{"_id":"33-184814","slug":"Etawah-184814-33","type":"story","status":"publish","title_hn":"आगे आएं, दें किसी को जीवनदान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आगे आएं, दें किसी को जीवनदान
Etawah
Updated Sun, 08 Jun 2014 05:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इटावा। रक्तदान को महादान माना गया है। यह इस मायने में कि आपका खून न मालूम किसकी थमती हुई सांसों को नई ऊर्जा प्रदान कर दे। न मालूम किस घर के चिराग को बुझने से बचा ले। हो सकता है किसी के बुढ़ापे की लाठी को आपका दिया हुआ खून टूटने से बचा ले। जाहिर है कि हमारे और आपके जीवन में किसी को नई जिंदगी देने से बढ़कर और कोई बड़ा दान हो ही नहीं सकता।
अमर उजाला के हमेशा ऐसे प्रयास रहे हैं और इस प्रकार के सार्थक कदम उठाए जाते रहे हैं। इस कड़ी में गत वर्ष अक्टूबर के महीने में जिला अस्पताल में रक्तदान शिविर का आयोजन किया था। खासकर युवा रक्तदाता जिस जोश के साथ आगे आए थे, उसने जिला अस्पताल के इतिहास में मील का पत्थर स्थापित किया था। करीब एक सैकड़ा के आसपास लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया था। इसमें तत्कालीन डीएम पी. गुरुप्रसाद और एसएसपी नीलाब्जा चौधरी ने भी अपना खून देकर रक्तदाताओं की हौसला अफजाई की थी। इसका सुखद पहलू यह रहा था कि गुजरे साल में अस्पताल प्रशासन को खून की कमी महसूस नहीं हुई। हर जरूरतमंद मरीज को वक्त पर सहूलियत मिली। गरीबों और जरूरतमंद लोगों ने हमारे सभी रक्तदाताओं को दुआ दी। साथ ही आत्म संतुष्टि मिली कि हमने किसी का जीवन बचाया। हमारे अभियान की सफलता में इस बार सहयोगी के तौर पर जी-माउंट लिट्रा स्कूल परिवार भी शामिल रहेगा।
------
14 जून को जरूर आइएगा
अमर उजाला एक फिर से 14 जून को ऐसे ही रक्तदान शिविर का आयोजन करने जा रहा है। जगह वहीं जिला अस्पताल का कैंपस होगा। हालांकि अभी गर्मी का जोर है। आने वाले दिनों में कुछ न कुछ राहत जरूर मिलेगी। फिर भी अस्पताल प्रशासन ने इस भीषण गर्मी को देखते हुए खास कदम उठाए हैं। पहले रक्तदान शिविर ब्लड बैंक परिसर में आयोजित हुआ था। इस बार रक्तदाताआें की सहूलियत के लिए यह जिला अस्पताल के प्रथम खंड में सीएमएस कक्ष के ठीक बगल स्थित हॉल (कमरा नंबर-135) में लगाया जाएगा। जहां एसी की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। अमर उजाला का प्रयास है कि इस महादान में हर एक स्वस्थ नागरिक की सहभागिता रहे। वह स्वप्रेरणा से उन लोगों के हित में रक्तदान करें, जो वक्त पर खून न मिलने पर हमारे आपके बीच से चले जाते हैं। यह प्रयास आप पाठकों के सहयोग से ही पूरी तरह सफल रहेगा। इसमें शक की कहीं कोई गुंजाइश नजर नहीं आती। और हां, अमर उजाला प्रेरणा के तौर पर आने दिनों में अपनी भूमिका अदा करता रहेगा। रक्तदान से होने वाले फायदों से लेकर तमाम भ्रमात्मक तथ्यों से पाठकों को आगाह भी करता रहेगा।
विज्ञापन
------
रक्तदान को चाहिए महज दस मिनट
इटावा। दान में वक्त नहीं लगता। जो ठान लेता है, वह करके रहता है। रक्तदान भी इतना ही सहज है। किसी मरीज को ब्लड चढ़ाने में बेशक कई घंटे लग सकते हैं। लेकिन रक्त देने में महज 10 मिनट का वक्त चाहिए होता है। खास बात यह कि इस छोटे से अंतराल में किन्हीं तीन व्यक्तियों की जान बचाई जा सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक यूनिट (350 एमएल) ब्लड को सेपरेटर मशीन के जरिए आरबीसी, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा में बांटा जा सकता है। जिस व्यक्ति को जिस पार्ट की जरूरत होती है, उसे वह पार्ट चढ़ा दिया जाता है।
------
शुद्ध ब्लड ही होता है स्वीकार
-ऐसा नहीं है कि बगैर जांच परख के ब्लड निकाल लिया जाता है। चिकित्सक बताते हैं कि व्यक्ति का ब्लड लेने से पूर्व उसकी पांच प्रकार की जांचें भी होती हैं। जिसमें एचआईवी, हैपेटाइटिस बी, हैपेटाइटिस सी, मलेरिया और बीडीआरएल (गुप्त रोग मसलन सिफलिस आदि) शामिल हैं। स्पष्ट है कि शुद्ध ब्लड ही स्वीकार किया जाता है। रक्तदान के लिए व्यक्ति का स्वस्थ होना जरूरी है। इसका आंकलन उसके हीमोग्लोबिन और बीपी चेक कर किया जाता है। आमतौर पर हीमोग्लोबिन 12-13 ग्राम पर्सेंट और नार्मल बीपी 80 से 120 होना चाहिए। रक्तदाता के लिए यह जांचें लाभकारी भी रहती हैं। उसे मालूम होता है कि वह पूर्णत: स्वस्थ है।
