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Etawah News: चोरी की बाइक संग पकड़ा गया आरोपी कोर्ट से बरी
Sun, 10 Mar 2024 11:01 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Sun, 10 Mar 2024 11:01 PM IST
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इटावा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर एक रामचंद्र यादव ने फर्जी नंबर प्लेट लगाकर चोरी की बाइक के साथ पकड़े गए आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता रामसरन सिंह यादव ने बताया कि जसवंतनगर थाने में तैनात उपनिरीक्षक राजेंद्र सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह 11 मई 2021 को हमराह फोर्स के साथ बस स्टैंड पुल के नीचे वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। तभी एक बाइक आती दिखी। पुलिस को देखकर बाइक सवार बाइक को मोड़कर भागने लगा। पुलिस ने दौडाकर उसे धर दबोचा। बाइक के कागजात मांगने पर वह नहीं दिखा सका। पुलिस ने जब कड़ाई से पूछताछ की तो आरोपी ने बताया कि उसने बाइक को सिरसागंज क्षेत्र से चोरी की थी।
पकड़े गए व्यक्ति ने अपना नाम सुमित निवासी नगला नया थाना सिरसागंज बताया था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी सुमित को जेल भेज दिया था। छानबीन के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में पेश किया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर एक में हुई। बचाव पक्ष की ओर से रामसरन सिंह यादव व शशांक शेखर यादव ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने फर्जी तरीके से सुमित को जेल भेजा है।
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उसके खिलाफ न तो पुलिस के अलावा कोई गवाह है और न ही पुलिस ने जामा तलाशी में उसके पास से बाइक के अलावा किसी भी सामान का होना दर्शाया है। जब कोई घर से निकलता है तो उसके पास कोई न कोई सामान होना चाहिए था। वहीं, अभियोजन की ओर से भी साक्ष्य पेश किए गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में सुमित को बरी कर दिया।
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वरिष्ठ अधिवक्ता रामसरन सिंह यादव ने बताया कि जसवंतनगर थाने में तैनात उपनिरीक्षक राजेंद्र सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह 11 मई 2021 को हमराह फोर्स के साथ बस स्टैंड पुल के नीचे वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। तभी एक बाइक आती दिखी। पुलिस को देखकर बाइक सवार बाइक को मोड़कर भागने लगा। पुलिस ने दौडाकर उसे धर दबोचा। बाइक के कागजात मांगने पर वह नहीं दिखा सका। पुलिस ने जब कड़ाई से पूछताछ की तो आरोपी ने बताया कि उसने बाइक को सिरसागंज क्षेत्र से चोरी की थी।
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पकड़े गए व्यक्ति ने अपना नाम सुमित निवासी नगला नया थाना सिरसागंज बताया था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी सुमित को जेल भेज दिया था। छानबीन के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में पेश किया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर एक में हुई। बचाव पक्ष की ओर से रामसरन सिंह यादव व शशांक शेखर यादव ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने फर्जी तरीके से सुमित को जेल भेजा है।
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उसके खिलाफ न तो पुलिस के अलावा कोई गवाह है और न ही पुलिस ने जामा तलाशी में उसके पास से बाइक के अलावा किसी भी सामान का होना दर्शाया है। जब कोई घर से निकलता है तो उसके पास कोई न कोई सामान होना चाहिए था। वहीं, अभियोजन की ओर से भी साक्ष्य पेश किए गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में सुमित को बरी कर दिया।