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मोक्षदायिनी यमुना को भी चाहिए एक भगीरथ
Etawah
Updated Sun, 08 Jun 2014 05:32 AM IST
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इटावा। आचमन मात्र से कभी भक्तों को मोक्ष देने वाली मोक्षदायिनी यमुना आज खुद मानव पीढ़ी से मोक्ष की दरकार कर रही है। यह वही यमुना है जिसका महत्व सनातन धर्म ग्रंथों में अंकित है। जहां-जहां भगवान श्रीकृष्ण की चर्चा हुई वहां-वहां यमुना के महत्व का भी वर्णन हुआ है। गंगा की तरह यमुना नदी भी खतरे में है। गंगा को तो भागीरथ के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सा भागीरथ मिल गया। गंगा को निर्मल और अविरल बनाने की कवायद भी शुरू हो गई है। अब यमुना भी मोदी जैसे भागीरथ की राह देख रही है। पता नहीं यमुना को कब और किस रूप में भागीरथ मिलेगा जिससे यमुना का जल भी प्राचीनकाल की तरह निर्मल और अविरल होगा। यमुना को निर्मल बनाने की जरूरत इसलिए भी है, क्योंकि संगम स्थल पर पहुंचकर यमुना खुद को गंगा नदी में ही समर्पित कर देती है। जब यमुना ही धारा ही स्वच्छ नहीं होगी तो गंगा का दामन साफ और स्वच्छ कैसे होगा। मथुरा सहित यमुना किनारे बसे धार्मिक स्थलों में खुशहाली आएगी।
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-साधु-संतों ने झोंकी ताकत
गोकुल में रहकर बाल्यावस्था में भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना की गोद में यमुना किनारे में कई प्रमुख लीलाएं की। सनातन धर्म में आज भी यमुना को पूजा जाता है। यमुना की निर्मलता को वापस लाने के लिए कई बार साधु-संतों के साथ आम लोगों ने कई आंदोलन किए। मथुरा के साथ ही जहां-जहां से यमुना गुजरी है साधु-संतों ने यमुना सफाई अभियान को लेकर जागरूकता यात्राएं निकालीं। नई दिल्ली में प्रदर्शन किया और यमुना सफाई के लिए कारगर नीति बनाए जाने की मांग की, लेकिन आज तक यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं बनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह गंगा सफाई को लेकर संजीदा है उससे यमुना में आस्था रखने वाले लोगों की भी उम्मीद जागी है। उन्हें उम्मीद है कि अभी नहीं तो देर सबेरे निश्चित ही मोक्षदायिनी यमुना को भी केंद्र सरकार की ओर से संजीवनी मिलेगी।
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-ये हैं यमुना के गुनहगार
-नई दिल्ली सहित आसपास के क्षेत्र में लगे कल कारखानों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी सीधे तौर पर यमुना में गिरता है। इससे यमुना का पानी दिनोंदिन विषैला हो रहा है।
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-नई दिल्ली में यमुना की धारा को रोके जाने के कारण पानी आगे नहीं बढ़ता है। दिल्ली से आगे जो पानी आता भी है वह काफी गंदा होता है।
-दिल्ली, आगरा, मथुरा या फिर हो इटावा सभी शहरों के गंदे नाले आज भी यमुना में सीधे गिर रहे हैं। इससे यमुना का पानी विषैला हो चला है।
-श्रद्धा के नाम पर हम लोग यमुना में गंदगी बहा रहे हैं। अंतिम संस्कार के नाम पर यमुना में शवों को बहाया जा रहा है।
-यमुना किनारे चल रहे धोबी घाट भी यमुना को गंदा कर रहे हैं। क्योंकि साबुन के रूप में केमिकल यमुना में सीधे बह रहा है।
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-अब तक के प्रयास
