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सुलझ नहीं रही राशनकार्डों की गुत्थी
Etawah
Updated Sun, 05 Oct 2014 05:32 AM IST
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इटावा। राशनकार्डों की वैधता 31 दिसंबर को समाप्त हो रही है। इससे पूर्व नए कंप्यूटराइज्ड राशनकार्ड जारी होने हैं। लिहाजा सरकार जिले के 3.11 लाख राशनकार्डों को अपडेट करवा रही है, जिससे फर्जीवाड़े को रोका जा सके। लेकिन डाटा अपडेशन का काम इस कदर उलझा है कि कई महीने बाद भी सिर्फ 2.51 लाख कार्डों की कंप्यूटर फीडिंग हो पाई है। इसमें महज 1.40 लाख कार्ड ऑनलाइन हो पाए हैं। इनका भी लखनऊ स्तर से वोटर आईडी से मिलान होना बाकी है। इस जटिल समस्या का हल निकालने के लिए शासन ने पूर्ति विभाग को सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराने की बात कही थी लेकिन यह सॉफ्टवेयर भी नहीं मिला है। ऐसे में विभागीय स्तर पर ऑनलाइन फीडिंग कर राशनकार्ड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी अटकी है। कार्डधारकों को 31 दिसंबर से पूर्व नए राशनकार्ड मिल पाएंगे या नहीं। इसे लेकर विभाग भी पसोपेश में है।
इस कारण उलझी डाटा अपडेशन की गुत्थी
काफी अर्से से मनमर्जी के मुताबिक राशनकार्ड बनते आए हैं। किसी ने परिवार के राशनकार्ड से अपना नाम हटवा कर नया कार्ड हासिल कर लिया। तमाम कार्ड ऐसे भी प्रचलन में हैं, जिनके मुखिया का निधन हो चुका है। कई राशनकार्ड धारक शहर छोड़कर अन्यत्र बस चुके हैं। ऐसे भी राशनकार्ड हैं, जिनका कोई आधार नहीं है। पूरी तरह फर्जी हैं। मजे की बात यह कि सभी राशनकार्ड प्रचलन में हैं। कोटा डीलर को इन्हीं कार्डों की संख्या के मद्देनजर खाद्यान्न मिलता है। अब जब सरकार इन प्रचलित राशनकार्डों को वोटर आईडी से मिलान कर रही है तो राशनकार्डों की न केवल खामियां उजागर हो रही हैं, बल्कि जो मुखिया मर चुके हैं, जिनकी वोटर आईडी में कोई और नाम दर्ज है या फिर बैंक अकाउंट नहीं है, वे राशनकार्ड डाटा अपडेशन की प्रक्रिया में अटके पड़े हैं।
60 हजार राशनकार्डों के तो फार्म ही नहीं आए
डाटा अपडेशन के लिए 3.11 लाख राशनकार्डों में से 60 हजार के डाटा प्रपत्र ही नहीं भरे गए हैं। इसीलिए सिर्फ 2.51 लाख राशनकार्डों की ही कंप्यूटर फीडिंग संभव हो पाई है। यह 60 हजार राशनकार्ड उन लोगों के माने जा रहे हैं, जिनके पास साक्ष्य के तौर पर वोटरआईडी या बैंक अकाउंट नहीं है। इनमें अमूमन वे कार्डधारक हैं, जिनके मुखिया का निधन हो चुका है। इसके अलावा उन लोगों ने भी डाटा प्रपत्र भरकर जमा नहीं किया, जो शहर से बाहर जा चुके हैं।
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1.11 लाख कार्ड मिस मैच के शिकार
जिन 2.51 लाख राशनकार्डों की फीडिंग हो चुकी है। उनमें से सिर्फ 1.40 कार्डों को ही एनआईसी ने ऑनलाइन किया है, क्योंकि वोटर आईडी से मिलान न होने यानी मिस मैच होने पर कंप्यूटर ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया। ऐसे मिस मैच कार्डों को शासन से मिलने वाले सॉफ्टवेयर के जरिये दुरुस्त किया जाएगा। इसलिए भी इस सॉफ्टवेयर की दरकार बनी हुई है।
-सॉफ्टवेयर का यह होगा फायदा
