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Etah News: 40 पर पहुंचा पारा, घरों से निकलना दुश्वार, लू का खतरा बढ़ा
Tue, 08 Apr 2025 11:58 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Tue, 08 Apr 2025 11:58 PM IST
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मेडिसिन विभाग में मरीजों को देखते चिकित्सक।
- फोटो : मेडिसिन विभाग में मरीजों को देखते चिकित्सक।
एटा। अधिकतम तापमान मंगलवार को 40 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। ऐसे में लोगों का घरों से निकला दुश्वार हो गया। सूरज दिनभर आग उगलता रहा। बुधवार को तापमान और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में लू का खतरा बढ़ गया है। जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को सचेत किया जा रहा है।
मंगलवार की दोपहर सूरज की तपिश ने झुलसाने का कार्य किया। हर ओर लोग तेज धूप से बचते नजर आए। जरूरी कार्य से निकलने वाले लोग ही सड़कों पर दिखाई दिए। स्कूलों में जाने वाली छात्राओं ने दुपट्टे से सिर और चेहरे को बचाने का प्रयास किया, लेकिन तेज धूप से राहत नहीं मिली। सीएमओ डॉ. उमेश त्रिपाठी ने बताया कि दिन-प्रतिदिन तापमान बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में लू भी चलेगी। ऐसे में लोगों को लू लगने का खतरा रहेगा। सीधे धूप के संपर्क में आना खतरनाक साबित हो सकता है। लू लगने से शरीर का पानी सूख जाता है। डिहाईड्रेशन से बचने के लिए हर घंटे पर एक गिलास पानी या फिर तरल पदार्थ लेते रहें। दोपहर के समय धूप में निकलने से बचें। जाना बेहद जरूरी है तो छाता-कैप लगाकर निकलें।
बुखार सहित डिहाईड्रेशन के आ रहे मरीज
मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में मरीजों को देख रहे डॉ. विजय ने बताया कि गर्मी की बजह से 20 से 25 मरीज उल्टी व दस्त के आते हैं। इसके अलावा बुखार के मरीजाें की संख्या अधिक रहती है। गर्मी में सोडियम की कमी से मरीज के पैराें में जकड़न, बीपी की कमी, बेहोशी भी आ जाती है। ज्यादा से ज्यादा पानी पीना ही बेहतर बचाव है।
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हैंडपंपों को करें क्रियाशील
सीडीओ डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि एटा लू मैप में अत्याधिक प्रभावित जनपदों में प्रदर्शित हो रहा है। 15 अप्रैल से 15 जुलाई तक से प्रदेश में लू-प्रकोप की संभावना अधिक है। इससे बचाव को एक रूपरेखा तैयार कर ली जाए। पेयजल की समुचित व्यवस्था होना आवश्यक है। अधीनस्थों को निर्देश दिए गए हैं कि जो भी पीने के पानी के लिए हैडपंप लगे हैं, वह कियाशील होने चाहिए। ब्लाॅक मुख्यालय पर एक कंट्रोल रूम की स्थापना की जाए। ब्लाॅक स्तर पर टीम का गठन कर लिया जाए। जो भी शिकायतें प्राप्त हो, तत्काल उनका निस्तारण कराया जाए।
पशुओं का सही रखें आहार प्रबंधन
गर्मियों के कारण पालतू और दुधारू पशुओं को भी सुरक्षित रखना चुनौती बन गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि 30 से 45 डिग्री. सेंटीग्रेड और कभी-कभी इससे भी अधिक तापमान पशुओं के लिए खतरनाक है। पशुओं के आहार प्रबंधक पर ध्यान देने की विशेष जरूरत है। इससे दूध उत्पादन घटने से रोका जा सकता है। पशुओं के दाने में मक्का, जौ के साथ ही हरा चारा, खनिज लवण एवं नमक का भी समावेश करें। जिससे पशुओं को प्रोटीन, ऊर्जा, खनिज, विटामिन की आवश्यक मात्रा उपलब्ध हो सके। हरे चारे की उपलब्धता कम है तो अलग से विटामिन दें। 25-30 ग्राम नमक जरूर खिलाएं और पानी भरपूर मात्रा में पिलाएं।
लू लगने के लक्षण
- पेट व मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होना।
- ब्लड प्रेशर कम हो सकता है।
- बेचैनी होने के साथ सोचना समझना मुश्किल महसूस हो सकता है।
- शरीर कर्म हो सकता है, ऊर्जा की कमी व थकना महसूस हो सकती है।
- सिरदर्द होने के साथ उल्टी हो सकती है। बेहोशी तक आ सकती है।
- सांस व दिल की धड़कन तेज हो सकती है।
