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धार्मिक अनुष्ठान में उमड़े ग्रामीण
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Fri, 22 Jan 2016 11:20 PM IST
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ढोलना पैंठ में चल रही श्रीकृष्ण लीला का समापन शुक्रवार को कंस के वध के साथ हो गया। आयोजकों ने कलाकारों का सम्मान किया। कथा के समापन आयोजित भंडारे में काफी संख्या में ग्रामीणों ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण कर पुण्य अर्जित किया।
कथावाचक गोपाल महाराज ने कथा का वाचन किया। लीला मंचन में कलाकारों ने जैसे ही कंस का वध किया तो पूरा पंडाल श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला मनुष्य जीवन में प्रेरणादायी है। कभी एक चंचल बालक की तरह, तो कभी एक प्रेमी के रूप में, तो कभी राजनीतिज्ञ की तरह और कभी एक योद्धा के रूप में उन्होंने अपनी जिंदगी के हर पहलू में मानवजाति को जीवन जीने की शिक्षा दी। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर मनुष्य को अपने जीवन को संस्कारी बनाना चाहिए। कथा के आयोजक डा. वीडी राना ने कथावाचक और कलाकारों को शॉल व प्रतीक चिन्ह देकर उनका सम्मान किया। भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण कर पुण्य अर्जित किया।
इस दौरान अजय राना, मोहनलाल, ज्ञान वर्मा, नेत्रपाल वर्मा, नेम सिंह, नरेश सिंह, नरेश गौतम, साहब सिंह फौजी, देवेनद्र, छत्रपाल सिंह, होडिल सिंह प्रधान मौजूद रहे।
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कथावाचक गोपाल महाराज ने कथा का वाचन किया। लीला मंचन में कलाकारों ने जैसे ही कंस का वध किया तो पूरा पंडाल श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला मनुष्य जीवन में प्रेरणादायी है। कभी एक चंचल बालक की तरह, तो कभी एक प्रेमी के रूप में, तो कभी राजनीतिज्ञ की तरह और कभी एक योद्धा के रूप में उन्होंने अपनी जिंदगी के हर पहलू में मानवजाति को जीवन जीने की शिक्षा दी। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर मनुष्य को अपने जीवन को संस्कारी बनाना चाहिए। कथा के आयोजक डा. वीडी राना ने कथावाचक और कलाकारों को शॉल व प्रतीक चिन्ह देकर उनका सम्मान किया। भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण कर पुण्य अर्जित किया।
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इस दौरान अजय राना, मोहनलाल, ज्ञान वर्मा, नेत्रपाल वर्मा, नेम सिंह, नरेश सिंह, नरेश गौतम, साहब सिंह फौजी, देवेनद्र, छत्रपाल सिंह, होडिल सिंह प्रधान मौजूद रहे।
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