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जन सेवा केंद्रों पर कोई दूसरा न मिले अजमल
Updated Tue, 20 Nov 2018 11:48 PM IST
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इटावा। औरैया में अजमल के नाम से फर्जी प्रमाण पत्र जारी होने का मामला सामने आने पर प्रशासन सतर्क है। ऐसे मामले न हो एहतियात के तौर पर डीएम के निर्देश पर मंगलवार को सदर तहसीलदार एन राम ने जनसेवा केंद्रों के कंप्यूटर खंगाले। आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र के आए आवेदनों के मूल कागजात देखे। हालांकि इस जांच पड़ताल में कोई गलत तथ्य हाथ नहीं लगे।
औरैया जिले में आतंकी अजमल कसाब के नाम से निवास प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसे संज्ञान में लेकर औरैया प्रशासन ने इसकी जांच कराई तो अजमल नाम से जो निवास प्रमाण पत्र जारी हुआ। वह पता फर्जी पाया गया। इस तरह के फर्जी निवास प्रमाण पत्र इस जिले से तो जारी नहीं हुए हैं। इसका पता लगाने के लिए डीएम सेल्वाकुमारी जे ने जन सेवा केंद्रों की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
इसी सिलसिले में मंगलवार को सदर तहसीलदार एन राम ने नगर स्थित जन सेवा केंद्रों का रुख किया। उन्होंने पक्का तालाब व तहसील बाजार स्थित जन सेवा केंद्रों में जाकर जांच की। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र बनवाने में संलग्न पहचान पत्रों का मिलान किया। आवेदकों की फोटो की भी जांच की। कंप्यूटर में उपलब्ध डाटा चेक किया। इसके अलावा मौजूद आवेदकों के कागजात देखे। जिसमें कोई गलत तथ्य सामने नहीं आए।
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उन्होंने बताया कि जन सेवा केंद्र संचालकों को आगाह किया गया है कि वह ऑनलाइन आवेदन करते समय आवेदक के मूल प्रमाण पत्र अवश्य देख लें। किसी भी प्रकार की गलती न करें। अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने केंद्र संचालकों से निर्धारित शुल्क 20 रुपये से अधिक न वसूलने की भी हिदायत दी।
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औरैया जिले में आतंकी अजमल कसाब के नाम से निवास प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसे संज्ञान में लेकर औरैया प्रशासन ने इसकी जांच कराई तो अजमल नाम से जो निवास प्रमाण पत्र जारी हुआ। वह पता फर्जी पाया गया। इस तरह के फर्जी निवास प्रमाण पत्र इस जिले से तो जारी नहीं हुए हैं। इसका पता लगाने के लिए डीएम सेल्वाकुमारी जे ने जन सेवा केंद्रों की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
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इसी सिलसिले में मंगलवार को सदर तहसीलदार एन राम ने नगर स्थित जन सेवा केंद्रों का रुख किया। उन्होंने पक्का तालाब व तहसील बाजार स्थित जन सेवा केंद्रों में जाकर जांच की। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र बनवाने में संलग्न पहचान पत्रों का मिलान किया। आवेदकों की फोटो की भी जांच की। कंप्यूटर में उपलब्ध डाटा चेक किया। इसके अलावा मौजूद आवेदकों के कागजात देखे। जिसमें कोई गलत तथ्य सामने नहीं आए।
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उन्होंने बताया कि जन सेवा केंद्र संचालकों को आगाह किया गया है कि वह ऑनलाइन आवेदन करते समय आवेदक के मूल प्रमाण पत्र अवश्य देख लें। किसी भी प्रकार की गलती न करें। अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने केंद्र संचालकों से निर्धारित शुल्क 20 रुपये से अधिक न वसूलने की भी हिदायत दी।