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विलुप्त हो चुकी काक नदी को मिलेगा पुनर्जीवन

Thu, 24 Mar 2022 11:37 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 24 Mar 2022 11:37 PM IST
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The extinct Kak river will get revived
एटा। जिले में काक नदी लगभग विलुप्त हो गई है। इसका अस्तित्व एक-दो स्थानों पर नाले के रूप में रह गया है। इसको पुनर्जीवन देने का खाका खींचा गया है। सिंचाई विभाग और मनरेगा मिलकर इस पर काम करेंगे। करीब 19.60 लाख रुपये से सिल्ट सफाई आदि का काम कराया जाएगा।
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करीब 20 साल पहले तक इस नदी में पानी का बहाव अच्छा था। सफाई की कमी और अतिक्रमण के चलते से यह धीरे-धीरे अवरुद्ध होता गया। ऐसे में नदी जगह-जगह नाले का रूप लेती गई तो कई जगह अस्तित्व ही समाप्त हो गया। इसको पुनर्जीवन देने के लिए सिंचाई विभाग और मनरेगा जुट गए हैं। तैयार की गई योजना के तहत ग्राम पंचायत के माध्यम से इसकी सिल्ट सफाई का काम कराया जाएगा। साथ ही पटरियों पर खड़ी झाड़ियों को कटवाकर साफ कराया जाएगा। जिससे पानी का बहाव कहीं न रुके।
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जिले में 52 किलोमीटर तक बहती है
जिले में काक नदी का उद्गम स्थल मारहरा ब्लॉक का नयाबांस ताल है। गिरौरा गांव से होते हुए शीतलपुर ब्लॉक में कुसाढ़ी, सकीट ब्लॉक में करीब 9 गांव से होते हुए यह नदी मैनपुरी जिले में ईशन नदी में मिल जाती है। जिले में इसकी कुल लंबाई 52 किलोमीटर है।
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18 किलोमीटर तक कराई जाएगी सफाई
काक नदी की सिल्ट सफाई का काम करीब 18 किलोमीटर तक कराया जाएगा। इससे सबसे ज्यादा फायदा सकीट ब्लॉक क्षेत्र के गांवों को मिलेगा।
नौ गांवों को मिलेगा फायदा
सिल्ट सफाई के बाद 9 गांव को इस नदी से पानी मिलने लगेगा। जिनमें रेवाड़ी, नन्दपुर बेलामाई, नैनपुर, नगला काजी, मुबारिकपुर निवरुआ, कमालपुर मई, इशारा पूर्वी, भगवन्तपुर, मजरा जात सकीट शामिल हैं।
डीसी मनरेगा व बीडीओ ने किया निरीक्षण
डीसी मनरेगा प्रतिमा निमेश और सकीट ब्लॉक के बीडीओ अनुज मिश्रा ने काक नदी के पुनर्जीवन के लिए बुधवार को निरीक्षण किया। पता चला कि काक नदी के चारों ओर कटीली झाड़ियां खड़ी हुई हैं। पानी करीब एक से दो फीट तक है। उन्होंने बताया कि पानी सूखने के बाद इसके पुनरूद्धार का काम शुरू किया जाएगा।
जिले में काक नदी का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। पहले इसमें पानी चलता था तो सिंचाई के लिए काफी मदद मिलती थी। अगर इसकी सफाई हो तो किसानों को काफी फायदा मिलेगा।

- गिरंद शाक्य, रेवाड़ी
काक नदी जिले में नाले की तरह ही रह गई है। सफाई नहीं होने की वजह से पानी बहुत कम आता है। सफाई हो तो कई गांव के किसानों को फायदा मिले।
- भूप सिंह, कमालपुर मई
प्रशासन अगर इस नदी की सफाई कराए तो किसानों के लिए काफी राहत भरा काम होगा। पानी फिर से आने से सिंचाई करने का खर्चा भी बचेगा।
- राकेश कुमार यादव, कमालपुर मई
काक नदी की कई सालों से सफाई नहीं कराई गई जिसकी वजह से इसका अस्तित्व गायब होता जा रहा है। इसका पुनरुद्धार होना चाहिए।
- नवी हुसैन, मजरा जात सकीट
सिंचाई विभाग और मनरेगा द्वारा काक नदी के पुनरुद्धार का काम शुरू किया जाएगा। 19 लाख 60 हजार 427 रुपये की लागत से विभिन्न काम कराए जाएंगे। इसके लिए कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।
- प्रतिमा निमेश, डीसी, मनरेगा
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