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Etah News: पांच वर्ष से बटेश्वर के मंदिर में कांवड़ चढ़ा रहीं तीन सगी बहनें

Sat, 08 Aug 2026 11:30 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Updated Sat, 08 Aug 2026 11:30 PM IST
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Three sisters have been offering Kanwar at the Bateshwar temple for five years.
कासगंज रोड पर कांवड़ भरकर ले जाती तीन बहनें। संवाद
मिरहची। सावन माह में कांवड़ चढ़ाने वालों में महिलाएं और बालिकाएं भी पीछे नहीं हैं। बटेश्वर की तीन सगी बहनें पांच वर्ष से सोरों से कांवड़ भरकर बटेश्वर के शिव मंदिर पर गंगाजल अर्पित कर रही हैं। इन बालिकाओं की बचपन से भगवान शिव में विशेष आस्था है। बालिकाओं को पैदल कांवड़ ले जाते देख क्षेत्र के लोग उनकी प्रशंसा कर रहे हैं।
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बटेश्वर के हरप्रसाद ने बताया बड़ी बेटी अंजलि (14) हाईस्कूल की छात्रा है। दो अन्य बेटियां अनीता और आरती जुड़वां हैं। अंजलि की बचपन से ही भगवान भोलेनाथ में विशेष आस्था है। अंजलि की भक्ति को देख उसकी दोनों छोटी बहनें भी भगवान शिव की भक्त हो गई। पांच वर्ष पहले अंजलि ने सोरों से कांवड़ लाने की जिद की थी। उसकी जिद में दोनों जुड़वां बहनों ने भी साथ दिया। उस समय अंजलि छोटी थी, इसलिए वह तीनों बहनों के साथ सोरों आकर कांवड़ में गंगाजल लेकर चल दिए। तीनों बहनों ने पूरे रास्ते कांवड़ नहीं दी और बटेश्वर तक खुद कांवड़ लेकर पहुंची। तब से सावन मास में कांवड़ चढ़ाने का यह सिलसिला निरंतर जारी है और तीनों बेटियां इस दफा पांचवी बार कांवड़ लेकर बटेश्वर के शिव मंदिर में जलाभिषेक करेंगी।
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भोलेनाथ का जयकारा लगाते ही दूर हो जाती है थकान
तीनों बहनों ने कहा भाेलेनाथ का जयकारा लगाते ही सारी थकान दूर हो जाती है। रास्ते में कांवड़ लेकर जा रहे भक्तों के साथ जयकारा लगाते हुए चलते समय दूरी का पता ही नहीं चलता। कांवड़ उठाने के बाद सिर्फ लक्ष्य दिमाग में रहता है। भगवान शिव के आशीर्वाद से कदम अपने आप आगे बढ़ते रहते हैं।
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झूला कांवड़ बनी आकर्षण का केंद्र, देखने को उमड़ी भीड़
मारहरा। सावन माह में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त अनेक प्रकार के प्रयास कर रहे हैं। कस्बे से शुक्रवार मध्यरात्रि आकर्षक झूला कांवड़ यात्रा निकली। इसे देखने केलिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। झूला कांवड़ लेकर निकल रहे भोले के भक्त मुकेश शर्मा ने बताया कि वह आगरा की टेढ़ी बगिया के निवासी हैं, जो साथियों के साथ कांवड़ लेकर जा रहे हैं। 51 किलो की कांवड़ में छह लीटर गंगाजल है। दो बांस पर कांवड़ को झूले की तरह सफेद कपड़े से सजाया गया था, जिस पर चित्रकारी कर खोपड़ी बनाई गई। श्रद्धालुओं ने सभी कांवड़ यात्रियों को विश्राम कराकर जलपान कराकर विदा किया।




भक्ति के पथ पर बढ़ रहे भोले के भक्तों के कदम
एटा। सावन मास के दूसरे सोमवार पर जलाभिषेक के लिए कांवड़ियाें को जोश देखते ही बन रहा है। बारिश हो या धूप कांवड़ियों के कदम जज्बे के साथ गंतव्य की तरफ बढ़ रहे हैं। शनिवार को राजस्थान और मध्य प्रदेश, आगरा, फिरोजाबाद समेत विभिन्न कस्बों के आरोगांवों व कस्बों के सैकड़ों कांवड़ियों ने गंगा घाटों से धार्मिक अनुष्ठान पूरे कर गंगाजल भरकर अपने-अपने गंतव्य की ओर शहर से बम-बम भोले के जयकारों के साथ रातभर गुजर रहे।
शनिवार दोपहर को तेज बारिश में भी उनके कदमों को धीमा न कर सकी शिव भक्त भोले के जयकारों व डीजे की गूंज पर उतनी भी फुर्ती से अपने कदम आगे बढ़ाते दिखे। पूरे मार्ग पर बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज रहे थे। मध्य प्रदेश मुरैना जा रही कांवड़ियों की 20 सदस्यीय टोली सावन मास की द्वादशी को अपने गांव पहुंचकर शिवालय में गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करेगी। टोली के सदस्य सुकेश शर्मा ने बताया कि उनकी यात्रा करीब 200 किलोमीटर लंबी है। वह प्रतिदिन 50 से 60 किलोमीटर की दूरी तय करने का लक्ष्य रखा है।
कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु निर्धारित दूरी पर कंधे बदलते हैं लेकिन आस्था और नियम के चलते कांवड़ को जमीन पर नहीं रखते। पूरी यात्रा में कांवड़ को सुरक्षित और पवित्र बनाए रखने के लिए विशेष सावधानी बरती जाती है। राजस्थान से आए श्रद्धालु कामता प्रसाद ने बताया कि उनका दल हर वर्ष सावन मास में लहरा घाट से गंगाजल लेने आता है। कहा कि महादेव और मां गंगा के प्रति उनकी गहरी आस्था है।

इसी विश्वास के साथ वे हर साल कठिन पदयात्रा पूरी करते हैं। श्रद्धालु हरवीर सिंह ने बताया कि लंबी दूरी की यात्रा होने के बावजूद टोली के सदस्यों में उत्साह बना रहता है। रास्ते में कांवड़ को कंधे पर लेकर तय दूरी पूरी की जाती है और इसे कहीं जमीन पर नहीं रखा जाता। उनका कहना है कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से यात्रा सफलतापूर्वक पूरी होने का विश्वास है।

कासगंज रोड पर कांवड़ भरकर ले जाती तीन बहनें। संवाद

कासगंज रोड पर कांवड़ भरकर ले जाती तीन बहनें। संवाद

कासगंज रोड पर कांवड़ भरकर ले जाती तीन बहनें। संवाद

कासगंज रोड पर कांवड़ भरकर ले जाती तीन बहनें। संवाद

कासगंज रोड पर कांवड़ भरकर ले जाती तीन बहनें। संवाद

कासगंज रोड पर कांवड़ भरकर ले जाती तीन बहनें। संवाद

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