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बारिश से खरीफ की फसल हो गई बर्बाद
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इटावा/ताखा। जनपद में दो दिन हुई बारिश से खरीफ और रवी की दोनों की फसलों को नुकसान हुआ है। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा। मंगलवार को मौसम साफ होने की वजह से धूप निकली रही।
रविवार की रात और सोमवार को दिन में हुई बारिश से कुछ फसलों के नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विजय बहादुर जायसवाल का कहना है कि अब आगे बारिश होगी या नहीं बुधवार के मौसम पर निर्भर करता है।
यदि मौसम मेें नमी रही तो ठीक, वरना मौसम गर्म होने पर दोबारा से बारिश होने की संभावना बढ़ जाएगी। ताखा क्षेत्र में पिछले दिनों दो दिन की बारिश से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ गई हैं।
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खेतों में खड़ी और कटी फसल बर्बाद हो गई है। धान, बाजरा आदि को भी क्षति पहुंचा है। इसी माह में शुरू होने वाली रबी की अगेती बोई जाने वाली फसल सरसों, मसूर, लहसुन, आलू की फसल बर्बाद हो गई।
किसानों के अनुसार, बारिश से खरीफ और रबी दोनों ही फसलों को नुकसान हुआ है। जिसका सीधा असर किसान की आय पर पड़ेगा। क्षेत्र में काफी बड़े रकबे में धान की खेती होती है।
दिवाली तक धान की अधिकांश फसल घरों या मंडियों में पहुंच जाती है, लेकिन बरसात की वजह से काफी नुकसान हुआ है। क्षेत्र के ताखा, कुदरैल, सुतियानी, सरसई नावर, कौआ, बेलाहार समेत अन्य गांवों में काफी नुकसान हुआ है।
बछरोई के किसान पुष्पेंद्र तिवारी का कहना है महंगी सिंचाई, खाद, कीटनाशक की मार के बाद बेमौसम बारिश ने किसानों की आशाओं पर पानी फेर दिया है।
समथर के किसान मिजाजी लाल, श्रीकृष्ण राठौर, संजीव कुमार, उमेश चंद्र, प्रहलाद सिंह ने बताया कि बरसात से धान खेतों में गिरने से फसल खत्म हो गई है। किसानों ने उचित मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
धान, सरसों, आलू की फसल भी प्रभावित
भरथना। ग्राम भोली निवासी किसान एपी सिंह ने बताया बारिश से खेत की फसलों का नुकसान हुआ है। 20 बीघा में धान की फसल व 11 बीघा में सरसों की फसल गिरने में प्रभावित हो गई है।
खेत में गिरी धान की फसल कम्पाइन मशीन से न कटवाकर, मजदूरों से कटवानी पड़ेगी। मेहनत के साथ लागत भी बढ़ेगी। साथ ही 25 बीघा में आलू की फसल में पानी भरने से नुकसान हुआ है।
ग्राम कुनेठा निवासी शिवम कुमार ने बताया कि बारिश होने से बाजरा की पकी फसल व दो बीघा लहसुन की फसल भी प्रभावित हुई है।
बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेरा
चकरनगर। बाढ़ग्रस्त गांव में किसान अभी नदियों की जल प्रलय से हुई बर्बादी की भरपाई की उम्मीद सरसों की फसल पर लगाए थे, लेकिन दो दिन हुई बेमौसम बरसात ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
महंगी डीएपी खाद खरीद कर किसानों ने नदी किनारे खेतों में सरसों की समय से बुआई करके अच्छी फसल होने की पैदावार के सपने देख रहे थे। बुआई के बाद हुई बारिश ने खेतों की मिट्टी को सख्त कर दिया, जो धूप लगने से और सख्त हो जाएगी।
सरसों की अंकुरित होने वाली बीज बहुत ही नाजुक होने के कारण मिट्टी फोड़ कर बाहर नहीं आ सकेगा। ऐसी स्थिति में बीज मिट्टी के अंदर ही नष्ट हो जाएगा। खेतों में 10 से 20 प्रतिशत ही पौधे निकलने में सफल हो सकेंगे।
