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शकुंतला, एकता और रजनी ने बहाई विकास की धारा तो सीएम ने सराहा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Dec 2016 11:42 PM IST
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लक्ष्मीबाई पुरस्कार
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को लखनऊ में जिले की 11 महिला ग्राम प्रधानों को रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से नवाजा है। इस दौरान महिला ग्राम प्रधानों को एक लाख रुपये के चेक और प्रशस्ति पत्र दिए गए। मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने महिला प्रधानों की ओर से कराए गए विकास कार्यों की नब्ज टटोली। इस दौरान गांवों में बिजली, पानी, सड़क समेत तमाम समस्याएं लगभग खत्म सी दिखीं।
सकीट विकास खंड के गांव दलेलपुर में प्रधान शकुंतला देवी ने गांव की सूरत बदल दी। 45 वर्षीय स्नातक पास प्रधान ने प्रस्ताव स्वीकृत कराकर नालियां, सीसी सड़कें बनवाईं। साथ ही बेटियों को शिक्षित करने पर जोर दिया। प्रधान शंकुतलादेवी कहती हैं कि गांव की सूरत बदलने को चुनाव लड़ा था। ग्रामीणों ने विश्वास जताया तो मैंने भी उनका साथ दिया।
विकास खंड सकीट के गांव मलावन में भी ग्राम प्रधान एकता यादव ने सड़कें और सफाई व्यवस्था में अन्य गांवों को पछाड़ दिया। वे बताती हैं कि गांव में सड़कों पर हर वक्त गंदगी रहती थी, इसके लिए ग्राम पंचायत निधि से काम कराया। अब गांव में रोज झाड़ू लगती हैं और नालियां साफ होती हैं। विकासखंड शीतलपुर के गांव दूल्हापुर की प्रधान रजनी ने भी काया पलट करने में अहम भूमिका निभाई। गांव में सौर ऊर्जा से सिंचाई करने की तकनीक स्थापित कर नई मिसाल कायम की। गांव में इसके बाद बिजली की समस्या काफी हद तक कम हुई। रजनी कहती हैं कि मुख्यमंत्री ने सम्मान देकर हमारे उत्साह को बढ़ाया है। पुरस्कार पाकर काफी खुशी है। यह धन भी गांव के विकास कार्य पर खर्च होगा।
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विकास खंड सकीट के गांव रिजोर की प्रधान अफसाना बेगम को भी मुख्यमंत्री ने रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से म्मानित किया। उन्होंने गांव में सड़क, पानी की सुविधा पर फोकस कर हालात सुधारे। अफसाना बेगम कहती हैं कि रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार ने उनका हौसला बढ़ाया है। अब गांव में तेजी से विकास कार्य होंगे।
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सकीट विकास खंड के गांव दलेलपुर में प्रधान शकुंतला देवी ने गांव की सूरत बदल दी। 45 वर्षीय स्नातक पास प्रधान ने प्रस्ताव स्वीकृत कराकर नालियां, सीसी सड़कें बनवाईं। साथ ही बेटियों को शिक्षित करने पर जोर दिया। प्रधान शंकुतलादेवी कहती हैं कि गांव की सूरत बदलने को चुनाव लड़ा था। ग्रामीणों ने विश्वास जताया तो मैंने भी उनका साथ दिया।
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विकास खंड सकीट के गांव मलावन में भी ग्राम प्रधान एकता यादव ने सड़कें और सफाई व्यवस्था में अन्य गांवों को पछाड़ दिया। वे बताती हैं कि गांव में सड़कों पर हर वक्त गंदगी रहती थी, इसके लिए ग्राम पंचायत निधि से काम कराया। अब गांव में रोज झाड़ू लगती हैं और नालियां साफ होती हैं। विकासखंड शीतलपुर के गांव दूल्हापुर की प्रधान रजनी ने भी काया पलट करने में अहम भूमिका निभाई। गांव में सौर ऊर्जा से सिंचाई करने की तकनीक स्थापित कर नई मिसाल कायम की। गांव में इसके बाद बिजली की समस्या काफी हद तक कम हुई। रजनी कहती हैं कि मुख्यमंत्री ने सम्मान देकर हमारे उत्साह को बढ़ाया है। पुरस्कार पाकर काफी खुशी है। यह धन भी गांव के विकास कार्य पर खर्च होगा।
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विकास खंड सकीट के गांव रिजोर की प्रधान अफसाना बेगम को भी मुख्यमंत्री ने रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से म्मानित किया। उन्होंने गांव में सड़क, पानी की सुविधा पर फोकस कर हालात सुधारे। अफसाना बेगम कहती हैं कि रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार ने उनका हौसला बढ़ाया है। अब गांव में तेजी से विकास कार्य होंगे।