यदि आप भी हमारे अभियान का हिस्सा बनना चाहते हैं या फिर रक्तदान करना चाहते हैं तो मोबाइल नंबर 8954886438 पर संपर्क करें। अपना रजिस्ट्रेशन आज ही कराएं।
विज्ञापन
अमर उजाला के हमेशा ऐसे प्रयास रहे हैं और इस प्रकार के सार्थक कदम उठाए जाते रहे हैं। इस कड़ी में गत वर्ष अक्टूबर के महीने में जिला अस्पताल में रक्तदान शिविर का आयोजन किया था। खासकर युवा रक्तदाता जिस जोश के साथ आगे आए थे, उसने जिला अस्पताल के इतिहास में मील का पत्थर स्थापित किया था। करीब एक सैकड़ा के आसपास लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया था। इसमें तत्कालीन डीएम पी. गुरुप्रसाद और एसएसपी नीलाब्जा चौधरी ने भी अपना खून देकर रक्तदाताओं की हौसला अफजाई की थी। इसका सुखद पहलू यह रहा था कि गुजरे साल में अस्पताल प्रशासन को खून की कमी महसूस नहीं हुई। हर जरूरतमंद मरीज को वक्त पर सहूलियत मिली। गरीबों और जरूरतमंद लोगों ने हमारे सभी रक्तदाताओं को दुआ दी। साथ ही आत्म संतुष्टि मिली कि हमने किसी का जीवन बचाया। हमारे अभियान की सफलता में इस बार सहयोगी के तौर पर जी-माउंट लिट्रा स्कूल परिवार भी शामिल रहेगा।
विज्ञापन
------
14 जून को जरूर आइएगा
अमर उजाला एक फिर से 14 जून को ऐसे ही रक्तदान शिविर का आयोजन करने जा रहा है। जगह वहीं जिला अस्पताल का कैंपस होगा। हालांकि अभी गर्मी का जोर है। आने वाले दिनों में कुछ न कुछ राहत जरूर मिलेगी। फिर भी अस्पताल प्रशासन ने इस भीषण गर्मी को देखते हुए खास कदम उठाए हैं। पहले रक्तदान शिविर ब्लड बैंक परिसर में आयोजित हुआ था। इस बार रक्तदाताआें की सहूलियत के लिए यह जिला अस्पताल के प्रथम खंड में सीएमएस कक्ष के ठीक बगल स्थित हॉल (कमरा नंबर-135) में लगाया जाएगा। जहां एसी की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। अमर उजाला का प्रयास है कि इस महादान में हर एक स्वस्थ नागरिक की सहभागिता रहे। वह स्वप्रेरणा से उन लोगों के हित में रक्तदान करें, जो वक्त पर खून न मिलने पर हमारे आपके बीच से चले जाते हैं। यह प्रयास आप पाठकों के सहयोग से ही पूरी तरह सफल रहेगा। इसमें शक की कहीं कोई गुंजाइश नजर नहीं आती। और हां, अमर उजाला प्रेरणा के तौर पर आने दिनों में अपनी भूमिका अदा करता रहेगा। रक्तदान से होने वाले फायदों से लेकर तमाम भ्रमात्मक तथ्यों से पाठकों को आगाह भी करता रहेगा।
विज्ञापन
------
रक्तदान को चाहिए महज दस मिनट
इटावा। दान में वक्त नहीं लगता। जो ठान लेता है, वह करके रहता है। रक्तदान भी इतना ही सहज है। किसी मरीज को ब्लड चढ़ाने में बेशक कई घंटे लग सकते हैं। लेकिन रक्त देने में महज 10 मिनट का वक्त चाहिए होता है। खास बात यह कि इस छोटे से अंतराल में किन्हीं तीन व्यक्तियों की जान बचाई जा सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक यूनिट (350 एमएल) ब्लड को सेपरेटर मशीन के जरिए आरबीसी, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा में बांटा जा सकता है। जिस व्यक्ति को जिस पार्ट की जरूरत होती है, उसे वह पार्ट चढ़ा दिया जाता है।
------
शुद्ध ब्लड ही होता है स्वीकार
-ऐसा नहीं है कि बगैर जांच परख के ब्लड निकाल लिया जाता है। चिकित्सक बताते हैं कि व्यक्ति का ब्लड लेने से पूर्व उसकी पांच प्रकार की जांचें भी होती हैं। जिसमें एचआईवी, हैपेटाइटिस बी, हैपेटाइटिस सी, मलेरिया और बीडीआरएल (गुप्त रोग मसलन सिफलिस आदि) शामिल हैं। स्पष्ट है कि शुद्ध ब्लड ही स्वीकार किया जाता है। रक्तदान के लिए व्यक्ति का स्वस्थ होना जरूरी है। इसका आंकलन उसके हीमोग्लोबिन और बीपी चेक कर किया जाता है। आमतौर पर हीमोग्लोबिन 12-13 ग्राम पर्सेंट और नार्मल बीपी 80 से 120 होना चाहिए। रक्तदाता के लिए यह जांचें लाभकारी भी रहती हैं। उसे मालूम होता है कि वह पूर्णत: स्वस्थ है।
यदि आप भी हमारे अभियान का हिस्सा बनना चाहते हैं या फिर रक्तदान करना चाहते हैं तो मोबाइल नंबर 8954886438 पर संपर्क करें। अपना रजिस्ट्रेशन आज ही कराएं।