किसान उदय भान सिंह, रूप सिंह, मेहताब, मलखान, संजय सिंह, राजकुमार, प्रदीप पांडे, जय प्रकाश दीक्षित ने बताया कि अभी बाढ़ की त्रासदी से उबर नहीं पाए थे कि बारिश ने पानी फेर दिया है।
बेमौसम बारिश ने तबाह कर दिया
महेवा। विकास खंड क्षेत्र के कस्बा एवं ग्रामीण अंचलों में बेमौसम की बारिश ने किसानों को तबाही के मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है। ऐसे में न तिलहनी फसलों की और न आलू की बुआई हो हो पा रही है।
धान की फसल भी चौपट हो रही है। धान की कटी फसल खेत में सड़ने के कगार पर है। आनेपुर निवासी सुखदेव चौबे, अनुरुद्ध, प्रताप, महेवा निवासी अनिल कुमार, कृष्ण कांत आदि ने फसल पूरी तरह से बर्बाद होने की बात कही है।
धूप निकलने के एक दिन बाद करें बुआई
धूप निकलने के एक दिन बाद ही आगे बुआई की तैयारी करें। जिन गांवों में धान की फसल गिरी है, वहां कृषि सहायक भेजकर स्थलीय सर्वे भी करा रहे हैं।
- राजेश कुमार चौबे, सहायक विकास अधिकारी कृषि
कृषि विभाग कर रहा नुकसान का आकलन
ताखा। कृषि बीज गोदाम प्रभारी शैलेंद्र यादव ने बताया कि दो दिन की बारिश से ताखा क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान धान की फसल को हुआ है। कृषि विभाग की टीम गांव-गांव जाकर नुकसान का आकलन कर रही है।
क्षेत्र में आलू की अभी तक फसल की बोई नहीं गई है, जिन किसानों ने सरसों की बुआई एक सप्ताह पहले की है, उसमें कम नुकसान हुआ है। धान की बासमती प्रजाति के 1509 फसल ज्यादातर किसान काट चुके हैं।
मात्र 30 प्रतिशत ही फसल खेतों में खड़ी हैं। बताया मोटी प्रजाति के धान अभी खेतों में खड़े हैं जिसमें बालियां निकल रही है। पकने में एक माह का समय लग सकता है। बरसात और तेज हवा की वजह से 70 से 80 प्रतिशत का नुकसान हुआ है।
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रविवार की रात और सोमवार को दिन में हुई बारिश से कुछ फसलों के नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विजय बहादुर जायसवाल का कहना है कि अब आगे बारिश होगी या नहीं बुधवार के मौसम पर निर्भर करता है।
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यदि मौसम मेें नमी रही तो ठीक, वरना मौसम गर्म होने पर दोबारा से बारिश होने की संभावना बढ़ जाएगी। ताखा क्षेत्र में पिछले दिनों दो दिन की बारिश से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ गई हैं।
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खेतों में खड़ी और कटी फसल बर्बाद हो गई है। धान, बाजरा आदि को भी क्षति पहुंचा है। इसी माह में शुरू होने वाली रबी की अगेती बोई जाने वाली फसल सरसों, मसूर, लहसुन, आलू की फसल बर्बाद हो गई।
किसानों के अनुसार, बारिश से खरीफ और रबी दोनों ही फसलों को नुकसान हुआ है। जिसका सीधा असर किसान की आय पर पड़ेगा। क्षेत्र में काफी बड़े रकबे में धान की खेती होती है।
दिवाली तक धान की अधिकांश फसल घरों या मंडियों में पहुंच जाती है, लेकिन बरसात की वजह से काफी नुकसान हुआ है। क्षेत्र के ताखा, कुदरैल, सुतियानी, सरसई नावर, कौआ, बेलाहार समेत अन्य गांवों में काफी नुकसान हुआ है।
बछरोई के किसान पुष्पेंद्र तिवारी का कहना है महंगी सिंचाई, खाद, कीटनाशक की मार के बाद बेमौसम बारिश ने किसानों की आशाओं पर पानी फेर दिया है।