इस मसले को सुलझाने के लिए जो सॉफ्टवेयर डेवलप किया गया है, उसकी खासियत यह होगी कि मिस मैच राशनकार्ड तो दुरुस्त होंगे ही, साथ ही जो फीडिंग से वंचित हैं और जो नया कार्ड बनवाना चाहते हैं, वे भी वोटर आईडी आदि अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराकर ऑनलाइन फीडिंग करवा सकेंगे। इसके बाद उन्हें एक-दो दिन में ही राशनकार्ड उपलब्ध हो जाएगा।
-छुट्टियां पड़ रही हैं। इसलिए सॉफ्टवेयर के मिलने में देरी हो रही है। अगले सप्ताह में सॉफ्टवेयर मिलने की पूरी उम्मीद है।
-सत्यवीर सिंह, डीएसओ, इटावा
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इस कारण उलझी डाटा अपडेशन की गुत्थी
काफी अर्से से मनमर्जी के मुताबिक राशनकार्ड बनते आए हैं। किसी ने परिवार के राशनकार्ड से अपना नाम हटवा कर नया कार्ड हासिल कर लिया। तमाम कार्ड ऐसे भी प्रचलन में हैं, जिनके मुखिया का निधन हो चुका है। कई राशनकार्ड धारक शहर छोड़कर अन्यत्र बस चुके हैं। ऐसे भी राशनकार्ड हैं, जिनका कोई आधार नहीं है। पूरी तरह फर्जी हैं। मजे की बात यह कि सभी राशनकार्ड प्रचलन में हैं। कोटा डीलर को इन्हीं कार्डों की संख्या के मद्देनजर खाद्यान्न मिलता है। अब जब सरकार इन प्रचलित राशनकार्डों को वोटर आईडी से मिलान कर रही है तो राशनकार्डों की न केवल खामियां उजागर हो रही हैं, बल्कि जो मुखिया मर चुके हैं, जिनकी वोटर आईडी में कोई और नाम दर्ज है या फिर बैंक अकाउंट नहीं है, वे राशनकार्ड डाटा अपडेशन की प्रक्रिया में अटके पड़े हैं।
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60 हजार राशनकार्डों के तो फार्म ही नहीं आए
डाटा अपडेशन के लिए 3.11 लाख राशनकार्डों में से 60 हजार के डाटा प्रपत्र ही नहीं भरे गए हैं। इसीलिए सिर्फ 2.51 लाख राशनकार्डों की ही कंप्यूटर फीडिंग संभव हो पाई है। यह 60 हजार राशनकार्ड उन लोगों के माने जा रहे हैं, जिनके पास साक्ष्य के तौर पर वोटरआईडी या बैंक अकाउंट नहीं है। इनमें अमूमन वे कार्डधारक हैं, जिनके मुखिया का निधन हो चुका है। इसके अलावा उन लोगों ने भी डाटा प्रपत्र भरकर जमा नहीं किया, जो शहर से बाहर जा चुके हैं।
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1.11 लाख कार्ड मिस मैच के शिकार
जिन 2.51 लाख राशनकार्डों की फीडिंग हो चुकी है। उनमें से सिर्फ 1.40 कार्डों को ही एनआईसी ने ऑनलाइन किया है, क्योंकि वोटर आईडी से मिलान न होने यानी मिस मैच होने पर कंप्यूटर ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया। ऐसे मिस मैच कार्डों को शासन से मिलने वाले सॉफ्टवेयर के जरिये दुरुस्त किया जाएगा। इसलिए भी इस सॉफ्टवेयर की दरकार बनी हुई है।
-सॉफ्टवेयर का यह होगा फायदा
इस मसले को सुलझाने के लिए जो सॉफ्टवेयर डेवलप किया गया है, उसकी खासियत यह होगी कि मिस मैच राशनकार्ड तो दुरुस्त होंगे ही, साथ ही जो फीडिंग से वंचित हैं और जो नया कार्ड बनवाना चाहते हैं, वे भी वोटर आईडी आदि अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराकर ऑनलाइन फीडिंग करवा सकेंगे। इसके बाद उन्हें एक-दो दिन में ही राशनकार्ड उपलब्ध हो जाएगा।
-छुट्टियां पड़ रही हैं। इसलिए सॉफ्टवेयर के मिलने में देरी हो रही है। अगले सप्ताह में सॉफ्टवेयर मिलने की पूरी उम्मीद है।
-सत्यवीर सिंह, डीएसओ, इटावा