{"_id":"d01994a941b929ba5c1d537571239a08","slug":"the-report-sent-to-government-action-dysfunction-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कार्य में शिथिलता की रिपोर्ट शासन को भेजी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कार्य में शिथिलता की रिपोर्ट शासन को भेजी
ब्यूरो अमर उजाला कासगंज
Updated Sat, 13 Dec 2014 11:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कासगंज जिले में चल रहे निर्माण कार्यों की शिथिलता किसी से छिपी नहीं है। जिला चिकित्सालय में चल रहे निर्माण में भी धीमी गति से कार्य चल रहा है। निर्माणदायी संस्थाओं को हाईकोर्ट के निर्णय का भी खौफ नहीं है और न ही जिला प्रशासन की चिंता से सरोकार। शिथिलता को लेकर उच्च अधिकारी भी बराबर शासन को अपनी रिपोर्ट भेजकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो रहे है। जिला चिकित्सालय के निर्माण की धीमी गति एवं गुणवत्ता को लेकर डीएम ने चेतावनी दी है, वहीं, सीएमओ ने शासन को पत्र भेजकर निर्माण कार्य पर असंतोष जाहिर किया गया है।
गौरतलब हो कि जिला चिकित्सालय निर्माण कार्य गत वर्ष से चल रहा है। जुलाई माह में यह निर्माण कार्य शुरू हुआ था और जिला चिकित्सालय परिसर में ही 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। उस समय निर्माण की गति तेजी पर थी, लेकिन बाद में यह गति भी धीमी होती चली गई। जिला चिकित्सालय के निर्माण का जिम्मा सीएनडीएस की यूनिट 25 को दिया गया है।
निर्माण शुरू होेने के समय साढ़े पांच करोड़ रुपये निर्माणदायी संस्था को दिए गए थे। इसके बाद सवा दस करोड़ रुपये अक्तूबर माह में निर्माण के लिए दिए गए है शुक्रवार को जब जिला चिकित्सालय में निर्माण की स्थिति को देखा गया तो 35 से 40 श्रमिक ही कार्य पर लगे हुए दिखे। कोई अधिकारी एवं अभियंता भी मौके पर मौजूद नहीं था। अभी तक बाउंड्रीवाल के अलावा पोस्टमार्टम भवन और नर्स हास्टल का निर्माण हुआ है, लेकिन तमाम कार्य इन दोनों भवनों के अवशेष है। यदि निर्माण में यही शिथिलता बनी रही तो निर्धारित समय में कार्य का पूरा हो पाना असंभव है। जबकि जिला चिकित्सालय के निर्माण का लक्ष्य जून 2015 का है। ऐसे कैसे निर्धारित समय सीमा में निर्माण पूरा होगा कुछ कहा नहीं जा सकता।
विज्ञापन
निर्माण की कोई प्रगति नहीं है। कार्यदायी संस्था को डीएम के माध्यम से पत्र प्रेषित किया गया है। शासन को भी शिथिलता की रिपोर्ट भेजी है। अब तक सिर्फ 30 प्रतिशत ही कार्य हो सका है।
- डा. सत्य सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी
सीएनडीएस के प्रोजेक्ट मैनेजर विक्रम सिंह का कहना है कि निर्माण की गुणवत्ता में जांच लगातार एएमयू से कराई जा रही है लेकिन अप्रैल से पैसा खत्म हो जाने के बाद निर्माण का कार्य रुक गया। अक्तूबर माह में पुन: धन प्राप्त हुआ इसके बाद निर्माण ने गति पकड़ी है।
विज्ञापन
गौरतलब हो कि जिला चिकित्सालय निर्माण कार्य गत वर्ष से चल रहा है। जुलाई माह में यह निर्माण कार्य शुरू हुआ था और जिला चिकित्सालय परिसर में ही 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। उस समय निर्माण की गति तेजी पर थी, लेकिन बाद में यह गति भी धीमी होती चली गई। जिला चिकित्सालय के निर्माण का जिम्मा सीएनडीएस की यूनिट 25 को दिया गया है।
विज्ञापन
निर्माण शुरू होेने के समय साढ़े पांच करोड़ रुपये निर्माणदायी संस्था को दिए गए थे। इसके बाद सवा दस करोड़ रुपये अक्तूबर माह में निर्माण के लिए दिए गए है शुक्रवार को जब जिला चिकित्सालय में निर्माण की स्थिति को देखा गया तो 35 से 40 श्रमिक ही कार्य पर लगे हुए दिखे। कोई अधिकारी एवं अभियंता भी मौके पर मौजूद नहीं था। अभी तक बाउंड्रीवाल के अलावा पोस्टमार्टम भवन और नर्स हास्टल का निर्माण हुआ है, लेकिन तमाम कार्य इन दोनों भवनों के अवशेष है। यदि निर्माण में यही शिथिलता बनी रही तो निर्धारित समय में कार्य का पूरा हो पाना असंभव है। जबकि जिला चिकित्सालय के निर्माण का लक्ष्य जून 2015 का है। ऐसे कैसे निर्धारित समय सीमा में निर्माण पूरा होगा कुछ कहा नहीं जा सकता।
विज्ञापन
निर्माण की कोई प्रगति नहीं है। कार्यदायी संस्था को डीएम के माध्यम से पत्र प्रेषित किया गया है। शासन को भी शिथिलता की रिपोर्ट भेजी है। अब तक सिर्फ 30 प्रतिशत ही कार्य हो सका है।
- डा. सत्य सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी
सीएनडीएस के प्रोजेक्ट मैनेजर विक्रम सिंह का कहना है कि निर्माण की गुणवत्ता में जांच लगातार एएमयू से कराई जा रही है लेकिन अप्रैल से पैसा खत्म हो जाने के बाद निर्माण का कार्य रुक गया। अक्तूबर माह में पुन: धन प्राप्त हुआ इसके बाद निर्माण ने गति पकड़ी है।