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100 हेक्टेयर में नहीं जलेगी पराली, वैज्ञानिक तरीके से होगा निस्तारण
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पराली के निस्तारण के लिए केवीके में उपलब्ध मशीनें। संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। धान की फसल काटने के बाद किसान खेत में पराली को खत्म करने के लिए जला देते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र ने फसल अवशेष को जलाने से बचने के लिए योजना तैयार की हैै। पराली को मशीनों द्वारा जोताई कर वैज्ञानिक तरीके से खत्म किया जाएगा। इसके लिए किसानों को कोई खर्चा भी नहीं करना होगा। इस साल जिले के तीन ब्लॉक क्षेत्रों में 100 हेक्टेयर की भूमि पराली मुक्त की जाएगी।
कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से इस बार पराली न जलाने को लेकर पहली बार तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे वायु प्रदूषण रोकने के साथ ही मृदा पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभाव को भी खत्म किया जाएगा।
कृषि विज्ञान केंद्र अवागढ़ की ओर से इस साल धान की फसल कटने के बाद खेतों में बची पराली को नष्ट करने के लिए वैज्ञानिक पद्धति का प्रयोग किया जाएगा। 50 से 55 हॉर्स पावर की मशीनों द्वारा खेतों में खड़ी पराली की जोताई की जाएगी। वहीं जोताई के साथ ही अगली फसल की बुवाई भी मशीन द्वारा की जाएगी।
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इसके लिए किसान से कोई खर्चा नहीं लिया जाएगा। हैप्पी शीडर, मल्चर, स्ट्रॉचौफर, सुपर सीडर आदि मशीनों द्वारा खेत में पराली को नष्ट किया जाएगा।
कृषि विज्ञान केंद्र ने इस साल जिले के आठ ब्लॉक में से तीन ब्लॉक की करीब 100 हेक्टेयर भूमि को पराली मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। अवागढ़, सकीट और जैथरा ब्लॉक में मशीन द्वारा पराली को खत्म किया जाएगा।
कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से तीन ब्लॉक की करीब 100 हेक्टेयर जमीन को पराली से मुक्त किया जाएगा। इस प्रक्रिया में बड़ी-बड़ी मशीनों का प्रयोग किया जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ही किसानों को भी काफी फायदा होगा।
मनीष सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख
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कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से इस बार पराली न जलाने को लेकर पहली बार तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे वायु प्रदूषण रोकने के साथ ही मृदा पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभाव को भी खत्म किया जाएगा।
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कृषि विज्ञान केंद्र अवागढ़ की ओर से इस साल धान की फसल कटने के बाद खेतों में बची पराली को नष्ट करने के लिए वैज्ञानिक पद्धति का प्रयोग किया जाएगा। 50 से 55 हॉर्स पावर की मशीनों द्वारा खेतों में खड़ी पराली की जोताई की जाएगी। वहीं जोताई के साथ ही अगली फसल की बुवाई भी मशीन द्वारा की जाएगी।
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इसके लिए किसान से कोई खर्चा नहीं लिया जाएगा। हैप्पी शीडर, मल्चर, स्ट्रॉचौफर, सुपर सीडर आदि मशीनों द्वारा खेत में पराली को नष्ट किया जाएगा।
कृषि विज्ञान केंद्र ने इस साल जिले के आठ ब्लॉक में से तीन ब्लॉक की करीब 100 हेक्टेयर भूमि को पराली मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। अवागढ़, सकीट और जैथरा ब्लॉक में मशीन द्वारा पराली को खत्म किया जाएगा।
कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से तीन ब्लॉक की करीब 100 हेक्टेयर जमीन को पराली से मुक्त किया जाएगा। इस प्रक्रिया में बड़ी-बड़ी मशीनों का प्रयोग किया जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ही किसानों को भी काफी फायदा होगा।
मनीष सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख