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लाइन लॉस व चोरी से 10 करोड़ का नुकसान

Sun, 06 Apr 2014 05:30 AM IST
Etawah
Etawah Updated Sun, 06 Apr 2014 05:30 AM IST
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इटावा। लाइन लॉस और कटिया डालकर की जा रही बिजली चोरी विभाग पर बोझ बनती जा रही है। हर साल करीब 60 करोड़ रुपये के बिल जारी किए जा रहे हैं लेकिन वसूृली 50 करोड़ की हो पा रही है। विभाग क ो प्रतिवर्ष 10 करोड़ से भी अधिक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। जाहिर है कि यह नुकसान सरकार भी नहीं उठा रही है बल्कि ईमानदार उपभोक्ताओं से वसूला जा रहा है। सरकार हर साल बिजली के दाम बढ़ाकर जेब कतर लेती है। खास बात ये है कि विद्युत विभाग ने अवैध हुकिंग पर शिकंजा कसने के लिए कई बार रणनीति बनाई, लेकिन नतीजा कुछ निकलकर नहीं आया। शहर की बात की जाए तो कई इलाके ऐसे हैं जहां लोग खुले आम चोरी से बिजली जला रहें है। किंतु वोट बैंक की वजह से विद्युत विभाग के आला अधिकारी कार्रवाई क ी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
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साल में करीब दो करोड़ यूनिट बिजली खर्च होती है। इसका मूल्य 60 करोड़ से भी अधिक होता है। विभाग पूरा जोर लगाने के बाद 50 करोड़ रुपये ही वसूल पाता है। इससे हर साल विभाग को 10 करोड़ से अधिक का नुकसान होता है। सरकार यह घाटा पूरा करने के लिए बिजली के प्रति यूनिट दाम बढ़ा कर आम उपभोक्ता से वसूल करती है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, इटावा में 35 से 40 फीसदी बिजली बर्बाद हो रही है। इसमें 15 फीसदी तो लाइन लॉस हो रहा है जबकि 20 फीसदी बिजली चोरी से जलाई जा रही है। बिजली चोरी के लिए कुख्यात कुछ क्षेत्रों में तो केबलिंग करा दी गई है लेकिन इसके बाद भी केबिल को पंचर कर बिजली चोरी की जा रही है। अवैध हुकिंग हटाने के लिए तीन टीमें भी गठित की गईं थीं। आठ अप्रैल तक अभियान चलाया जाना था, लेकिन राजनैतिक कारणों से अभियान रोक दिया गया। कुछ इलाके तो ऐसे भी हैं जहां पर 70 फीसदी से अधिक लोग चोरी से बिजली जला रहे हैं लेकिन विभाग के अधिकारी वहां जाने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।
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गर्मी में सताएगी बिजली की किल्लत
भीषण गर्मी के मौसम में जब पारा चढ़कर 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है तब लाइन लॉस भी पांच फीसदी तक बढ़ जाता है। यानि अभी लाइन लॉस यदि 20 फीसदी है तो मई-जून के महीने में 25 तक पहुंच जाएगा। स्पष्ट है कि गर्मी के मौसम में बिजली की किल्लत के लिए तैयार रहना होगा। अधिकारियाें का कहना है कि गर्मी के मौसम में ट्रांसफार्मर और लाइनें हीट करती हैं और बिजली नष्ट होती है। ऐसा भीषण सर्दी के दौरान भी होता है ।
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प्लास्टिक केबिल से रुकेगा लाइन लॉस
खुली लाइनों की अपेक्षा प्लास्टिक केबिल डालने से लाइन लॉस के साथ बिजली की चोरी भी रुकेगी। लाइनों पर प्लास्टिक का कवर चढ़ा होने से लॉस कम होगा। आसानी से बिजली की चोरी भी नहीं की जा सकेगी। अधिकारियों की योजना लाइन लॉस और चोरी 40 से घटा कर 15 फीसदी तक लाने की है। प्लास्टिक की केबिल के साथ मॉडम भी लगाए जाने हैं।

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वर्जन
प्रतिवर्ष करीब 60 करोड़ रुपये की बिलिंग होती है, जबकि वसूली 50 करोड़ की ही हो पाती है। बिजली की चोरी रोकने के लिए टीम गठित हैं। समय-समय पर कार्रवाई भी होती है। कुछ इलाक ों में प्लास्टिक की केबिल भी डाली गई है। हमारा लक्ष्य लाइन लॉस 15 फीसदी तक लाने का है।
-राजीव ग्रोवर
एक्सईएन, विद्युत विभाग
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