इस तरह करें बचाव
- गर्मी में जूस व तरल पदार्थ का अत्यधिक सेवन करें।
- दिन भर में आठ से 10 गिलास पानी पिएं।
- दोपहर में घर से निकलने में बचें।
- गर्मी में बहुत ज्यादा मेहनत करने से बचें।
- धूप से बचने के लिए छाता गमछा आदि का इस्तेमाल करें।
- अचानक ठंडे से गर्म तापमान व गर्म से ठंडे में जाने से बचें।
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मंगलवार की दोपहर सूरज की तपिश ने झुलसाने का कार्य किया। हर ओर लोग तेज धूप से बचते नजर आए। जरूरी कार्य से निकलने वाले लोग ही सड़कों पर दिखाई दिए। स्कूलों में जाने वाली छात्राओं ने दुपट्टे से सिर और चेहरे को बचाने का प्रयास किया, लेकिन तेज धूप से राहत नहीं मिली। सीएमओ डॉ. उमेश त्रिपाठी ने बताया कि दिन-प्रतिदिन तापमान बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में लू भी चलेगी। ऐसे में लोगों को लू लगने का खतरा रहेगा। सीधे धूप के संपर्क में आना खतरनाक साबित हो सकता है। लू लगने से शरीर का पानी सूख जाता है। डिहाईड्रेशन से बचने के लिए हर घंटे पर एक गिलास पानी या फिर तरल पदार्थ लेते रहें। दोपहर के समय धूप में निकलने से बचें। जाना बेहद जरूरी है तो छाता-कैप लगाकर निकलें।
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बुखार सहित डिहाईड्रेशन के आ रहे मरीज
मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में मरीजों को देख रहे डॉ. विजय ने बताया कि गर्मी की बजह से 20 से 25 मरीज उल्टी व दस्त के आते हैं। इसके अलावा बुखार के मरीजाें की संख्या अधिक रहती है। गर्मी में सोडियम की कमी से मरीज के पैराें में जकड़न, बीपी की कमी, बेहोशी भी आ जाती है। ज्यादा से ज्यादा पानी पीना ही बेहतर बचाव है।
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हैंडपंपों को करें क्रियाशील
सीडीओ डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि एटा लू मैप में अत्याधिक प्रभावित जनपदों में प्रदर्शित हो रहा है। 15 अप्रैल से 15 जुलाई तक से प्रदेश में लू-प्रकोप की संभावना अधिक है। इससे बचाव को एक रूपरेखा तैयार कर ली जाए। पेयजल की समुचित व्यवस्था होना आवश्यक है। अधीनस्थों को निर्देश दिए गए हैं कि जो भी पीने के पानी के लिए हैडपंप लगे हैं, वह कियाशील होने चाहिए। ब्लाॅक मुख्यालय पर एक कंट्रोल रूम की स्थापना की जाए। ब्लाॅक स्तर पर टीम का गठन कर लिया जाए। जो भी शिकायतें प्राप्त हो, तत्काल उनका निस्तारण कराया जाए।
पशुओं का सही रखें आहार प्रबंधन
गर्मियों के कारण पालतू और दुधारू पशुओं को भी सुरक्षित रखना चुनौती बन गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि 30 से 45 डिग्री. सेंटीग्रेड और कभी-कभी इससे भी अधिक तापमान पशुओं के लिए खतरनाक है। पशुओं के आहार प्रबंधक पर ध्यान देने की विशेष जरूरत है। इससे दूध उत्पादन घटने से रोका जा सकता है। पशुओं के दाने में मक्का, जौ के साथ ही हरा चारा, खनिज लवण एवं नमक का भी समावेश करें। जिससे पशुओं को प्रोटीन, ऊर्जा, खनिज, विटामिन की आवश्यक मात्रा उपलब्ध हो सके। हरे चारे की उपलब्धता कम है तो अलग से विटामिन दें। 25-30 ग्राम नमक जरूर खिलाएं और पानी भरपूर मात्रा में पिलाएं।
लू लगने के लक्षण
- पेट व मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होना।
- ब्लड प्रेशर कम हो सकता है।
- बेचैनी होने के साथ सोचना समझना मुश्किल महसूस हो सकता है।
- शरीर कर्म हो सकता है, ऊर्जा की कमी व थकना महसूस हो सकती है।
- सिरदर्द होने के साथ उल्टी हो सकती है। बेहोशी तक आ सकती है।
- सांस व दिल की धड़कन तेज हो सकती है।
इस तरह करें बचाव
- गर्मी में जूस व तरल पदार्थ का अत्यधिक सेवन करें।
- दिन भर में आठ से 10 गिलास पानी पिएं।
- दोपहर में घर से निकलने में बचें।
- गर्मी में बहुत ज्यादा मेहनत करने से बचें।
- धूप से बचने के लिए छाता गमछा आदि का इस्तेमाल करें।
- अचानक ठंडे से गर्म तापमान व गर्म से ठंडे में जाने से बचें।