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इलाज दौरान महिला की मौत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर
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फोटो संख्या 25 ससुरालीजनों पर आरोप लगातीं मायके पक्ष से आई महिलाएं
- फोटो : ETAWHA
थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम महानेपुर निवासी महिला को 15 दिन पूर्व तेज बुखार आने पर इलाज के दौरान रविवार रात आगरा में हुई मौत के मामले में सोमवार दोपहर पोस्टमार्टम के बाद देर शाम महिला का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
इस दौरान मायके पक्ष द्वारा ससुरालीजनों पर इलाज में लापरवाही से उनकी बेटी की मौत का आरोप लगाना जारी है।
वहीं ससुरालीजनों का कहना है कि हमने बहू को पहले शहर में इलाज दिलवाया और आराम मिलने के बाद दोबारा तबीयत बिगड़ने पर आगरा दिखाया, लेकिन वह बच नहीं सकी। उधर पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ बताने और कार्रवाई करने की बात कह रही है।
पति मूरत लाल ने बताया कि 5 सितंबर को अंजू को तेज बुखार आने पर सराय जलाल में एक डॉक्टर को दिखाया जिससे दो दिन चले इलाज के बाद आराम मिलने पर घर ले आए।
रात में फिर तबीयत बिगड़ी तो अंजू की बहन नारायणी देवी व जीजा सुभाष चंद्र निवासी मानिकपुर मोड़ थाना इकदिल को बुलवाया। साथ ही अंजू को उनके साथ जिला अस्पताल ले गए।
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जिला अस्पताल में कोरोना के कारण भर्ती नहीं किया जा सका तो पिलखर में एक निजी अस्पताल में दो दिन भर्ती रखा और आराम मिलने पर घर आ गए।
छुट्टी होने पर अंजू की हालत फिर बिगड़ गई तो वे और सुभाष ऑटो से अंजू आगरा ले गए जहां किसी प्राइवेट अस्पताल ने भर्ती नहीं किया तो आगरा जिला अस्पताल में भर्ती किया गया।
यहां इलाज के दौरान अंजू की मौत हो गई। मूरत ने बताया कि चार साल पहले उनकी अंजू से शादी हुई थी और उनका एक ढाई वर्ष का पुत्र खुशहाल है जो अब बिन मां का रह गया।
इधर, औरैया के अयाना निवासी अंजू के पिता छेदीलाल का आरोप है कि ससुरालीजनों ने अंजू का समय से और अच्छे डॉक्टर से इलाज कराया होता तो आज वह जिंदा होती।
मायके पक्ष से आईं महिलाओं ने भी ससुरालीजनों पर आरोप लगाए। मूरत लाल के पिता जगराम का कहना है कि हम भूमिहीन हैं, मजदूरी कर चार बेटियों व दो बेटों का भरण-पोषण कर रहे हैं।
इसके बाद भी इधर-उधर से रुपये इकट्ठे कर अच्छे से अच्छा इलाज दिलाया, इसके बाद भी मायके पक्ष से बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं।
उधर, थाना प्रभारी मदन लाल गुप्ता का कहना है कि जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक इस संबंध में कुछ भी बताना संभव नहीं है।
हालांकि मृतक के पिता की ओर से तहरीर मिली है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट देख लेने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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इस दौरान मायके पक्ष द्वारा ससुरालीजनों पर इलाज में लापरवाही से उनकी बेटी की मौत का आरोप लगाना जारी है।
वहीं ससुरालीजनों का कहना है कि हमने बहू को पहले शहर में इलाज दिलवाया और आराम मिलने के बाद दोबारा तबीयत बिगड़ने पर आगरा दिखाया, लेकिन वह बच नहीं सकी। उधर पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ बताने और कार्रवाई करने की बात कह रही है।
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पति मूरत लाल ने बताया कि 5 सितंबर को अंजू को तेज बुखार आने पर सराय जलाल में एक डॉक्टर को दिखाया जिससे दो दिन चले इलाज के बाद आराम मिलने पर घर ले आए।
रात में फिर तबीयत बिगड़ी तो अंजू की बहन नारायणी देवी व जीजा सुभाष चंद्र निवासी मानिकपुर मोड़ थाना इकदिल को बुलवाया। साथ ही अंजू को उनके साथ जिला अस्पताल ले गए।
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जिला अस्पताल में कोरोना के कारण भर्ती नहीं किया जा सका तो पिलखर में एक निजी अस्पताल में दो दिन भर्ती रखा और आराम मिलने पर घर आ गए।
छुट्टी होने पर अंजू की हालत फिर बिगड़ गई तो वे और सुभाष ऑटो से अंजू आगरा ले गए जहां किसी प्राइवेट अस्पताल ने भर्ती नहीं किया तो आगरा जिला अस्पताल में भर्ती किया गया।
यहां इलाज के दौरान अंजू की मौत हो गई। मूरत ने बताया कि चार साल पहले उनकी अंजू से शादी हुई थी और उनका एक ढाई वर्ष का पुत्र खुशहाल है जो अब बिन मां का रह गया।
इधर, औरैया के अयाना निवासी अंजू के पिता छेदीलाल का आरोप है कि ससुरालीजनों ने अंजू का समय से और अच्छे डॉक्टर से इलाज कराया होता तो आज वह जिंदा होती।
मायके पक्ष से आईं महिलाओं ने भी ससुरालीजनों पर आरोप लगाए। मूरत लाल के पिता जगराम का कहना है कि हम भूमिहीन हैं, मजदूरी कर चार बेटियों व दो बेटों का भरण-पोषण कर रहे हैं।
इसके बाद भी इधर-उधर से रुपये इकट्ठे कर अच्छे से अच्छा इलाज दिलाया, इसके बाद भी मायके पक्ष से बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं।
उधर, थाना प्रभारी मदन लाल गुप्ता का कहना है कि जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक इस संबंध में कुछ भी बताना संभव नहीं है।
हालांकि मृतक के पिता की ओर से तहरीर मिली है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट देख लेने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।