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यशोदा बन लुटा रहीं बेटी पर दुलार

Sat, 13 May 2017 11:09 PM IST
Updated Sat, 13 May 2017 11:09 PM IST
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yashoda ban luta raheen betee par dulaar
बेटी के साथ संगीता - फोटो : amar ujala
 हर किसी के जीवन में मां की एक खास जगह होती है। इसे और कोई नहीं ले सकता। वहीं जिले में ऐसी भी कई मां हैं, जिन्होंने अनाथ बेटियों को गोद लेकर समाज के लिए मिसाल कायम की। बेटियों ने भले ही उनकी कोख से जन्म नहीं लिया। पर, वे यशोदा बनीं उन्हीं पर अपना सारा प्यार, दुलार लुटा रहीं हैं। इन महिलाओं ने अपनी इन बेटियों को पालने-पोसने, शादी के ही नहीं अफसर बेटिया बनाने तक के ख्बाव संजोए हैं।
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ऐसी ही मां हैं शहर के अहाता भन्नामल निवासी संगीता जैन। कुछ महीने पहले वे फिरोजाबाद गईं थी। वहां पता चला कि एक गरीब परिवार में बेटी के जन्म को लेकर तनातनी है। वे परिवार में पहुंची। बेटी के जन्म को लेकर कुनबा परेशान था। संगीता ने खुद जिम्मेदारी उठाने का संकल्प ले लिया। तीन दिन की बेटी को लेकर वे एटा आ गईं। आज उनकी वह बेटी प्रिंसी तीन महीने की हो गई है। संगीता उसे सगी मां से बढ़कर प्यार और दुलार करती हैं। संगीता का ख्वाह है कि प्रिंसी डॉक्टर बने।  
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वहीं पीपल अड्डा निवासी सरस्वती ने भी एक अनाथ बेटी को गोद लेकर मां शब्द को नया आयाम दिया है। सरस्वती के पास पहले से दो बेटे हैं। कहती हैं कि बेटी से ही घर की रौनक है। इसीलिए उन्होंने बेटी को गोद लिया। पांच साल की बिटिया अंशिका आज उनकी आंख का तारा है। बताया कि आज भी समाज की सोच बेटियों को लेकर अलग है। इसे बदलने की जरूरत है।
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कई और ने भी बदली जिंदगी
जिले में संगीता और सरस्वती जैसी कई और भी मां हैं, जिन्होंने अनाथ बच्चों को सहारा देकर उनकी जिंदगी बदली है। महिलाओं की इस बदलती सोच ने मां और बेटी के रिश्तों को नई परिभाषा गढ़ी है। परिवार परामर्श केंद्र की काउंसलर डा. श्यामलता वेद कहती हैं कि मां-बेटी का रिश्ता बेहद खास होता है। बदली सोच समाज को नई दिशा  देने वाली है।
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