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Etawah News: सैयद बाबा की मजार के स्वामित्व की अपील खारिज
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फोटो 34:::मजार की फाइल फोटो ।
इटावा। वन कोर्ट सफारी के पास फिशर वन में बनी सैयद बाबा की मजार के स्वामित्व को लेकर पर्याप्त साक्ष्य न देने पाने पर 18 अप्रैल को बेदखली के आदेश दिए थे। इसके बाद दूसरे पक्ष के लोगों ने मुख्य वन संरक्षक कार्यालय कानपुर कोर्ट में इस आदेश के खिलाफ अपील की थी। यहां भी उनकी अपील खारिज कर आदेश को बरकरार रखा गया है।
संरक्षित वन भूमि पर बनी मजार पर स्वामित्व को लेकर प्राधिकृत अधिकारी वन विभाग कोर्ट में करीब 60 दिनों तक सुनवाई थी। इसमें वन विभाग कोर्ट ने पक्षकारों को भूमि संबंधी अभिलेख व कागजात प्रस्तुत करने के लिए 28 मार्च तक का मौका दिया था। सुनवाई में देखरेख करने वाले फजले इलाही और उनके अधिवक्ता कोर्ट में मजार के स्वामित्व को लेकर पर्याप्त सबूत व साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। वन विभाग की ओर से वादी बने वन दरोगा अशोक शर्मा का दावा है कि डीएफओ कोर्ट में दरगाह पक्ष के लोग कोई भी पुख्ता दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके हैं। इसकी वजह से 16 अप्रैल को वन कोर्ट ने विवाद भूमि पर बनी मजार के बेदखली के आदेश दिए थे। इस फैसले के खिलाफ दूसरे पक्ष के लोगों ने मुख्य वन संरक्षक कार्यालय कानपुर कोर्ट में अपील की थी। कोर्ट ने मजार को लेकर साक्ष्य मांगे थे।
इस दौरान पर्याप्त सबूत न दिखाने पर उनकी अपील को खारिज कर दिया। साथ ही इटावा वन कोर्ट की ओर से दिए गए बेदखली के आदेश को बरकरार रखा। बता दें कि सफारी सड़क से लगभग एक किलोमीटर अंदर जंगल में 0.0281 हेक्टेयर वन भूमि में मजार बनी है। इसे लोग बीहड़ वाले सैयद बाबा की मजार कहते हैं। एक शिकायत पर वन विभाग की टीम ने इस मजार के अस्तित्व की जांच की थी।
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संरक्षित वन भूमि पर बनी मजार पर स्वामित्व को लेकर प्राधिकृत अधिकारी वन विभाग कोर्ट में करीब 60 दिनों तक सुनवाई थी। इसमें वन विभाग कोर्ट ने पक्षकारों को भूमि संबंधी अभिलेख व कागजात प्रस्तुत करने के लिए 28 मार्च तक का मौका दिया था। सुनवाई में देखरेख करने वाले फजले इलाही और उनके अधिवक्ता कोर्ट में मजार के स्वामित्व को लेकर पर्याप्त सबूत व साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। वन विभाग की ओर से वादी बने वन दरोगा अशोक शर्मा का दावा है कि डीएफओ कोर्ट में दरगाह पक्ष के लोग कोई भी पुख्ता दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके हैं। इसकी वजह से 16 अप्रैल को वन कोर्ट ने विवाद भूमि पर बनी मजार के बेदखली के आदेश दिए थे। इस फैसले के खिलाफ दूसरे पक्ष के लोगों ने मुख्य वन संरक्षक कार्यालय कानपुर कोर्ट में अपील की थी। कोर्ट ने मजार को लेकर साक्ष्य मांगे थे।
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इस दौरान पर्याप्त सबूत न दिखाने पर उनकी अपील को खारिज कर दिया। साथ ही इटावा वन कोर्ट की ओर से दिए गए बेदखली के आदेश को बरकरार रखा। बता दें कि सफारी सड़क से लगभग एक किलोमीटर अंदर जंगल में 0.0281 हेक्टेयर वन भूमि में मजार बनी है। इसे लोग बीहड़ वाले सैयद बाबा की मजार कहते हैं। एक शिकायत पर वन विभाग की टीम ने इस मजार के अस्तित्व की जांच की थी।
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