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चेकडैम की सीट टूटने से माइनरों में नहीं पहुंचा पानी
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बसरेहर। प्रखंड निचली गंगा नहर पर बसगंवा के पास चेकडैम की सीट टूटने से कुलावा व माइनरों पानी नहीं पहुंच रहा है। इससे हजारों एकड़ जमीन असिंचित है। किसानों ने इसको लेकर नाराजगी जताई है।
स्वदेश यादव, तिलक सिंह यादव, उदयप्रताप यादव, शिवनाथ सिंह, विकास, प्रमोद कुमार, छोटेलाल, भूप सिंह आदि ने बताया कि सन 1904 में अंग्रेज शासनकाल में किसानों की सुविधा के लिए चेकडैम का निर्माण कराया गया था। इसकी देखरेख के लिए बेलदारों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तीस साल से बेलदारों की पोस्ट ही समाप्त कर दी गई। जिन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई, वे अपने कर्तव्य का पालन करने में असमर्थ दिखाई दिए।
यही कारण है कि चेकडैम को सफाई का ठेका लेने वालों ने चेकडैम की सीट को तोड़ दिया। इसके कारण ऊपरी जमीन की सिंचाई के लिए पानी कुलावा व माइनरों में पानी न पहुंचने के कारण लगभग बीस पचीस गांव की हजारों एकड़ जमीन सिंचाई से वंचित रह जाती है।
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किसानों ने बताया कि पानी रोकने के लिए लगे चैनल ज्यादातर लोगों ने चोरी कर लिए है। इसके कारण नहर के पानी का बहाव सीधा हो गया। इसके कारण कुलावा और माइनरों में पानी नहीं पहुंचता है। हम लोग अपने-अपने संसाधनों से खेतों पानी की व्यवस्था करते हैं। लगान के नाम पर हम पर हर साल हजारों रुपये वसूल किए जाते हैं।
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स्वदेश यादव, तिलक सिंह यादव, उदयप्रताप यादव, शिवनाथ सिंह, विकास, प्रमोद कुमार, छोटेलाल, भूप सिंह आदि ने बताया कि सन 1904 में अंग्रेज शासनकाल में किसानों की सुविधा के लिए चेकडैम का निर्माण कराया गया था। इसकी देखरेख के लिए बेलदारों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तीस साल से बेलदारों की पोस्ट ही समाप्त कर दी गई। जिन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई, वे अपने कर्तव्य का पालन करने में असमर्थ दिखाई दिए।
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यही कारण है कि चेकडैम को सफाई का ठेका लेने वालों ने चेकडैम की सीट को तोड़ दिया। इसके कारण ऊपरी जमीन की सिंचाई के लिए पानी कुलावा व माइनरों में पानी न पहुंचने के कारण लगभग बीस पचीस गांव की हजारों एकड़ जमीन सिंचाई से वंचित रह जाती है।
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किसानों ने बताया कि पानी रोकने के लिए लगे चैनल ज्यादातर लोगों ने चोरी कर लिए है। इसके कारण नहर के पानी का बहाव सीधा हो गया। इसके कारण कुलावा और माइनरों में पानी नहीं पहुंचता है। हम लोग अपने-अपने संसाधनों से खेतों पानी की व्यवस्था करते हैं। लगान के नाम पर हम पर हर साल हजारों रुपये वसूल किए जाते हैं।