मोक्षदायिनी को संजीवनी देने के लिए अब तक जो भी प्रयास हुए वह नाकाफी साबित हुए हैं। जैसे शहरों से निकलने वाले गंदा पानी सीधे यमुना में न जाए इसके लिए जापान सरकार की मदद से लगभग हर शहर में यमुना एक्शन ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए गए। इटावा में नालों से करीब 30 एमएलडी पानी यमुना में पहुंचता है। ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता सिर्फ 13.5 एमएलडी है। इसके बाद 16.5 एमएलडी गंदा पानी सीधे यमुना में हररोज गिर रहा है।
-संसद में उठी मांग
वैेसे तो कई कद्दावर जनप्रतिनिधियों ने यमुना सफाई के लिए सरकार की ओर से ठोस प्रयास कराए जाने की वायदे किए। राज्यसभा सांसद बाबू दर्शन सिंह यादव ने यमुना की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए मनमोहन सरकार के समय यमुना उद्धार की मांग संसद में उठाई थी।
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-साधु-संतों ने झोंकी ताकत
गोकुल में रहकर बाल्यावस्था में भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना की गोद में यमुना किनारे में कई प्रमुख लीलाएं की। सनातन धर्म में आज भी यमुना को पूजा जाता है। यमुना की निर्मलता को वापस लाने के लिए कई बार साधु-संतों के साथ आम लोगों ने कई आंदोलन किए। मथुरा के साथ ही जहां-जहां से यमुना गुजरी है साधु-संतों ने यमुना सफाई अभियान को लेकर जागरूकता यात्राएं निकालीं। नई दिल्ली में प्रदर्शन किया और यमुना सफाई के लिए कारगर नीति बनाए जाने की मांग की, लेकिन आज तक यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं बनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह गंगा सफाई को लेकर संजीदा है उससे यमुना में आस्था रखने वाले लोगों की भी उम्मीद जागी है। उन्हें उम्मीद है कि अभी नहीं तो देर सबेरे निश्चित ही मोक्षदायिनी यमुना को भी केंद्र सरकार की ओर से संजीवनी मिलेगी।
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-ये हैं यमुना के गुनहगार
-नई दिल्ली सहित आसपास के क्षेत्र में लगे कल कारखानों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी सीधे तौर पर यमुना में गिरता है। इससे यमुना का पानी दिनोंदिन विषैला हो रहा है।
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-नई दिल्ली में यमुना की धारा को रोके जाने के कारण पानी आगे नहीं बढ़ता है। दिल्ली से आगे जो पानी आता भी है वह काफी गंदा होता है।
-दिल्ली, आगरा, मथुरा या फिर हो इटावा सभी शहरों के गंदे नाले आज भी यमुना में सीधे गिर रहे हैं। इससे यमुना का पानी विषैला हो चला है।
-श्रद्धा के नाम पर हम लोग यमुना में गंदगी बहा रहे हैं। अंतिम संस्कार के नाम पर यमुना में शवों को बहाया जा रहा है।
-यमुना किनारे चल रहे धोबी घाट भी यमुना को गंदा कर रहे हैं। क्योंकि साबुन के रूप में केमिकल यमुना में सीधे बह रहा है।
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-अब तक के प्रयास
मोक्षदायिनी को संजीवनी देने के लिए अब तक जो भी प्रयास हुए वह नाकाफी साबित हुए हैं। जैसे शहरों से निकलने वाले गंदा पानी सीधे यमुना में न जाए इसके लिए जापान सरकार की मदद से लगभग हर शहर में यमुना एक्शन ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए गए। इटावा में नालों से करीब 30 एमएलडी पानी यमुना में पहुंचता है। ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता सिर्फ 13.5 एमएलडी है। इसके बाद 16.5 एमएलडी गंदा पानी सीधे यमुना में हररोज गिर रहा है।
-संसद में उठी मांग
वैेसे तो कई कद्दावर जनप्रतिनिधियों ने यमुना सफाई के लिए सरकार की ओर से ठोस प्रयास कराए जाने की वायदे किए। राज्यसभा सांसद बाबू दर्शन सिंह यादव ने यमुना की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए मनमोहन सरकार के समय यमुना उद्धार की मांग संसद में उठाई थी।