद है कि अगले वर्ष तक यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।
-सतीश कुमार, उपकृषि निदेशक

फोटो 14:: शहर की नवीन मंडी में लगे बासमती धान के ढेर। संवाद

फोटो 14:: शहर की नवीन मंडी में लगे बासमती धान के ढेर। संवाद

फोटो 14:: शहर की नवीन मंडी में लगे बासमती धान के ढेर। संवाद

फोटो 14:: शहर की नवीन मंडी में लगे बासमती धान के ढेर। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed