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भतीजे ने पत्नी संग मिलकर की थी चाचा की हत्या कर्ज
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इटावा। बसरेहर थाना क्षेत्र के किल्ली सुल्तानपुर गांव में पांच दिन पहले हुई राजू उर्फ राजवीर की हत्या का शुक्रवार को पुलिस ने खुलासा कर दिया। राजू की हत्या उसके भतीजे व बहू ने मिल कर की थी।
एसपी ग्रामीण ओमवीर सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि किल्ली सुल्तानपुर गांव निवासी राजू का शव उसके घर पर आठ अगस्त को फांसी के फंदे पर लटकता मिला था। परिजनों ने खुदकुशी की बात कहते हुए पुलिस को घटना की सूचना दी थी। पोस्टमार्टम में राजू की मौत गला कसकर किए जाने की पुष्टि हुई थी। उसके शरीर पर चोटों के
निशान भी पाए गए थे। इस पर पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर छानबीन शुरू की। खुद पर पुलिस का शक बढ़ता देख मृतक का भतीजा संजीव अपनी पत्नी सुरभि के साथ बाहर भागने के लिए किल्ली चौराहे के पास खड़ा था। जहां से पुलिस टीम ने उन्हें दबोच लिया।
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बकौल एसपी पूछताछ में दंपती ने राजू की हत्या का जुर्म कबूल करते हुए बताया कि वह अपनी जमीन बेचना चाहता था। इसी बात को लेकर घटना के एक दिन पहले संजीव और राजू में विवाद हुआ था। तब पुलिस ने दोनों के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई की थी। आठ अगस्त को चाचा-भतीजे जमानत पर छूटे थे। कोर्ट से घर आने के
बाद दोनों में फिर झगड़ा हो गया था। इस पर संजीव ने पत्नी सुरभि के साथ मिलकर अंगौछे से राजू की गला कसकर हत्या कर दी थी। हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए दोनों ने शव को फांसी पर लटका दिया था। एसपी के मुताबिक दोपहर बाद हत्यारोपी दंपती को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से दोनों को जिला कारागार भेज दिया गया।
हत्यारोपी संजीव ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि चाचा राजू शराब का लती था। उस पर तीन-चार लाख रुपये का कर्ज हो गया था। इसी कर्ज को चुकाने के लिए वह जमीन को बेचना चाहते थे। जमीन बेचने का विरोध करने पर राजू झगड़ा करने पर आमादा हो जाता था। इसी से तंग आकर उसने पत्नी के साथ मिलकर राजू की हत्या कर दी।
राजू के बड़े भाई प्रेम चंद्र की कई साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। इसके बाद राजू ने विधवा भाभी मीना देवी से करीब दो दशक पहले विवाह किया था। हत्यारोपी संजीव मीना देवी का बेटा है। इस रिश्ते से वह राजू का सौतेला बेटा भी है। थानाध्यक्ष ने बताया कि राजू व संजीव के बीच जमीन का बंटवारा नहीं हुआ था। संजीव को लगता था कि राजू पूरी जमीन बेच देगा, तो वह सड़क पर आ जाएगा। इसी के चलते दोनों में विवाद होता था।
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एसपी ग्रामीण ओमवीर सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि किल्ली सुल्तानपुर गांव निवासी राजू का शव उसके घर पर आठ अगस्त को फांसी के फंदे पर लटकता मिला था। परिजनों ने खुदकुशी की बात कहते हुए पुलिस को घटना की सूचना दी थी। पोस्टमार्टम में राजू की मौत गला कसकर किए जाने की पुष्टि हुई थी। उसके शरीर पर चोटों के
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निशान भी पाए गए थे। इस पर पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर छानबीन शुरू की। खुद पर पुलिस का शक बढ़ता देख मृतक का भतीजा संजीव अपनी पत्नी सुरभि के साथ बाहर भागने के लिए किल्ली चौराहे के पास खड़ा था। जहां से पुलिस टीम ने उन्हें दबोच लिया।
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बकौल एसपी पूछताछ में दंपती ने राजू की हत्या का जुर्म कबूल करते हुए बताया कि वह अपनी जमीन बेचना चाहता था। इसी बात को लेकर घटना के एक दिन पहले संजीव और राजू में विवाद हुआ था। तब पुलिस ने दोनों के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई की थी। आठ अगस्त को चाचा-भतीजे जमानत पर छूटे थे। कोर्ट से घर आने के
बाद दोनों में फिर झगड़ा हो गया था। इस पर संजीव ने पत्नी सुरभि के साथ मिलकर अंगौछे से राजू की गला कसकर हत्या कर दी थी। हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए दोनों ने शव को फांसी पर लटका दिया था। एसपी के मुताबिक दोपहर बाद हत्यारोपी दंपती को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से दोनों को जिला कारागार भेज दिया गया।
हत्यारोपी संजीव ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि चाचा राजू शराब का लती था। उस पर तीन-चार लाख रुपये का कर्ज हो गया था। इसी कर्ज को चुकाने के लिए वह जमीन को बेचना चाहते थे। जमीन बेचने का विरोध करने पर राजू झगड़ा करने पर आमादा हो जाता था। इसी से तंग आकर उसने पत्नी के साथ मिलकर राजू की हत्या कर दी।
राजू के बड़े भाई प्रेम चंद्र की कई साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। इसके बाद राजू ने विधवा भाभी मीना देवी से करीब दो दशक पहले विवाह किया था। हत्यारोपी संजीव मीना देवी का बेटा है। इस रिश्ते से वह राजू का सौतेला बेटा भी है। थानाध्यक्ष ने बताया कि राजू व संजीव के बीच जमीन का बंटवारा नहीं हुआ था। संजीव को लगता था कि राजू पूरी जमीन बेच देगा, तो वह सड़क पर आ जाएगा। इसी के चलते दोनों में विवाद होता था।