समथर के किसान मिजाजी लाल, श्रीकृष्ण राठौर, संजीव कुमार, उमेश चंद्र, प्रहलाद सिंह ने बताया कि बरसात से धान खेतों में गिरने से फसल खत्म हो गई है। किसानों ने उचित मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
धान, सरसों, आलू की फसल भी प्रभावित
भरथना। ग्राम भोली निवासी किसान एपी सिंह ने बताया बारिश से खेत की फसलों का नुकसान हुआ है। 20 बीघा में धान की फसल व 11 बीघा में सरसों की फसल गिरने में प्रभावित हो गई है।
खेत में गिरी धान की फसल कम्पाइन मशीन से न कटवाकर, मजदूरों से कटवानी पड़ेगी। मेहनत के साथ लागत भी बढ़ेगी। साथ ही 25 बीघा में आलू की फसल में पानी भरने से नुकसान हुआ है।
ग्राम कुनेठा निवासी शिवम कुमार ने बताया कि बारिश होने से बाजरा की पकी फसल व दो बीघा लहसुन की फसल भी प्रभावित हुई है।
बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेरा
चकरनगर। बाढ़ग्रस्त गांव में किसान अभी नदियों की जल प्रलय से हुई बर्बादी की भरपाई की उम्मीद सरसों की फसल पर लगाए थे, लेकिन दो दिन हुई बेमौसम बरसात ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
महंगी डीएपी खाद खरीद कर किसानों ने नदी किनारे खेतों में सरसों की समय से बुआई करके अच्छी फसल होने की पैदावार के सपने देख रहे थे। बुआई के बाद हुई बारिश ने खेतों की मिट्टी को सख्त कर दिया, जो धूप लगने से और सख्त हो जाएगी।
सरसों की अंकुरित होने वाली बीज बहुत ही नाजुक होने के कारण मिट्टी फोड़ कर बाहर नहीं आ सकेगा। ऐसी स्थिति में बीज मिट्टी के अंदर ही नष्ट हो जाएगा। खेतों में 10 से 20 प्रतिशत ही पौधे निकलने में सफल हो सकेंगे।
किसान उदय भान सिंह, रूप सिंह, मेहताब, मलखान, संजय सिंह, राजकुमार, प्रदीप पांडे, जय प्रकाश दीक्षित ने बताया कि अभी बाढ़ की त्रासदी से उबर नहीं पाए थे कि बारिश ने पानी फेर दिया है।
बेमौसम बारिश ने तबाह कर दिया
महेवा। विकास खंड क्षेत्र के कस्बा एवं ग्रामीण अंचलों में बेमौसम की बारिश ने किसानों को तबाही के मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है। ऐसे में न तिलहनी फसलों की और न आलू की बुआई हो हो पा रही है।
धान की फसल भी चौपट हो रही है। धान की कटी फसल खेत में सड़ने के कगार पर है। आनेपुर निवासी सुखदेव चौबे, अनुरुद्ध, प्रताप, महेवा निवासी अनिल कुमार, कृष्ण कांत आदि ने फसल पूरी तरह से बर्बाद होने की बात कही है।
धूप निकलने के एक दिन बाद करें बुआई
धूप निकलने के एक दिन बाद ही आगे बुआई की तैयारी करें। जिन गांवों में धान की फसल गिरी है, वहां कृषि सहायक भेजकर स्थलीय सर्वे भी करा रहे हैं।
- राजेश कुमार चौबे, सहायक विकास अधिकारी कृषि
कृषि विभाग कर रहा नुकसान का आकलन
ताखा। कृषि बीज गोदाम प्रभारी शैलेंद्र यादव ने बताया कि दो दिन की बारिश से ताखा क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान धान की फसल को हुआ है। कृषि विभाग की टीम गांव-गांव जाकर नुकसान का आकलन कर रही है।
क्षेत्र में आलू की अभी तक फसल की बोई नहीं गई है, जिन किसानों ने सरसों की बुआई एक सप्ताह पहले की है, उसमें कम नुकसान हुआ है। धान की बासमती प्रजाति के 1509 फसल ज्यादातर किसान काट चुके हैं।
मात्र 30 प्रतिशत ही फसल खेतों में खड़ी हैं। बताया मोटी प्रजाति के धान अभी खेतों में खड़े हैं जिसमें बालियां निकल रही है। पकने में एक माह का समय लग सकता है। बरसात और तेज हवा की वजह से 70 से 80 प्रतिशत का नुकसान हुआ है।