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एशियाई बब्बर शेरों का पहला प्रजनन केंद्र बनेगा इटावा लायन सफारी
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फोटो संख्या 20 व 21 सफारी गेट व शेर शेरनी
- फोटो : ETAWHA
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इटावा। लायन सफारी एशिया में एशियाई बब्बर शेरों का पहला प्रजनन केंद्र बनने से अब सिर्फ एक कदम दूर है। ब्रीडिंग सेंटर में नौ शावकों की उछलकूद हो रही है। अब सिर्फ एक शावक के और जन्म लेते ही सेंट्रल जू अथारिटी (सीजेडए) की स्वीकृति की मुहर लग जाएगी। सीजेडए से मान्यता मिलते ही इटावा लायन सफारी की पहचान देश और दुनिया में होने लगेगी।
सफारी परिसर में शेरों की उछलकूद और दहाड़ सुनने और नजदीक से देखने का रोमांचकारी सपना पूरा सकेगा। वैसे तो इटावा सफारी पार्क में लायन सफारी के अलावा डीयर सफारी, बीयर सफारी, लैपर्ड सफारी और एंटीलोप सफारी हैं। पांचों सफारी को मिलाकर इटावा सफारी पार्क को अभी सीजेडए ने चिड़ियाघर के रूप में मान्यता दे रखी है। यहां लायन सफारी को छोड़कर बाकी सफारी में दर्शकों की आवाजाही होती है। आने वाले समय में यह बाधा भी हटने वाली है। अब दर्शक यहां काले हिरन, भालू, तेंदुआ, चीतल के साथ-साथ शेरों की उछलकूद भी देख सकेंगे। सफारी की विशेषता यह होगी कि शेर तो खुले मैदान में घूमेंगे जबकि दर्शकों को बंद वाहन में घुमाया जाएगा।
इटावा में फिशर वन फॉरेस्ट की जगह में विलायती बबूल और कंटीली झाड़ियां ही दिखाई देती थीं। वर्ष 1990-91 में मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में इस भूभाग पर लायन सफारी बनाने की परिकल्पना की गई। वर्ष 2004 में जब फिर प्रदेश की बागडोर मुलायम सिंह यादव के हाथों में थी। उस समय लायन सफारी का प्रस्ताव केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया। इसके बाद लायन सफारी की योजना पर काम चला। वर्ष 2012 में प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार बनी तो उन्होंने इसे मुलायम के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में तैयार किया। लायन सफारी में पहली बार शेर और शेरनी लाए गए। एशियाटेक बब्बर शेरों के प्रजनन केंद्र बनाने की योजना को मूर्त रूप दिया गया। लायन सफारी के साथ साथ पांच सफारियां और तैयार हुईं।
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एक के बाद एक लगे कई झटकों से अब लायन सफारी उबर चुकी है। कुल 350 हेक्टेयर एरिया में 8589.75 लाख रुपये के प्रस्तावित प्रोजेक्ट पर जोर शोर से लायन सफारी का निर्माण कार्य हुआ। वर्ष 2014 में हैदराबाद और गुजरात से शेरों को सफारी के ब्रीडिंग सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया।
30 सितंबर 2014 को शेरनी लक्ष्मी की मौत हो गई। उसके 17 दिन बाद शेर विष्णु ने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री की विशेष नजर के बावजूद 10 महीने बाद लायन सफारी में शेर मनन व शेरनी हीर से जन्मे दो शावकों में से एक शावक की मौत जन्म के अगले ही दिन हो गई। दूसरे दिन दूसरे शावक ने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद ग्रीष्मा ने अगले ही दिन 21 जुलाई को तीन शावकों को जन्म दिया और उनमें से दो शावकों की मौत जन्म के कुछ घंटे बाद ही हो गई। एक अन्य शावक कुछ दिनों तक जीवित रहा और 14 अगस्त को बीमार हाने के बाद उसकी भी मौत हो गई।
28 दिसंबर 2015 को गुजरात के जूनागढ़ से शेर पटौदी और दो शेरनी तपस्या और जैसिका को लायन सफारी में लाया गया। 12 दिन बाद ही शेरनी तपस्या की भी मौत हो गई। जहां पूर्व में मरे शेर विष्णु और शेरनी लक्ष्मी की मौत कैनाइन डिस्टेंपर नामक बीमारी से हुई थी वहीं तपस्या की मौत का कारण बबेसिया बीमारी पाई गई।
कई झटके लगने के बाद तत्कालीनी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शेरों की देखरेख के लिए विदेशी विशेषज्ञों की मदद ली। लंदन के डॉक्टर जौनाथन क्रै कनेल सफारी आए। इसके बाद लंदन के प्रशिक्षक मार्क किंग्सटन जोन्स व क्रिस्टोफर जॉन हेल्स ने सफारी के कर्मचारी व कीपरों को विस्तार से शेरों के स्वास्थ्य तथा उनके शारीरिक व्यायाम के लिए नए-नए तरीके बताए।
प्रयोगों के तहत शेरों के बाड़े में दो स्टेप की एक मचान बनाई गई, जो लगभग आठ फीट ऊंची है। इस मचान के पास एक छोटी मचान है। प्रशिक्षकों के अनुसार यह मचाने शेरों के उछल कूद के लिए बेहद कारगर सिद्ध हुई।
