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चलो रे सखियां चलो, हिमालय के द्वारे आज
अमर उजाला ब्यूरो एटा
Updated Wed, 28 Sep 2016 11:25 PM IST
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चलो रे सखियां चलो, हिमालय के द्वारे आज
- फोटो : अमर उजाला
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श्री रामलीला कमेटी द्वारा मंगलवार की शाम रामलीला मंच का पूजन हुआ। इसके बाद मथुरा के कलाकारों ने शिव पार्वती विवाह, नारद मोह भंग, मनु सतरूपा तप एवं वरदान आदि लीलाओं का मंचन किया।
पुरोहित ओमप्रकाश पाठक, भरत गौतम ने मंच पूजा कराई इसके बाद शिव पार्वती के स्वरूपों का पंडाल में विवाह कराया गया। इस दौरान पूरा पंडाल जयकारों से गुंजायमान हो उठा। वहीं नारद मोह भंग की लीला का मंचन करते हुए दिखाया कि नारद ने जब अपनी तपस्या से कामदेव को जीता तो उन्हें स्वयं पर अहंकार हो गया। भगवान शिव के मना करने पर भी नारद अपने मद में भगवान विष्णु के पास पहुंच गए, जब भगवान विष्णु को पता लगा कि उनके भक्त अहंकार हो गया, तो इसे दूर करने के लिए भगवान ने लीला दिखाई। माया के प्रभाव से राजा शीलनिधि ने अपनी कन्या विश्व मोहिनी के विवाह की सोची। नारद ने भी विश्वमोहिनी से विवाह करने का मन किया और भगवान से अपने जैसा सुंदर रूप देने की इच्छा जताई। भगवान ने नारद को बंदर का रूप दे दिया। राजाओं के बीच नारद मुनि भी विश्वमोहिनी के स्वयंवर में पहुंचे। पर, विश्वमोहिनी ने नारद के बजाय भगवान को अपना वर चुना। इस पर नारद ने भगवान को पत्नी वियोग का श्राप दे दिया। कलाकारों ने मनु-सतरूपा प्रसंग का भी मंचन प्रस्तुत किया। मौके पर कमेटी के अध्यक्ष अमित बाबा, सुभाष चंद्र गर्ग, गोपाल मराठा, रोबिन साहू, पूणेंद्र सोलंकी, अखिलेश अग्रवाल, अजय तिवारी, अशोक अग्रवाल, रमेश साहू, राजीव वर्मा, विशाल मिश्रा, सुनील गुप्ता, मोनू कुदेशिया, किशु वार्ष्णेय, कुश बिड़ला आदि मौजूद रहे।
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पुरोहित ओमप्रकाश पाठक, भरत गौतम ने मंच पूजा कराई इसके बाद शिव पार्वती के स्वरूपों का पंडाल में विवाह कराया गया। इस दौरान पूरा पंडाल जयकारों से गुंजायमान हो उठा। वहीं नारद मोह भंग की लीला का मंचन करते हुए दिखाया कि नारद ने जब अपनी तपस्या से कामदेव को जीता तो उन्हें स्वयं पर अहंकार हो गया। भगवान शिव के मना करने पर भी नारद अपने मद में भगवान विष्णु के पास पहुंच गए, जब भगवान विष्णु को पता लगा कि उनके भक्त अहंकार हो गया, तो इसे दूर करने के लिए भगवान ने लीला दिखाई। माया के प्रभाव से राजा शीलनिधि ने अपनी कन्या विश्व मोहिनी के विवाह की सोची। नारद ने भी विश्वमोहिनी से विवाह करने का मन किया और भगवान से अपने जैसा सुंदर रूप देने की इच्छा जताई। भगवान ने नारद को बंदर का रूप दे दिया। राजाओं के बीच नारद मुनि भी विश्वमोहिनी के स्वयंवर में पहुंचे। पर, विश्वमोहिनी ने नारद के बजाय भगवान को अपना वर चुना। इस पर नारद ने भगवान को पत्नी वियोग का श्राप दे दिया। कलाकारों ने मनु-सतरूपा प्रसंग का भी मंचन प्रस्तुत किया। मौके पर कमेटी के अध्यक्ष अमित बाबा, सुभाष चंद्र गर्ग, गोपाल मराठा, रोबिन साहू, पूणेंद्र सोलंकी, अखिलेश अग्रवाल, अजय तिवारी, अशोक अग्रवाल, रमेश साहू, राजीव वर्मा, विशाल मिश्रा, सुनील गुप्ता, मोनू कुदेशिया, किशु वार्ष्णेय, कुश बिड़ला आदि मौजूद रहे।
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