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‘बार और बेंच के सामंजस्य पर जोर’
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Thu, 30 Jul 2015 10:47 PM IST
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डिस्ट्रिक बार एसोसिएशन के सभागार में बुधवार की रात को मुजफ्फरनगर तबादला होने पर जिला जज रविंद्रनाथ कक्कड़ को विदाई के साथ नए जिला जज उमेश चंद्र श्रीवास्तव का भव्य स्वागत किया गया।
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इस मौके पर मुख्य अतिथि तत्कालीन जिला जज रविंद्रनाथ कक्कड़ ने कहा कि बार और बेंच में सामंजस्य होना बहुत जरूरी है। यहां पर दोनों ने बखूबी अपना काम अंजाम दिया है। इटावा बार की तारीफ करते हुए कहा कि यहां पर हर अधिवक्ता बहुत अच्छा है।
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उन्होंने कहा कि इस मंच पर दो जिला जज हैं। एक आउट गोइंग और एक इन कमिंग जिला जज है। न्यायिक प्रक्रिया के तहत एक दिन तो तबादले पर अधिकारियों को जाना पड़ता है। 20 फरवरी 14 को चार्ज लेने के बाद बार अध्यक्ष, महामंत्री व अधिवक्ताओं ने फूलों से लाद दिया था।
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उन्होंने कहा कि बार जो प्रमाणपत्र देती है वह एक पूंजी होती है। उसी के प्रमाण से ही यहां सफल रहा। उन्होंने कहा कि आगरा की कचहरी 17 दिन यहां पर चली लेकिन बार ने यह कह दिया कि इटावा का कोई वकील आगरा का केस नहीं देखेगा। बाद में जब आगरा के वकील आने लगे तो यहां के वकीलों ने भी आगरा के केस देखे।
बार के सहयोग के कारण ही आगरा की हड़ताल खत्म हुई थी। उन्होंने कहा कि वह हमेशा यहां की यादों को सजा कर रखेंगे। इस मौके पर जिला जज उमेश चंद्र श्रीवास्तव ने श्री कक्कड़ को बहुत अच्छा न्यायिक अधिकारी बताया। उन्होंने भी बार और बेंच में सहयोग पर जोर दिया।
डीबीए अध्यक्ष चंद्रशेखर प्रसाद गौर ने कहा कि बार एक आईना है। हर जज को इसमें अपनी तस्वीर देखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कक्कड़ साहब ने किसी के साथ भेदभाव नहीं किया।
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रशेखर प्रसाद सिंह गौर व महामंत्री राहुल कुमार शाक्य ने श्री कक्कड़ को राधा कृष्ण का प्रतीक चिह्न दिया। चंद्रमौलेश्वर त्रिपाठी, बृजेंद्र गुप्ता, बीबी सिंह, श्याम बाबू यादव, हंस सिंह, अशोक चौधरी, बृजेंद्र चतुर्वेदी ने शाल भेंट किया। वीरेंद्र यादव, रामशरण यादव ने जिला जज को प्रतीक चिह्न दिया।
इसके अलावा अवनीकांत यादव, अनिल वर्मा, राघवेंद्र शर्मा, जनाब हाजिक, शैलेंद्र, सुनील तिवारी, परवेज अख्तर ने अतिथियों का बैज लगाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में जमुनादास अग्रवाल, गिर्राज नारायण, महेंद्र शंकर माथुर, कृपा नंद वाजपेयी ने श्री कक्कड़ की तारीफ की। रमाकांत चतुर्वेदी, मेराज अली खान, डीडी मिश्रा, मुकुंद त्रिपाठी, जुबैर तैमूरी, हंस मुखी, विजय गुप्ता, प्रवीण कठेरिया आदि भी मौजूद रहे। संचालन अनिल कुमार गौर ने किया।