सफारी पार्क के ब्रीडिंग सेंटर मेें अब तक जन्म लेने वाले शावकों में नौ जीवित और स्वस्थ हैं। इटावा सफारी पार्क में लायन सफारी को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने में शेरनी जेसिका भाग्यशाली साबित हुई है। जेसिका का कुनबा ही लायन सफारी में दिखाई दे रहा है। नौ में से आठ शावक जेसिका के हैं, जबकि बाकी एक शावक जेसिका की संतान शेरनी जेनिफर का है।
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सफारी परिसर में शेरों की उछलकूद और दहाड़ सुनने और नजदीक से देखने का रोमांचकारी सपना पूरा सकेगा। वैसे तो इटावा सफारी पार्क में लायन सफारी के अलावा डीयर सफारी, बीयर सफारी, लैपर्ड सफारी और एंटीलोप सफारी हैं। पांचों सफारी को मिलाकर इटावा सफारी पार्क को अभी सीजेडए ने चिड़ियाघर के रूप में मान्यता दे रखी है। यहां लायन सफारी को छोड़कर बाकी सफारी में दर्शकों की आवाजाही होती है। आने वाले समय में यह बाधा भी हटने वाली है। अब दर्शक यहां काले हिरन, भालू, तेंदुआ, चीतल के साथ-साथ शेरों की उछलकूद भी देख सकेंगे। सफारी की विशेषता यह होगी कि शेर तो खुले मैदान में घूमेंगे जबकि दर्शकों को बंद वाहन में घुमाया जाएगा।
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इटावा में फिशर वन फॉरेस्ट की जगह में विलायती बबूल और कंटीली झाड़ियां ही दिखाई देती थीं। वर्ष 1990-91 में मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में इस भूभाग पर लायन सफारी बनाने की परिकल्पना की गई। वर्ष 2004 में जब फिर प्रदेश की बागडोर मुलायम सिंह यादव के हाथों में थी। उस समय लायन सफारी का प्रस्ताव केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया। इसके बाद लायन सफारी की योजना पर काम चला। वर्ष 2012 में प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार बनी तो उन्होंने इसे मुलायम के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में तैयार किया। लायन सफारी में पहली बार शेर और शेरनी लाए गए। एशियाटेक बब्बर शेरों के प्रजनन केंद्र बनाने की योजना को मूर्त रूप दिया गया। लायन सफारी के साथ साथ पांच सफारियां और तैयार हुईं।
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एक के बाद एक लगे कई झटकों से अब लायन सफारी उबर चुकी है। कुल 350 हेक्टेयर एरिया में 8589.75 लाख रुपये के प्रस्तावित प्रोजेक्ट पर जोर शोर से लायन सफारी का निर्माण कार्य हुआ। वर्ष 2014 में हैदराबाद और गुजरात से शेरों को सफारी के ब्रीडिंग सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया।
30 सितंबर 2014 को शेरनी लक्ष्मी की मौत हो गई। उसके 17 दिन बाद शेर विष्णु ने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री की विशेष नजर के बावजूद 10 महीने बाद लायन सफारी में शेर मनन व शेरनी हीर से जन्मे दो शावकों में से एक शावक की मौत जन्म के अगले ही दिन हो गई। दूसरे दिन दूसरे शावक ने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद ग्रीष्मा ने अगले ही दिन 21 जुलाई को तीन शावकों को जन्म दिया और उनमें से दो शावकों की मौत जन्म के कुछ घंटे बाद ही हो गई। एक अन्य शावक कुछ दिनों तक जीवित रहा और 14 अगस्त को बीमार हाने के बाद उसकी भी मौत हो गई।
28 दिसंबर 2015 को गुजरात के जूनागढ़ से शेर पटौदी और दो शेरनी तपस्या और जैसिका को लायन सफारी में लाया गया। 12 दिन बाद ही शेरनी तपस्या की भी मौत हो गई। जहां पूर्व में मरे शेर विष्णु और शेरनी लक्ष्मी की मौत कैनाइन डिस्टेंपर नामक बीमारी से हुई थी वहीं तपस्या की मौत का कारण बबेसिया बीमारी पाई गई।
कई झटके लगने के बाद तत्कालीनी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शेरों की देखरेख के लिए विदेशी विशेषज्ञों की मदद ली। लंदन के डॉक्टर जौनाथन क्रै कनेल सफारी आए। इसके बाद लंदन के प्रशिक्षक मार्क किंग्सटन जोन्स व क्रिस्टोफर जॉन हेल्स ने सफारी के कर्मचारी व कीपरों को विस्तार से शेरों के स्वास्थ्य तथा उनके शारीरिक व्यायाम के लिए नए-नए तरीके बताए।
प्रयोगों के तहत शेरों के बाड़े में दो स्टेप की एक मचान बनाई गई, जो लगभग आठ फीट ऊंची है। इस मचान के पास एक छोटी मचान है। प्रशिक्षकों के अनुसार यह मचाने शेरों के उछल कूद के लिए बेहद कारगर सिद्ध हुई।
सफारी पार्क के ब्रीडिंग सेंटर मेें अब तक जन्म लेने वाले शावकों में नौ जीवित और स्वस्थ हैं। इटावा सफारी पार्क में लायन सफारी को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने में शेरनी जेसिका भाग्यशाली साबित हुई है। जेसिका का कुनबा ही लायन सफारी में दिखाई दे रहा है। नौ में से आठ शावक जेसिका के हैं, जबकि बाकी एक शावक जेसिका की संतान शेरनी जेनिफर का है।

फोटो संख्या 20 व 21 सफारी गेट व शेर शेरनी- फोटो : ETAWHA