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दो घंटे में होगी टीबी की जांच
Updated Sun, 01 Apr 2018 12:19 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सैफई।
टीबी के जीवाणुओं की जांच अब केवल दो घंटे में की जा सकेगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अंर्तगत संचालित नवनिर्मित जीन एक्सपर्ट व सीबी नॉट (ट्यूबरकुलोसिस जांच) मशीन का लोकार्पण विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ब्रिगे टी प्रभाकर ने किया।
कुलपति ने बताया कि ट्यूबरकुलोसिस के जीवाणुओं की जांच पहले कल्चर विधि से न्यूनतम दो से तीन माह में होती थी। इस मशीन से विश्वविद्यालय में आने वाले मरीजों को मुफ्त में बेहद ही कम समय में पल्मोनरी एवं एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के जांच के साथ एमडीआर टीबी की जांच हो सकेगी। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि जीन एक्सपर्ट या सीबी नॉट मशीन के लगने से बेहद खतरनाक एमडीआर एवं एक्सडीआर टीबी के सालाना भार को कम किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि संबधित मशीन ने टीबी जीवाणु की जांच आसानी से की जा सकती है।
लैब के प्रभारी डॉ. अमित सिंह व विश्वविद्यालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आदेश कुमार ने बताया कि संबंधित मशीन पर कार्य करने के लिए डॉ. मनोज कुमार राना व प्रियम मौर्य को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। डॉ. आदेश ने बताया कि संबंधित मशीन पूरी तरह अत्याधुनिक तथा स्वचालित है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रतिकुलपति डॉ. रमाकांत यादव, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आदेश कुमार. कम्युनिटी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष एवं कुलसचिव डॉ. पीके जैन, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. हरनाम सिंह, डॉ. अमित सिंह आदि उपस्थित रहे।
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सैफई।
टीबी के जीवाणुओं की जांच अब केवल दो घंटे में की जा सकेगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अंर्तगत संचालित नवनिर्मित जीन एक्सपर्ट व सीबी नॉट (ट्यूबरकुलोसिस जांच) मशीन का लोकार्पण विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ब्रिगे टी प्रभाकर ने किया।
कुलपति ने बताया कि ट्यूबरकुलोसिस के जीवाणुओं की जांच पहले कल्चर विधि से न्यूनतम दो से तीन माह में होती थी। इस मशीन से विश्वविद्यालय में आने वाले मरीजों को मुफ्त में बेहद ही कम समय में पल्मोनरी एवं एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के जांच के साथ एमडीआर टीबी की जांच हो सकेगी। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि जीन एक्सपर्ट या सीबी नॉट मशीन के लगने से बेहद खतरनाक एमडीआर एवं एक्सडीआर टीबी के सालाना भार को कम किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि संबधित मशीन ने टीबी जीवाणु की जांच आसानी से की जा सकती है।
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लैब के प्रभारी डॉ. अमित सिंह व विश्वविद्यालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आदेश कुमार ने बताया कि संबंधित मशीन पर कार्य करने के लिए डॉ. मनोज कुमार राना व प्रियम मौर्य को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। डॉ. आदेश ने बताया कि संबंधित मशीन पूरी तरह अत्याधुनिक तथा स्वचालित है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रतिकुलपति डॉ. रमाकांत यादव, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आदेश कुमार. कम्युनिटी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष एवं कुलसचिव डॉ. पीके जैन, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. हरनाम सिंह, डॉ. अमित सिंह आदि उपस्थित रहे।
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