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प्रशासन व व्यापारियों के बीच गतिरोध बरकरार
Updated Fri, 19 Jan 2018 10:56 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
इटावा। नवीन मंडी में 43 दुकानों के आवंटन के लिए आंदोलनरत व्यापारी अब आरपार की लड़ाई छेड़ने जा रहे हैं। इस संबंध में शुक्रवार को व्यापारियों ने 21 तक दुकानें न आवंटित होने पर 22 जनवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।
मालूम हो कि पिछले दिनों सिटी मजिस्ट्रेट शमशाद हुसैन ने नवीन मंडी की 44 खाली करवा कर मंडी सचिव के हवाले कर दिया था। इन दुकानों पर बगैर आवंटन के व्यापारी कब्जा किए हुए थे। कब्जे से मुक्त होने के बाद मंडी सचिव ने दुकानों पर ताले डलवा दिए थे। इसके बाद इन दुकानों के आवंटन के लिए नामांकन प्रक्रिया श्ुारू हो गई है। इसके बीच व्यापारियों का कहना है कि वह काफी समय से इन दुकानों से व्यापार कर रहे है।
उन्हाेंने दुकान के आवंटन के लिए पांच पांच हजार रुपये भी जमा कर दिए थे। उनका कहना है कि जो बाकी पैसा है, वह जमा करने को तैयार है। लेकिन प्रशासन उनकी रोजी-रोटी छीन रहा है। गुरुवार को जुलूस निकालकर मंडी सचिव को ज्ञापन भी दिया गया। उधर, मंडी सचिव आशीष कुमार का कहना है कि 2011 की आवंटन प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया था। उसके बाद फिर से आवंटन प्रक्रिया शुरू की गई है। आवंटन में भाग लेने के लिए फार्मों की बिक्री की जा रही है। अब तक 56 फार्म बिक चुके है तथा 14 लोगों के फार्म जमा भी हो चुके है। आवंटन के बारे में मंडी निदेशक ही विचार कर सकते है, उनके 21 जनवरी को आने की उम्मीद है।
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- नवीन मंडी की 43 दुकानों की नीलामी का विरोध
- पूर्व में काबिज व्यापारी चाहते है उनको मिले दुकानें
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इटावा। नवीन मंडी में 43 दुकानों के आवंटन के लिए आंदोलनरत व्यापारी अब आरपार की लड़ाई छेड़ने जा रहे हैं। इस संबंध में शुक्रवार को व्यापारियों ने 21 तक दुकानें न आवंटित होने पर 22 जनवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।
मालूम हो कि पिछले दिनों सिटी मजिस्ट्रेट शमशाद हुसैन ने नवीन मंडी की 44 खाली करवा कर मंडी सचिव के हवाले कर दिया था। इन दुकानों पर बगैर आवंटन के व्यापारी कब्जा किए हुए थे। कब्जे से मुक्त होने के बाद मंडी सचिव ने दुकानों पर ताले डलवा दिए थे। इसके बाद इन दुकानों के आवंटन के लिए नामांकन प्रक्रिया श्ुारू हो गई है। इसके बीच व्यापारियों का कहना है कि वह काफी समय से इन दुकानों से व्यापार कर रहे है।
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उन्हाेंने दुकान के आवंटन के लिए पांच पांच हजार रुपये भी जमा कर दिए थे। उनका कहना है कि जो बाकी पैसा है, वह जमा करने को तैयार है। लेकिन प्रशासन उनकी रोजी-रोटी छीन रहा है। गुरुवार को जुलूस निकालकर मंडी सचिव को ज्ञापन भी दिया गया। उधर, मंडी सचिव आशीष कुमार का कहना है कि 2011 की आवंटन प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया था। उसके बाद फिर से आवंटन प्रक्रिया शुरू की गई है। आवंटन में भाग लेने के लिए फार्मों की बिक्री की जा रही है। अब तक 56 फार्म बिक चुके है तथा 14 लोगों के फार्म जमा भी हो चुके है। आवंटन के बारे में मंडी निदेशक ही विचार कर सकते है, उनके 21 जनवरी को आने की उम्मीद है।
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- पूर्व में काबिज व्यापारी चाहते है उनको मिले दुकानें